
मु्श्किल है बांगड़ का बचना
माना जा रहा है कि रवि शास्त्री जो हेड कोच और अन्य कोचिंग स्टाफ को विश्व कप के बाद 45 और दिन का अतिरिक्त कॉन्ट्रेक्ट बढ़ाया जा सकता है। यहां टीम के समग्र प्रदर्शन का फायदा शास्त्री एंड कंपनी को मिलता दिखाई दे रहा है लेकिन यही बात बैटिंग कोच संजय बांगर के लिए नहीं की जा सकती। बांगर के बारे में बोर्ड का मानना है कि वे अपना काम और बेहतर तरीके से कर सकते थे। बता दें कि वैसे तो बांगर सहायक कोच के पद पर हैं लेकिन उनकी असली भूमिका बल्लेबाजी कोच की है। खासकर टॉप ऑर्डर के धराशाई होने के बाद भारतीय टीम अचानक अफगानिस्तान से भी बदतर दिखने लगती है। ये किसी भी तरह से सहन करने योग्य स्थिति नहीं है। सेमीफाइनल मुकाबले में भी मध्यक्रम फिर से जिम्मेदारी वहन करने में बुरी तरह से असफल रहा और यही कमजोरी भारत को विश्व कप में ले डूबी। लीग मैचों में रोहित शर्मा के 5 शतक और कोहली के इतने ही अर्धशतकों की बदौलत मध्यक्रम की यह कमी छुपी रही लेकिन तब भी सब जानते थे कि टीम में यदि कोई समस्या है तो यह नंबर चार स्लॉट और मध्यक्रम ही है।
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सचिन, सौरव और लक्ष्मण की राय नहीं मानी
IANS से बात करते हुए बीसीसीआई के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि मध्यक्रम में लगातार बदलाव करना टीम के लिए नुकसानदायक साबित हुआ। यह सिलसिला ना केवल विश्व कप में बल्कि पिछले कुछ समय से लगातार टीम को चोट पहुंचा रहा है। और संजय बांगर इस लंबी समस्या का कोई भी समाधान ढूंढने में बुरी तरह से विफल रहे हैं। ये साफ तौर पर उनकी कोचिंग के खराब तरीको को दर्शाता है। सच तो यह है कि बाद में बांगर ने शंकर को नंबर चार पर फिट बताना शुरू कर दिया था। शंकर ने विश्व कप में कुछ खास नहीं किया और बाद में वे चोटिल होकर बाहर हो गए। अधिकारी ने साफ बताया कि बांगर ने मीडिया में सबको कहा कि भारतीय टीम का प्रत्येक खिलाड़ी चयन के लिए उपलब्ध है लेकिन उससे अगले ही दिन विजय शंकर पुरानी चोट के कारण विश्व कप से ही बाहर हो जाते हैं। चीजें कहीं ना कहीं सही तरह से सामंजस्य में नहीं थी। इसके साथ ही अधिकारी ने यह भी सचिन तेंदुलकर, वीवीएस लक्ष्मण और सौरव गांगुली की क्रिकेट सलाहकार समिति की राय को मौजूदा प्रशासकों ने लगातार अनदेखा किया जो शर्मनाक है।

पूर्व बल्लेबाजों से सलाह लेने जाते थे खिलाड़ी
भारतीय बल्लेबाजों की हालत के बारे में बात करते हुए अधिकारी ने यह भी बताया कि टीम के कुछ सदस्य अपनी बल्लेबाजी के बारे में बात करने के लिए पूर्व भारतीय बल्लेबाजों के पास जाते रहे थे क्योंकि उनको रन बनाने में दिक्कत आ रही थी। इतना ही नहीं टीम के मैंनेजर सुनील सुब्रमण्यम की भूमिका सबसे ज्यादा खराब बताई जा रही है। बीसीसीआई अधिकारी ने बताया, 'जिसने भी मैनेजर के साथ बात करने की कोशिश की उसको घोर निराशा हाथ लगी। यह मैनेजर केवल अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को मैच 'पास' दिलाने में दिलचस्पी ले रहा था या फिर अपने सर पर हैट संभालने में।' बता दें कि इससे पहले भी सुनील की भूमिका संदिग्ध रही है और उनके साथ कुछ ना कुछ दिक्कतें जुड़ी रही हैं। वे किसी अंग्रेज की मानिंद हर समय अपने सर पर हैट पहनने के लिए जाने जाते हैं। इस दौरान उनके हाव-भाव भी किसी अंग्रेज अफसर की तरह रहते हैं।
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