नई दिल्ली। विश्व बाल दिवस के मौके पर क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर सोमवार को दिल्ली में यूनिसेफ के एक इवेंट में शामिल हुए। यूनिसेफ के ब्रैंड अंबेसडर सचिन ने यहां यूनिसेफ द्वारा विश्व बाल दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में ना केवल इन बच्चों के साथ समय बिताया बल्कि उनके साथ क्रिकेट भी खेली। सचिन ने इन बच्चों को क्रिकेट के गुर भी सिखाए।
इस मौके पर सचिन ने कई बड़ी बातें कहीं। उन्होंने कहा कि "जब मैं 13 साल का था तो मुझे क्रिकेट की वजह से बहुत ट्रैवल करना पड़ता था। शुरू में पेरेंट्स साथ जाते थे, लेकिन बाद में अकेले जाने लगा। कई-कई महीने मुझे मम्मी-पापा से अलग रहना पड़ता था। तब बहुत बुरा लगता था। लेकिन पेरेंट्स की ओर से अपने फैसले खुद लेने की आजादी मिलना मेरी कामयाबी की बड़ी वजह है।"
इस दौरान आयोजित 5-5 ओवर के मैच में सचिन भले ही छोटे-छोटे विशेष बच्चों के साथ खेल रहे थे, लेकिन उनमें वही जज्बा दिखा जो कभी क्रिकेट के मैदान पर वह दिखाते थे। इंटरनेशनल क्रिकेट में शतकों का शतक लगाने का रिकॉर्ड अपने नाम करने वाले तेंदुलकर ने कहा, 'आप देखेंगे कि तीन साल का बच्चा भी कंप्यूटर अच्छे से चला लेता है।
उसे पता है कि क्या करना है। मोबाइल फोन से वो कॉल या फिर मैसेज भेज सकता है। इन सभी फैंसी गैजेट्स से उसे नई दिशा मिल रही है।' सचिन ने कहा कि टेक्नोलॉजी से मौजूदा पीढ़ी को स्मार्ट बनने में मदद मिल रही है और पिछली पीढ़ी के मुकाबले वो अधिक विश्वस्त हो गए हैं।
सचिन ने बेटियों के बेटों के बराबर सम्मान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि "बेटी घर की लक्ष्मी होती है। यह बात सभी कहते हैं, मगर मानता कोई नहीं। आज भी लड़कियों को एजुकेशन, हाइजीन और अपनी सुरक्षा से समझौता करना पड़ रहा है। इसके लिए बेटी को लक्ष्मी कहने भर से काम नहीं चलेगा, समझना भी पड़ेगा।"
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