नई दिल्ली। सचिन तेंदुलकर जैसे क्रिकेट के कोहिनूर को तराशने वाले दिग्गज क्रिकेट कोच रमाकांत आचरेकर 87 वर्ष की उम्र में देहांत हुआ। वे बढ़ती उम्र संबंधी बीमारियों से त्रस्त थे। आचरेकर तेंदुलकर के बचपन के कोच थे और उनको शिवाजी पार्क में क्रिकेट की पाठशाला की शिक्षा दिया करते थे। सचिन ने उनके अंतिम संस्कार में पहुंचकर उनके शव कंधा दिया।
आचरेकर की अंतिम यात्रा के समय सचिन की आंखे कई बार नम हुई थी। लेकिन इस भावभीनी आखिरी यात्रा को अभी 48 घंटे भी नहीं बीते कि इस पर सियासी घमासान शुरू हो गया है। दरअसल शिवसेना के सांसद संजय राउत ने एक ट्वीट के जरिए महाराष्ट्र सरकार पर गुस्सा जाहिर किया। संजय राउत ने लिखा कि- पद्मश्री और द्रोणाचार्य अवार्ड जीतने वाले रमाकांत आरचेकर का अंतिम संस्कार महाराष्ट्र सरकार ने राजकीय सम्मान के साथ क्यों नहीं किया गया? सरकार ने रमाकांत को लेकर जो असम्मान जाहिर किया है उसके लिए आरचेकर के शिष्य रह चुके सचिन को सभी सरकारी कार्यक्रमों का बहिष्कार करना चाहिए।
गौरतलब है कि 87 की उम्र में लंबी बीमारी के बाद आरचेकर का निधन हो गया था। जिसके बाद गुरुवार को महाराष्ट्र सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा था कि सरकारी स्तर पर संवेदनहीनता के चलते आरचेकर का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ नहीं किया जा सका। इसके अलावा शिवसेना ने अपने दल के मुखपत्र सामना में लिखा है कि रमाकांत आचरेकर को राजकीय सम्मान न दिया जाना दुखद और परेशान करने वाला है। बता दें कि रमाकांत आचरेकर एक ऐसा कोच थे जिन्होंने बलविंदर सिंह, चंद्रकांत पंडित, सचिन तेंदुलकर, प्रवीन आमरे और बलविंदर सिंह जैसे बड़े क्रिकेटरों को खेलना सिखाया।
साल 1990 में रामकांत आचरेकर को द्रोणाचार्य पुरस्करा से सम्मानित किया गया।2010 में उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। 2010 में ही उन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।