
ग्वालियर फरवरी 2010
वनडे क्रिकेट के इतिहास की पहली डबल सेंचुरी और इसके साथ जुड़ा सचिन तेंदुलकर का नाम। सचिन ने 147 गेंदो पर 200 रन बनाए और साउथ अफ्रीका के बॉलर्स की बखिया उधेड़कर रख दी थी। सचिन की इस इनिंग्स को आज तक क्रिकेट के दिग्गज सलाम करते हैं।

वर्ष 1994 ऑकलैंड
न्यूजीलैंड 142 रनों पर ऑल आउट हो गई थी। सचिन इस मैच से पहले मीडिल ऑर्डर पर बैटिंग के लिए आते थे लेकिन नवजोत सिंह सिद्धू मैच के लिए फिट नहीं थे और सचिन को ओपनिंग करनी पड़ी। इसके बाद जो हुआ वह आज तक इतिहास है। ऑकलैंड की तेज पिच पर सचिन ने सिर्फ 49 बॉल पर 82 रन बना डाले और मैदान के चारों ओर शॉट्स लगाए।

वर्ष 1996 मुंबई
यह 1996 के वर्ल्ड कप का एक बहुत ही तनावभरा मैच था जिसमें भारत ऑस्ट्रेलिया की ओर से दिए गए टारगेट का पीछा कर रहा था। सचिन ओपनिंग करने आए और फिर उन्होंने शॉट्स लगाने शुरू किए। भारत मैच हार गया लेकिन सचिन की 90 रनों की पारी को आज तक लोग याद करते हैं। सचिन 100 के स्ट्राइक रेट से भी ज्यादा रेट से रन बना रहे थे।

शारजाह वर्ष 1998
यह पारी तो आज तक किसी के दिमाग से जाती ही नहीं है। शारजाह में कोका कोला कप में ऑस्ट्रेलिया की ओर दिए गए 285 रनों का पीछा करने के लिए उतरी। तूफान ने इस मैच में करीब 25 मिनट तक बाधा डाली। लेकिन सचिन ने 143 रनों की पारी ने इस हारे हुए मैच को भी यादगार बना डाला।

शारजाह वर्ष 1998
सचिन ने 22 अप्रैल 1998 को तूफानी पारी खेली और इसके बाद 24 अप्रैल 1998 को उनके बर्थडे पर मैच का फाइनल था। सचिन एक बार फिर ओपनिंग करने उतरे और उन्होंने इस मैच में ऑस्ट्रेलिया से मिली पिछली हार का बदला लिया। सचिन ने 134 रनों की पारी खेली और कोका कोला कप भारत की झोली में डाला।

सेंचुरियन मैदान साउथ अफ्रीका 2003
कौन भूला सकता है 2003 के वर्ल्ड कप में पाकिस्तान को भारत की ओर से दिया गया वह करार जवाब। पाकिस्तान के 274 रनों का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की ओर से फिर सचिन ओपनिंग करने उतरे। यह मैच शोएब अख्तर वर्सेज सचिन तेंदुलकर बन गया था। सचिन ने 98 रनों की पारी खेली थी। कहते हैं इस मैच ने शोएब अख्तर का क्रिकेट करियर ही खत्म कर डाला था।

हैदराबाद वर्ष 2009
भारत पांच नवंबर 2009 को हुए इस मैच में ऑस्ट्रेलिया की ओर से दिए गए 351 रनों का पीछा करने उतरा था। सचिन फिर से ओपनिंग करने उतरे और उन्होंने सिर्फ 141 बॉल पर 175 रन बनाए। भारत को 17 गेंदो पर 17 रन बनाने थे लेकिन भारत के बल्लेबाज लड़खड़ा गए और भारत सिर्फ तीन रनों से यह मैच हार गया। लेकिन सचिन ने फिर से बेस्ट इनिंग्स खेली।

सिडनी वर्ष 2008
भारत सीबी सीरीज के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मुकाबला करने उतरा था और भारत को 240 रनों का लक्ष्य मिला था। सचिन ने फिर से एक मजबूत नींव रखने का काम किया। सचिन ने हर बॉल को काफी सावधानी के साथ खेला और 117 रनों की पारी खेली। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया में बनाई गई सचिन की यह पहली सेंचुरी थी।

ब्रिस्बेन 2008
यह सीबी सीरीज का दूसरा फाइनल था और भारत ने पहले बैटिंग करने का फैसला किया था। सचिन ने अपनी जिम्मेदारी को बखूबी समझा और 91 रनों की पारी खेली। सचिन की इस इनिंग्स की बदौलत भारत ने फिर से एक मैच अपने नाम किया था।

नागपुर 2011
वर्ल्ड कप का मैच और सचिन ने उस मैच में 111 रनों की पारी खेली। उन्होंने आते ही साउथ अफ्रीकन बॉलर्स के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। सचिन ने उस मैच में अपने वर्ल्ड कप करियर की आखिर सेंचुरी मारी थी और इसलिए उनकी यह इनिंग्स और भी खास हो जाती है।


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