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चोटों से ज्यादा जख्म लोगों के बर्ताव से मिले, अश्विन ने बताया मन में आने लगे थे संन्यास के ख्याल

नई दिल्लीः भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन का कहना है कि एक समय वह क्रिकेट से संन्यास लेने की सोच रहे थे क्योंकि उनको लगता था कि भारतीय टीम में उनको उस तरह का समर्थन नहीं मिल रहा है जिसके वे हकदार हैं। यह दो हजार अट्ठारह से 2020 का वह समय था जब अश्विन कई तरह की चोटों से जूझ रहे थे। रविचंद्रन अश्विन टेस्ट क्रिकेट में भारत के तीसरे सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं और वे जल्द ही कपिल देव के सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले टेस्ट रिकॉर्ड को भी तोड़ देंगे।

मेरी चोट को लेकर लोग सेंसिटिव नहीं निकले- अश्विन

मेरी चोट को लेकर लोग सेंसिटिव नहीं निकले- अश्विन

रविचंद्रन अश्विन ने अफसोस जताते हुए कहा है कि उनकी चोट को लेकर किसी तरह की संवेदना नहीं थी। अश्विन यह भी कहते हैं कि इन चोटों के चलते उनका स्टैमिना भी कमजोर हुआ। अश्विन ने यह सब बातें ईएसपीएनक्रिकइंफो से बात करते हुए कहीं। वे कहते हैं, "इन चोटों ने मुझे काफी दुखी किया। भारतीय क्रिकेट कम्युनिटी में चोटिल होने को खराब नजर से देखा जाता है। स्पष्ट रूप से इसका एक कारण था कि मैं क्यों चोटिल हो रहा था लेकिन हम उस वजह का पता लगाने में दिलचस्पी नहीं रख रहे थे। हम बस समस्या को समझते रहे लेकिन इसने मेरी मदद नहीं की क्योंकि इससे किसी तरह का सोल्यूशन नहीं मिला।"

...और ना ही मुझे सपोर्ट नहीं मिला'

...और ना ही मुझे सपोर्ट नहीं मिला'

अश्विनी यहां पर दुख जताते हैं कि टीम के बाकी खिलाड़ी भी चोटिल होते हैं लेकिन जब अश्विन चोटिल होते हैं तो उस चोट को कहीं अधिक बढ़ा चढ़ाकर देखा जाता है। रविचंद्रन का कहना है कि उनकी चोट को लेकर काफी से संवेदना व्यक्त की उनकी चोट को लेकर कोई संवेदनाएं नहीं दर्शाई गई जिसने उनको काफी दुखी किया। अश्विन कहते हैं कि उनको दूसरे बाकी चोटिल खिलाड़ियों की तरह से समर्थन नहीं मिल रहा था और वे इन सब कारणों के चलते क्रिकेट से संन्यास लेने की सोचने लगे थे।

वे कहते हैं, "मुझे लगता है कि लोग मेरी चोटों को लेकर संवेदनशील नहीं थे। मुझे लगता है कि काफी सारे लोगों को समर्थन दिया गया लेकिन मुझे नहीं दिया गया। मैंने कोई कम काम नहीं किया है, मैंने टीम के लिए बहुत सारे मैच जीते हैं और मैं महसूस कर रहा हूं कि मुझे पूरा सपोर्ट नहीं किया गया।"

6 बॉल फेंकते ही निकल जाता था दम-

6 बॉल फेंकते ही निकल जाता था दम-

अश्विन आगे कहते हैं कि वे आमतौर पर सहायता के लिए नहीं देखते लेकिन कई बार किसी कंधे की जरूरत पड़ती है और यह नहीं हो रहा था। अश्विन अपने चोटिल होने के समय को याद करते हुए बताते हैं कि उनको हर गेंद अलग तरीके से फेंकनी पड़ती थी। कुछ गेंद को वे उछल कर फेंक सकते थे लेकिन उससे घुटनों का दर्द प्रभावित होता था तो ऐसे में अगली गेंद को अपने पेट की मांसपेशियों और कमर के साथ-साथ कंधों के जोर पर फेंका जाता था लेकिन फिर दूसरी जगह दिक्कत होती थी ऐसे में तीसरी गेंद को अपने कूल्हों पर जोर लगा कर फेंका जाता था और हर गेंद पर कुछ न कुछ नया करना पड़ता था जिससे ओवर का अंत होते-होते ऐसा लगता था कि अब एक ब्रेक की सख्त जरूरत है।

अश्विन मानते हैं कि जब इंग्लैंड के खिलाफ भारत ने 2018 में सीरीज खेली उसके बाद उनके दिमाग में सन्यास का विचार चल रहा था। उसके बाद आस्ट्रेलिया में भी उन्होंने अपने पेट को चोटिल कर लिया और ऐसे कई मौके बाद में भी आते रहे। अश्विन कहते हैं कि इस दौरान केवल उनकी पत्नी ही ऐसी थी जिसके साथ में बातचीत करते थे लेकिन उनके पिता काफी मजबूत इरादों के थे और वे कहते थे कि अश्विन सफेद गेंद क्रिकेट में वापसी करेंगे।

Story first published: Tuesday, December 21, 2021, 15:07 [IST]
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