धर्मशाला। वैसे तो बीसीसीआई और टीम इंडिया की पूरी कोशिश होती है कि टीम के अंदर जो कुछ भी हो रहा है वो मीडिया और लोगों के सामने ना आये लेकिन कुछ ना कुछ ऐसा हो ही जाता है जो दो लोगों के बीच चल रहे टेंशन को जाहिर कर देता है। आप समझ ही गये होंगे कि हम किनकी बातें कर रहे हैं.. जी हां ..यहां बात हो रही है टीम इंडिया के टी 20 और वनडे टीम के कैप्टन महेन्द्र सिंह धोनी और टेस्ट टीम के कप्तान विराट कोहली की।
टी20 के ठीक पहले कप्तान धोनी ने आक्रामकता के प्रश्न पर जवाब दिया कि आक्रामक होने का मतलब यह नहीं होता कि आप किसी से छींटा-कशी करें या फिर शारीरिक संपर्क के जरिये अपना गुस्सा जाहिर करें।आक्रामक होने का मतलब आप खेल अपना नियमों के अंदर काम करें।
धोनी शायद अपनी इस बात से विराट कोहली को समझाना चाह रहे थे जो कि कई बार आक्रामकता की वजह से लोगों की आलोचना का शिकार हो जाते हैं। श्रीलंका दौरे पर तो उन्होंने आक्रामक ईशांत शर्मा का साथ दिया था जिसके बाद तो ईशांत पर आईसीसी ने एक मैच का बैन लगा दिया था।
धोनी का कोहली पर हमला, कहा-आक्रामकता मतलब लड़ाई-झगड़ा नहीं
गौरतलब है कि धोनी काफी कूल माइंड कहे जाते हैं तो विराट कोहली काफी एग्रेसिव. इसलिए टीवी चैनलों पर अक्सर कहा जाता है कि दोनों के बीच विचारों का अंतर इसी प्रवृत्ति के कारण है।