
फॉर्म खराब थी पर विश्वास नहीं खोया था-
पृथ्वी एक इंटरव्यू के दौरान अपने खराब द्वार का खुलासा किया है लेकिन उनका मानना है कि सब तरह के दबाव के बावजूद उन्होंने खुद पर से विश्वास नहीं खोया। पृथ्वी ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा, "रवि सर और विक्रम सर ने मुझे बताया कि मैं कहां पर गलत जा रहा था। मुझे समस्या का समाधान खोजना था। नेट्स में जाकर बल्लेबाजी करनी थी और गलतियों को ठीक करना था। जो मैं कर रहा था वह कुछ छोटी गलतियां थी। एडिलेड पिंक बॉल टेस्ट ने मुझे काफी खराब तरीके से दिखाया है। मेरी बैकलिफ्ट वैसी ही थी लेकिन मेरा बल्ला मेरे शरीर से थोड़ा बाहर की ओर आ रहा था। साथ ही कुछ शुरुआती मूवमेंट में भी दिक्कतें थी। मैं थोड़ी फिक्स पोजीशन में था। मुझे अपने बल्ले को अपने शरीर के पास रखने की जरूरत थी जो मैं नहीं कर रहा था।"
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'वो मेरी जिंदगी का उदास दिन था'
पृथ्वी शॉ आगे कहते हैं कि जब उनको पहले टेस्ट के बाद ड्रॉप कर दिया गया तो भी काफी तनाव में थे। उनको लग रहा था कि वह किसी काम के नहीं है हालांकि इस बात की खुशी थी कि टीम बेहतर प्रदर्शन कर रही थी। पृथ्वी ने कहा कि उस समय मेरे मन में इस हैरानी से बाहर निकलने की जरूरत थी। पृथ्वी शॉ आगे कहते हैं-
"एक कहावत है कि मेहनत प्रतिभा को छोड़ देती है और मैं अपने आपसे यही बात कहता था कि मेरी प्रतिभा अपनी जगह सही है लेकिन अगर कठिन मेहनत नहीं की जाएगी तो इसका कोई इस्तेमाल नहीं है। यह मेरी जिंदगी का सबसे उदास दिन था जब मुझे ड्रॉप कर दिया गया। मैं अपने कमरे में गया और टूट गया। मुझे लगा कि कुछ गलत हो रहा है जिसका जवाब मुझे देना जरूरी है।

सचिन के कुछ शब्दों ने किया कमाल-
लेकिन उसके बाद सचिन तेंदुलकर के कुछ शब्दों ने इस युवा बल्लेबाज के करियर के खराब दौर से निकलने में काफी सहायता की। उन्होंने कहा कि बुरे दौर में मुझे काफी फोन कॉल आते थे लेकिन मैं किसी से बात करने की स्थिति में नहीं था।
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"जब मैं वापस आया तो मैं सचिन सर से मिला और उन्होंने मुझे बताया कि मुझे बहुत ज्यादा बदलाव करने की जरूरत नहीं है बस केवल अपने शरीर के जितना हो सके उतना करीब खेलने की जरूरत है। मैं गेंद पर थोड़ी देर से बल्ला लगा रहा हूं। तो पूरे ऑस्ट्रेलिया के दौरे के दौरान मैंने अपने इसी विभाग पर काम किया।"
इसके अलावा पृथ्वी शॉ का कहना है कि वह जानते हैं भारतीय टीम में कैसे वापसी करनी है क्योंकि वह अपने खेल को बखूबी पहचानते भी हैं। वे आगे कहते हैं, "मैं आसानी से हार नहीं मानता मैं एक विरार का लड़का हूं मैं गलियों से आकर यहां पर अकेला हूं। मुझे पता है किस तरह से बाउंसबैक किया जाता है। मैंने हमेशा टीम को अपने से ऊपर रखता हूं, चाहे वह क्लब की टीम हो मुंबई की टीम हो या फिर भारत की टीम को। अगर आप चाहते हैं कि मैं 100 बॉल खेलकर 1 रन बनाऊं तो मैं ऐसा कोशिश कर सकता हूं लेकिन वास्तव में मैं इस तरह का नहीं हूं क्योंकि मेरा खेल ऐसा नहीं है और मैं ऐसा नहीं खेल सकता। मैं ऐसी सिचुएशन में पहले नहीं था जैसे मैं ऑस्ट्रेलिया में था लेकिन अब मैं कठिन मेहनत कर चुका हूं। मैंने कई घंटे नेट में बिताए हैं और अपने आप में सुधार किया है।"


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