
अधर में लटका है अहमदाबाद का मालिकाना हक
सीवीसी स्पोर्टस ने अहमदाबाद की टीम को 5625 करोड़ रुपये में खरीदा है। इस मामले के सामने आने के बाद आईपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी ने भी ट्वीट कर बीसीसीआई पर निशाना साधा और कहा कि शायद अब नियमों में बदलाव हो गया है और अब बेटिंग कंपनियां भी आईपीएल में टीम खरीदने की हकदार बन गई हैं। क्या बीसीसीआई ने टीम बेचने से पहले अपना होम वर्क नहीं किया था, ऐसे मामले में एंटी करप्शन क्या कर सकता है।
इन रिपोर्ट के सामने आने के बाद बीसीसीआई ने करार पर एनओसी देने पर रोक लगा दी और मामले को कानूनी तरीके से पूरी जांच करने का फैसला लिया। पिछले कुछ समय से इस मामले पर लगातार चुप्पी बनी हुई है, जिसके बाद अब तक तय नहीं हो पा रहा है कि क्या अहमदाबाद की टीम नीलामी का हिस्सा बन पायेगी। गौरतलब है कि अगर सीवीसी स्पोर्टस से अहमदाबाद के मालिकाना हक छीन लिये जाते हैं तो दोबारा से नीलामी की जायेगी और इससे बोर्ड के 15वें सीजन की नीलामी के शेड्यूल में देरी हो सकती है।

सीवीसी स्पोर्टस के खिलाफ गई है कानूनी सलाह
इस मामले पर क्रिकबज ने ताजा जानकारी देते हुए रिपोर्ट जारी की है, जिसके अनुसार बीसीसीआई ने इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट के एक रिटायर्ड जज से संपर्क किया है और उनकी सलाह का इंतजार कर रही है। ऐसे में जो भी सलाह होगी उसी के हिसाब से अहमदाबाद के भविष्य पर फैसला हो पायेगा। गौरतलब है कि अगर सीवीसी स्पोर्टस की टीम कानूनी प्रक्रिया में अहमदाबाद की टीम को रिटेन कर पाने में नाकाम रहती है तो अहमदाबाद के लिये दूसरी सबसे ज्यादा बोली लगाने वाले अडानी ग्रुप को इसका जिम्मा दे दिया जायेगा।
क्रिकबज की रिपोर्ट के अनुसार विशेषज्ञों की सलाह सीवीसी स्पोर्टस के खिलाफ गई है। जहां एक ओर अहमदाबाद की टीम के मालिकाना हक पर अनिश्चितता के बादल छाये हुए हैं तो वहीं पर बोर्ड और टीम के बीच सकारात्मकता बनी हुई है।

इस नियम के तहत बीसीसीआई दे सकती है मालिकाना हक
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार आईपीएल में अहमदाबाद की फ्रैंचाइजी के मालिकाना हक को लेकर बीसीसीआई को सीवीसी स्पोर्टस से कोई दिक्कत नहीं है। इसके पीछे का मुख्य कारण है सीवीसी स्पोर्टस के जिस कनेक्शन की बात की जा रही है वह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर है जबकि उसके एशियाई शेयरधारक का इससे कोई भी नाता नहीं है और न ही बेटिंग कंपनियों में कोई निवेश है।
संडे एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के अनुसार सीवीसी के पास दो तरह के फंड है, जिसमें एक यूरोपियन है तो दूसरा एशियन। जहां एक ओर सीवीसी के यूरोपियन फंड के लिंक खेल से जुड़ी बेटिंग कंपनियों के निवेश से है (जो कि कानूनी तौर पर वैध है) तो वहीं पर एशियन फंड पूरी तरह से क्लीन है। इतना ही नहीं सीवीसी ने आईपीएल में अपने एशियन फंड को निवेश किया है। बीसीसीआई फिलहाल इसी समझ के तहत काम कर रही है लेकिन इस मुद्दे पर पूरी तरह से क्लियर होने के लिये वह एक समिति बना सकती है जो कि 25 दिसंबर तक इस पर आखिरी फैसला सुना सकता है।'


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