नई दिल्ली। भारतीय महिला मुक्केबाजी टीम के सदस्यों को उस समय शर्मनाक पल से होकर गुजरना पड़ा जब बॉक्सिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप में जाने से पहले प्रेग्नेंसी टेस्ट से गुजरना पड़ा। शर्मनाक पल इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए जिन खिलाड़ियों को प्रेग्नेंसी टेस्ट से गुजरना पड़ा है उनमें से ज्यादातर महिला बॉक्सर कुआंरी हैं और उन्हें मजबूर किया गया प्रेग्नेंसी टेस्ट के लिए।
इस बात की जानकारी इंडियन स्पोर्ट्स मेडिसिन के प्रेसीडेंट डॉक्टर पीएसएम चंद्रन ने मीडिया को दी है हालांकि भारतीय खेल प्राधिकरण ने इस मामले में किसी भी तरह से टिप्पणी से इंकार कर दिया है। जिसके बाद चंद्रन की बातों पर लोगों का विश्वास गहराता जा रहा है। चंद्रन ने अपनी प्रेस रिलीज में कहा है कि महिला बॉक्सरों का प्रेंग्नेसी टेस्ट दिल्ली के एक लैब में कराया गया है।
डॉ. चंद्रन ने प्रेस रिलीज में कहा है कि 8 कुंवारी युवतियों का भी 'प्रेग्नेंस टेस्ट लिया गया। इनमें कई जूनियर खिलाड़ी भी शामिल हैं। यह साफ-साफ मानवाधिकार के उल्लंघन का मामला है और हैरत की बात यह है कि ऐसा कानून के खिलाफ जाकर किया गया।'
जबकि नियम के मुताबिक 18 साल या उससे बड़ी सभी महिला बॉक्सरों को अपने रिंगसाइड फिजिशियन से सर्टिफिकेट लेना है कि वे गभर्वती नहीं हैं और 18 साल से कम उम्र की लड़कियों को अपने और अपने अभिभावक या कानूनी सलाहकार के जरिये सर्टिफिकेट देने की जरूरत होगी लेकिन किसी भी हालत में टेस्ट किसी लैब में नहीं होते हैं ऐसे में महिला बॉक्सरों के साथ नाइंसाफी की गई है जिस पर प्राधिकरण को जवाब देना होगा। गौरतलब है कि दक्षिण कोरिया में इसी महीने होने वाली बॉक्सिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप है।