भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) का कहना है कि इंडियन प्रीमियर लीग की गवर्निंग काउंसिल की 26 अप्रैल को होने वाली बैठक अपने कार्यक्रम के मुताबिक़ ही होगी.
इससे पहले ऐसी ख़बरें आई थीं कि ललित मोदी ने बैठक की तारीख़ को आगे बढ़ाने का आग्रह किया था, लेकिन बीसीसीआई अध्यक्ष शशांक मनोहर ने ऐसा करने से इनकार कर दिया.
रिपोर्टों के मुताबिक़ ललित मोदी ने कहा था कि 26 अप्रैल की बैठक अनाधिकृत है और गवर्निंग काउंसिल की बैठक एक मई को हो ताकि उन्हें अपने बचाव के लिए तैयारी का मौक़ा मिल सके.
जब शशांक मनोहर से ललित मोदी की इस बात पर टिप्पणी मांगी गई, तो उन्होंने कहा कि सभी को अपनी बात कहने का हक़ है.
ललित मोदी ने तर्क दिया था कि बीसीसीआई सचिव एन श्रीनिवासन गवर्निंग काउंसिल की बैठक नहीं बुला सकते क्योंकि वो एक आईपीएल फ़्रैंचाइज़ का हिस्सा हैं.
इस मुद्दे पर शशांक मनोहर ने कहा, "यहाँ पर मालिक होने का प्रश्न नहीं है. श्रीनिवासन मालिक की हैसियत से बैठक नहीं बुला रहे हैं. वो बीसीसीआई सचिव हैं और सचिव ही बैठकों का आयोजन करता है."
शशांक मनोहर ने कहा कि बीसीसीआई को नहीं पता कि श्रीनिवासन का हिस्सा कितना है. उन्होंने ये भी कहा कि ये स्पष्ट नहीं है कि क्या किसी फ़्रैंचाइज़ी और सौदे में मोदी के सगे-संबंधी का हिस्सा है या नहीं.
उधर लखनऊ से ख़बर है कि आयकर विभाग के अधिकारी सहारा ग्रुप के दफ़्तर पहुँचे हैं. अगले साल से आईपीएल में दो और टीमें शामिल होंगी. इनमें से एक पुणे की टीम सहारा ने ख़रीदी है.
इससे पहले आयकर विभाग ने दूसरे आईपीएल फ़्रैंचाइज़ियों जैसे कोलकाता नाइट राइडर्स के दफ़्तरों का “सर्वे" किया था. इन अभियानों में क्या बातें सामने आई हैं, ये स्पष्ट नहीं है.
उधर बीबीसी से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री शरद पवार की बेटी सुप्रिया सूले ने कहा है कि उनके परिवार का आईपीएल से कोई लेना-देना नहीं है.
अख़बारों में ऐसी रिपोर्टें छपीं थीं कि सुप्रिया सूले के पति सदानंद सूले का आईपीएल की प्रसारण कंपनी मल्टीस्क्रीन मीडिया या एमएसएम (पूर्व में सोनी इंटरटेनमेंट टेलीविज़न) में हिस्सा है.
इस पर सुप्रिया सूले ने कहा, "वर्ष 1992 से मेरे ससुर के इस कंपनी में शेयर थे. वो सोनी इंडिया के प्रमुख थे और ये छिपी हुई बात नहीं है. पाँच साल पहले उन्हें दिल का दौरा पड़ा था, तभी से मेरे पति उनका प्रतिनिधित्व करते हैं. कंपनी एमएसएम के शेयर मेरे पति के नाम पर नहीं हैं. और किसी के नाम पर शेयर होने का ये मतलब नहीं कि वो कसूरवार है."
लेकिन कंपनी में शेयर होने का ये अर्थ निकालना कितना सही होगा कि इससे फ़ैसलों पर भी असर पड़ा होगा, इस पर सुप्रिया सूले ने कहा, “फ़ैसले की पूरी प्रक्रिया साफ़-सुथरी थी और कंपनी ने बीसीसीआई को पैसे दिए हैं. उन्हें कोई भी चीज़ मुफ़्त में नहीं मिली है. इससे हमें किसी भी तरह का कोई फ़ायदा नहीं पहुँचा है."
उधर नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी ने एक बार फिर कहा है कि उसका आईपीएल से कोई लेना-देना नहीं है.
एक अखबार में रिपोर्ट छपी थी कि शशि थरूर के कहने पर प्रफुल्ल पटेल के दफ़्तर से उन्हें एक ईमेल भेजा गया था जिसमें आईपीएल में शामिल होने वाले नए फ़्रैंचाइज़ी के मूल्यांकन से जुड़ी जानकारी थी.
प्रफुल्ल पटेल ने अख़बार से कहा कि शशि थरूर ने उनसे कुछ जानकारी मांगी थी क्योंकि वो कोच्चि टीम को इकट्ठा कर रहे थे.
प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि उन्होंने ललित मोदी से बात की थी और उन्हें कुछ पता नहीं कि किस तरह की जानकारियाँ शशि थरूर को दी गईं.
प्रफुल्ल पटेल की बेटी पूर्णा पटेल ने अख़बार को बताया कि उन्होंने ये ईमेल आईपीएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुंदर रामन के कहने पर अपने पिता को आगे बढ़ाया था.
इस खबर के बाद सारा ध्यान प्रफुल्ल पटेल पर केंद्रित हो गया है.
इस पर एनसीपी प्रवक्ता डीपी त्रिपाठी ने कहा कि बीसीसीआई मामले का आकलन कर रही है.
उन्होंने कहा कि पूर्णा पटेल आईपीएल के साथ पिछले तीन साल से काम कर रही हैं. इसमे कोई गलत बात नहीं है. जो सूचनाएँ गोपनीय नहीं हैं, वो सूचनाएं ईमेल से दी गईं. इसमें सरकार का कोई शामिल नहीं हैं. ये ईमेल प्रफुल्ल पटेल के निजी दफ़्तर से किया गया.