नई दिल्ली। पूर्व क्रिकेटर रोहन गावस्कर ने सुझाव दिया है कि जिस तरह से बीसीसीआई खिलाड़ियों के साथ वार्षिक करार करता है उसी तरह से राज्यों की क्रिकेट एसोसिएशन को भी अपने खिलाड़ियों के साथ करार करना चाहिए। बता दें कि बीसीसीआई भारतीय खिलाड़ियों के साथ ग्रेड के आधार पर 12 महीने का करार करता है। जिस तरह से खिलाड़ी प्रदर्शन करते हैं उसी लिहाज से उन्हें तीन अलग-अलग कैटेगरी में रखा जाता है और उनके साथ 12 महीने का करार किया जाता है।
रोहन गावस्कर ने कहा कि सभी स्टेट क्रिकेट बोर्ड को बीसीसीआई की तरह अपने खिलाड़ियों के साथ वार्षिक करार करना चाहिए। जैसे बीसीसीआई ग्रेड ए, बी और सी में खिलाड़ियों के साथ करता है। अगर स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन ऐसा नहीं करते हैं तो खिलाड़ियों को सैलरी दे पाना असंभव होगा। गावस्कर ने कहा कि राज्यों के खिलाड़ी भी अपने भुगतान का इंतजार कर रहे हैं क्योंकि उन्हें अभी तक पैसे नहीं मिले हैं, राज्यों ने बीसीसीआई के पास भुगतानके लिए अभी तक जरूरी कार्रवाई नहीं की है।
पूर्व क्रिकेटर्स ने कहा कि आखिर किसी खिलाड़ी ने जब पूरा सीजन खेला हो तो उसे पैसे का कैसे भुगतान होगा। क्या कुछ वरिष्ठ खिलाड़ियों को बीच में बाहर किया जा सकता है। उन युवा खिलाड़ियों का जो अपना डेब्यू कर रहे हैं, क्या उन्हें कुछ नहीं मिलेगा, व्हाइट बॉल स्पेशलिस्ट और रेड बॉल स्पेशलिस्ट खिलाड़ियों का क्या होगा। स्टेट एसोसिएशन को अपने खिलाड़ियों की देखभाल करनी चाहिए। घरेलू खिलाड़ियों के चलते ही खेल चलता रहत है, उनकी देखभाल अच्छे से होनी चाहिए, उनके साथ वार्षिक कॉन्ट्रैक्ट होना चाहिए।
बता दें कि कोरोना के चलते मुंबई में बीसीसीआई का मुख्यालय बंद है, जिसकी वजह से खिलाड़ियों की सैलरी वगैरह मिलने में देरी हो रहीहै। घरेलू क्रिकेटर इसके सबसे ज्यादा शिकार हैं, पिछले कई सीजन से अधिकतर खिलाड़ी अभी तक ग्रॉस रेवेन्यू शेयर हासिल नहीं कर सके हैं। गौर करने वाली बात है कि बीसीसीआई टीवी ब्रॉडकास्टर से आने वाली रकम को घरेलू क्रिकेटर्स के साथ साझा करता है, सामान्य तौर पर पैसे का भुगतान सितंबर माह में होता है।