मीरपुर। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में जिस तरह से विराट कोहली ने अपने आपको स्थापित किया है उसका क्रिकेट जगत का हर दिग्गज लोहा मानता है। एशिया कप में कोहली का प्रदर्शन 8 मार्च से शुरु हो रहे टी-20 विश्वकप से पहले टीम इंडिया के लिए बेहतर संकेत है। पाकिस्तान और श्रीलंका के खिलाफ जिस तरह से टीम इंडिया का शुरुआती बल्लेबाजी क्रम लड़खड़ाया उस बीच मैदान पर बल्लेबाजी करने उतरे विराट कोहली ने धैर्य का परिचय देते हुए टीम को संकट से उबारा।
टीम को संकट के बीच से निकाल कर लाना उन्हें 90 के दशक के सचिन तेंदुलकर से आगे ले जाता है। पिछले छह टी-20 मैच में कोहली ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। एशिया कप में खेले गये दोनों मैचों में एक में कोहली ने 49 जबकि दूसरे में 56 रन की नाबाद पारी खेली।
पाकिस्तान के खिलाफ जिस तरह से भारतीय बल्लेबाजों के सामने मोहम्मद आमिर अपनी गेंदबाजी से मुश्किल खड़े कर रहे थे उस वक्त मैदान पर बल्लेबाजी करने उतरे विराट कोहली ने शानदार क्लास और धैर्य का प्रदर्शन करते हुए टीम को जीत की राह दिखायी।
वीरेंद्र सहवाग के टीम में आने से पहले सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली में काफी समानतायें हैं। जिस वक्त धुरंधर गेंदबाजों को सचिन सीधे बल्ले से बाउंड्री के पार पहुंचाते थे उससे कहीं आगे जाकर कोहली गेंदबाजों को जबरदस्त कवर ड्राइव के जरिए मैदान के पार पहुंचाते हैं।
यूं तो कोहली को अग्रेसिव माना जाता है लेकिन मुश्किल समय में गजब का धैर्य दिखाने में कोहली कभी पीछे नहीं रहते। इसी का मुजायरा उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ युवराज सिंह के साथ बल्लेबाजी करते हुए दिखाया। जिस वक्त टीम खतरे में थे उस वक्त धैर्य से बल्लेबाजी करते हुए कोहली ने स्ट्राइक रोटट की और युवी के गियर बदलने के समय वह उन्हें स्ट्राइक देते रहे। वहीं 2014 के इंग्लैंड दौरे के बाद आस्ट्रेलिया के खिलाफ उनके ओडीआई सीरीज पर नजर डालें तो कोहली ने 76.20 के औसत से शानदार 381 रन बनाये।
1990 के दशक में सचिन तेंदुलकर के आउट होने के बाद टीम बुरी तरह से धराशायी हो जाती थी जिसके चलते टीम को हार का सामना करना पड़ता था। लेकिन जिस तरह से आज की टीम है उसमें बाकी के बल्लेबाज बेहतरीन तरीके से टीम को संभालते हैं वह कोहली को बेहतरीन प्रदर्शन के लिए और मजबूत जमीन प्रदान करती है।