IPL 2019 : इन 4 कमजोरियों को विराट कोहली कर लें दूर तो RCB बन सकती है 'चैंपियन'
नई दिल्ली : इंडियन प्रीमियर लीग (Indian Premier League) के 12वें संस्करण में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू (Royal Challengers Bangalore) की टीम एक के बाद एक चार लगातार चार मैच हार चुकी है। अंक तालिका में यह टीम अभी सबसे नीचे है। कागज पर सबसे मजबूत दिखने वाली टीम किसी भी गेंदबाजी अटैक के सामने ताश के पत्तों की तरह बिखर जाती है। आईपीएल के शुरू होने से पहले गौतम गंभीर ने विराट कोहली की आईपीएल कप्तानी पर सवाल उठाया था। आईपीएल में मिली लगातार चौथी हार के बाद सोशल मीडिया पर यह बहस भी तेज हो गई है कि क्या कोहली सिर्फ कप्तान हैं उनमें लीडर के गुण नहीं हैं। यूजर्स टी-20 क्रिकेट में रोहित शर्मा को विराट से बेहतर कप्तान बता रहे हैं। जानिए आईपीएल में मिली चार लगातार हार से RCB की कौन-कौन सी 4 बड़ी कमजोरी सामने आ गई है और अगर विराट इन कमियों को जल्द ठीक कर लें तो उनकी टीम चैंपियन भी बन सकती है।

विराट और ABD पर निर्भरता
2017 में यह टीम 8वें पायदन पर तो 2018 में छठे पायदान पर रही थी। आईपीएल जैसे टी-20 लीग को जीतने के लिए किसी एक या दो खिलाड़ी पर अत्यधिक निर्भरता घातक साबित हो रही है। जब तक इस टीम में यूनिवर्स बॉस क्रिस गेल थे, टीम कमोबेश उन पर आश्रित दिखती थी, अब यही हाल विराट कोहली और ए.बी डिविलियर्स को लेकर हो रहा है। ओपनर की कमी होने की वजह से विराट खुद बतौर ओपनर खेलते हैं और वे शुरुआती ओवर में ही आक्रमण के चक्कर में बड़े स्कोर में विफल हो जा रहे हैं। पार्थिव पटेल इस टीम के नैचुरल स्ट्रोक मेकिंग कर रहे हैं लेकिन उन्हें बाकी खिलाड़ियों का साथ नहीं मिलता दिखता है। यह विराट के टीम की सबसे बड़ी कमजोरी है।
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शानदार ऑल राउंडर की कमी
रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू की टीम के लिए दूसरी और सबसे बड़ी कमजोर कड़ी है टीम में शानदार ऑल राउंडर की कमी। इंग्लैंड के मोईन अली को टीम में बतौर ऑल राउंडर शामिल किया गया है लेकिन उनका प्रदर्शन औसत से भी नीचे रहा है। कॉलिंग डीग्रांडहोम का प्रदर्शन भी बहुत उम्दा नहीं रहा है वहीं मार्कस स्टोइनिस इस टीम से जुड़ते ही अपनी भूमिका निभाते दिखे, नाथन कुल्टरनाइल को अभी मौका नहीं मिला है। अगर एक ऑल राउंडर टीम में अपनी भूमिका निभाएं तो विराट का सिरदर्द कम हो सकता है।

अत्यधिक बदलाव
विराट कोहली टीम इंडिया के कप्तान हों या RCB के वो प्लेइंग-11 में बदलाव हमेशा करते रहते हैं। आईपीएल जैसे लीग में बदलाव आवश्यक हैं लेकिन अत्यधिक बदलाव टीम के मोमेंटम को तोड़ देते हैं। कोहली ने लगतार चार हार के बाद भी टीम में बदलाव के संकेत दिए हैं। इम्पैक्ट खिलाड़ी और व्यक्तिगत तौर पर बेस्ट खिलाड़ी टीम को जीत तो दिला सकते हैं लेकिन अगर विराट प्लेइंग-11 में थोड़ी निश्चितता ले आएं तो शायद परिणाम उनके पक्ष में आएंगे। टेस्ट और ODI में तो बदलाव के बेहतर परिणाम देखने को मिलते हैं लेकिन टी-20 जैसे लीग में मैच दर मैच यह परिणाम आपके पक्ष में नहीं हो सकते हैं।

डेथ ओवर में घातक गेंदबाजों की कमी
रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू की टीम की ओर से खेलने वाले युजवेंद्र चहल भले ही आईपीएल के पर्पल कैप होल्डर हों लेकिन इस टीम में घातक गेंदबाजी करने वाले तेज गेंदबाजों की कमी है। उमेश यादव की गेंदों पर बल्लेबाज जमकर धुनाई करते हैं वहीं मोहम्मद सिराज अब तक अपनी लय पाने में ही जुटे हैं। नवदीप सैनी 150 किमी/घंटे की रफ्तार से गेंद तो फेंक रहे हैं लेकिन उनकी गेंदों में वो धार अब तक नहीं दिखी जो बल्लेबाजों को परेशान कर सके। विराट कोहली अगर इस कॉम्बिनेशन पर ध्यान दें तो नतीजे शायद उनके पक्ष में हो सकते हैं।
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