
क्रिकटे में चीयरलीडर्स की शुरुआत:
क्रिकेट के मैदान पर चीयरलीडर्स का जलवा पहली बार साउथ अफ्रीका में हुए टी-20 विश्वकप के दौरान दिखने को मिली था। हालांकि खबरों की मानें तो इसकी शुरुआत सबसे पहले अमेरिका में देखने को मिली जब मिनसोटा यूनिवर्सिटी में 1898 में एक फुटबॉल मैच के दौरान इसका प्रयोग हुआ था। इसमें चीयरलीडर्स के तौर पर महिला नहीं पुरुष थे।हैरत की बात यह कि 1923 तक इस प्रोफेशन का हिस्सा सिर्फ लड़के ही हुआ करते थे, लेकिन जब इसकी मांग बढ़ने लगी तो इसमें महिलाएं बढ़कर हिस्सा लेने लगीं।

इस देशी की चीयरलीडर्स की डिमांड:
इस प्रोफेशन की शुरूआत अमेरिका में हई और आज भी चीयरलीडिंग के इस प्रोफेशन में अमेरिकी मूल की लड़कियों की संख्या ज्यादा है।आईपीएल में भी अमेरिका और ब्रिटेन की लड़कियों पर ही टीमें सबसे ज्यादा दांव लगाती हैं। इसका कारण यह है कि इस देश की लड़कियों के लुक्स लोगों को ज्यादा लुभाते हैं।

ऐसे मिलती है सैलरी:
चीयरलीडर्स का आमदनी की बात करें तो इन्हें सैलरी महीने के आधार पर नहीं बल्कि हर मैच के हिसाब से दी जाती है। चीयरलीडर्स की एक मैच से करीब 6 से 12 हजार रुपये की आमदनी होती है। इसके अलावा अगर चीयरलीडर्स जिस टीम को सपोर्ट कर रही हैं वो टीम जीतती है तो फिर उन्हें इनाम के तौर पर भी 3 हजार रुपये अलग से मिलते हैं। इसके अलावा पार्टी और फोटोशूट के लिए भी इन चीयरलीडर्स को 6-10 हजार के बीच भुगतान किया जाता है। आईपीएल में तो अधिकतर चीयरलीडर्स अमेरिका, ब्रिटेन, मैक्सिको, फ्रांस, ब्राजील, यूक्रेन और साउथ अफ्रीका से बुलाई जाती है।

यह टीम खर्च करती है सबसे ज्यादा पैसे:
चीयरलीडर्स की कमाई की बात करें तो वह टीम के प्रदर्शन पर ही निर्भर करती है। केकेआर अपनी चीयरलीडर्स को सबसे ज्यादा पैसा देती है। खबरों की मानें तो शाहरुख अपने चीयरलीडर्स की कमाई में हर साल एक प्रतिशत का इजाफा करते हैं। इसके बाद आरसीबी इन चीयरलीडर्स पर खूब पैसे खर्च करती है। हालांकि की बार चीयरलीडर्स को लेकर विवाद ने तूल पकड़ा है लेकिन फिर भी आयोजनों में चीयरलीडर्स का तड़कका अनवरत जारी है।


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