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किरण मोरे ने बताया कैसे अच्छे खिलाड़ी से महान प्लेयर बनें एमएस धोनी

नई दिल्ली। भारतीय टीम के सबसे महान कप्तानों में से एक एमएस धोनी ने अपने करियर के दौरान टीम इंडिया को आईसीसी की हर ट्रॉफी को जिताया, इसमें 2007 का टी-20 विश्व कप, 2011 का वनडे विश्व कप और 2013 की चैंपियंस ट्रॉफी भी शामिल है। भारतीय टीम के इस दिग्गज बल्लेबाज के चयन में अहम भूूमिका निभाने वाले किरण मोरे ने अब इस खिलाड़ी को लेकर बयान दिया है कि जब भारतीय टीम में धोनी का चयन तब वह आज जैसे बिल्कुल भी नहीं थे। किरण मोरे का मानना है कि जब उन्होंने भारतीय टीम के लिये डेब्यू किया तब उनमें काफी कमियां थी लेकिन खुद में सुधार करने की कला ने धोनी को अच्छे खिलाड़ी से महान खिलाड़ी की श्रेणी में ला खड़ा किया।

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उल्लेखनीय है कि एमएस धोनी ने भारतीय क्रिकेट टीम के लिये तीनों प्रारूप में कप्तानी करते हुए भारतीय क्रिकेट को शिखर की ऊंचाइयों तक पहुंचाया। इस दौरान उन्होंने 16 साल देश का नेतृत्व किया।

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धोनी के चयन पर भी उठे थे सवाल, ऐसे किया सबका मुंह बंद

धोनी के चयन पर भी उठे थे सवाल, ऐसे किया सबका मुंह बंद

बीसीसीआाई की क्रिकेट सलाहकार समिति के अध्यक्ष रह चुके किरण मोरे ने कहा कि जब भारतीय टीम में पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का चयन हुआ था तब भी लोगों ने उनके स्किल्स पर सवाल उठाये थे।

उन्होंने कहा,' जब हमने महेंद्र सिंह धोनी में प्रतिभा देखी और उसे एक मौका दिया तब भी लोगों ने उसके टैलेंट पर सवाल उठाये थे। इसमें कोई शक नहीं की शुरुआती दिनों में उसकी विकेटकीपिंग स्किल्स में कुछ दिक्कतें थी लेकिन धोनी की लगातार मेहनत करने की कला ने आज उसे वो बना दिया जिससे वो दुनिया के नायाब विकेटकीपरों में शुमार हो गये हैं। उन्होंने अपने खेल पर बहुत मेहनत की और हर मैच के साथ बेहतर से और बेहतर बनते गए।'

खिलाड़ी को ऊभरने के लिये मौके देने की जरूरत

खिलाड़ी को ऊभरने के लिये मौके देने की जरूरत

किरण मोरे को सीनियर खिलाड़ियों को बाहर करने और युवा खिलाड़ियों को मौका देने के लिये जाना जाता है।

धोनी को लेकर मोरे ने कहा,'उसने पहले वनडे क्रिकेट खेला और फिर टेस्ट क्रिकेट में कदम रखा। टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू करने के बाद धोनी के सामने कई चुनौतियां भी आई जिसका उसने डंटकर सामना किया। उसे इस बात का अहसास था कि टेस्ट क्रिकेट खेलने के लिये उसे कई सारी चुनौतियां का सामना करना पड़ेगा और विकेटकीपिंग स्किल्स को सुधारना पड़ेगा।

सीनियर खिलाड़ियों से छीनी कमान, धोनी को बनाया था कप्तान

सीनियर खिलाड़ियों से छीनी कमान, धोनी को बनाया था कप्तान

उल्लेखनीय है कि किरण मोरे उसी क्रिकेट सलाहकार समिति के अध्यक्ष थे जिसने सौरव गांगुली से कप्तानी छीनने और उनके बल्लेबाजी के दिनों को पूरा होने की बात कही थी। रिपोर्ट के अनुसार किरण मोरे की ही समिति थी जिसने कहा था कि सौरव गांगुली को अब कभी भी बल्लेबाजी करने का मौका नहीं मिलेगा। जिसे वेंगसरकर के चुनाव के बाद गांगुली ने गलत साबित किया और पाकिस्तान के खिलाफ करियर का इकलौता दोहरा शतक लगाया। बाद में आगे चलकर गांगुली ने इसी कैलेंडर ईयर में 1000 से ज्यादा रन बनाये।

हालांकि गांगुली के मामले में भले ही किरण मोरे की बात गलत साबित हुई लेकिन धोनी के चयन में अहम भूमिका निभाने वाले इस खिलाड़ी के लिये पूर्व कप्तान सही साबित हुए।

ऐसा रहा है धोनी का करियर

ऐसा रहा है धोनी का करियर

बांग्लादेश के खिलाफ 23 दिसंबर 2004 को डेब्यू करने वाले एमएस धोनी ने भारत के लिये अपने करियर के दौरान 90 टेस्ट मैच, 350 वनडे मैच और 98 टी-20 मैचों में शिरकत की हैं। इस दौरान धोनी ने टेस्ट प्रारूूुप में 38.09 की औसत से 4876 रन, वनडे प्रारूप में 50.6 की औसत से 10773 रन और टी20 प्रारूप में 37.60 की औसत से 1617 रन बनाये हैं।

धोनी पिछले विश्व कप के बाद से लगातार मैदान से दूर चल रहे हैं हालांकि खेल से संन्यास लेने को लेकर उन्होंने कोई भी ऐलान नहीं किया है।

Story first published: Saturday, April 11, 2020, 14:24 [IST]
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