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शाहिद अफ़रीदी की फास्टेस्ट सेंचुरी सचिन के बल्ले से निकली थी

4 अक्टूबर, 1996 को जब अफ़रीदी श्रीलंका के ख़िलाफ़ मैदान पर उतरे तो ये उनका दूसरा अंतरराष्ट्रीय मैच था और शायद उनकी बैटिंग किट कहीं गुम हो गई थी।

By Bbc Hindi

ये तीसरा मौका है जब शाहिद अफ़रीदी ने संन्यास की घोषणा की है. सबसे पहले साल 2010 में उन्होंने टेस्ट क्रिकेट छोड़ने की घोषणा की थी और 2015 में शाहिद ने वनडे क्रिकेट को भी गुड बाय कह दिया था.

लेकिन इस बीच वनडे क्रिकेट से शाहिद का 'आना-जाना' लगा रहा. कभी पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड से मतभेद तो कभी किसी और वजह से वे संन्यास लेते रहे और उनकी वापसी होती रही.

अब 36 वर्षीय शाहिद ने क्रिकेट के सबसे छोटे फॉर्मेट यानी टी-ट्वेंटी के साथ ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया है.

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4 अक्टूबर, 1996 को जब अफ़रीदी श्रीलंका के ख़िलाफ़ मैदान पर उतरे तो ये उनका दूसरा अंतरराष्ट्रीय मैच था और शायद उनकी बैटिंग किट कहीं गुम हो गई थी. उन्हें खेलने के लिए पाकिस्तानी स्पिनर सकलेन मुश्ताक के जूते और हेलमेट दिए गए. इस मैच में अफ़रीदी जिस बल्ले से खेले वो सचिन तेंदुलकर का था. उस वक्त कोई नहीं जानता था कि अफ़रीदी इतिहास लिखने जा रहे हैं. उस वक्त अफ़रीदी महज 16 साल के थे. 11 छक्के, 6 चौके की मदद से 37 गेंदों में क्रिकेट के इतिहास का सबसे तेज शतक बनाकर वे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट पर छा गए. अफरीदी का ये रिकॉर्ड 17 साल तक नहीं टूटा. 2014 में न्यूज़ीलैंड के कोरी एंडरसन ने 36 गेंदों में शतक बनाया और इसके एक साल बाद दक्षिण अफ्रीका के एबी डीविलियर्स ने 31 गेंदों में सेंचुरी जड़ी. लेकिन कम ही लोगों को पता होगा कि जिस बल्ले से अफ़रीदी ने तूफ़ान मचाया था वो बल्ला दरअसल मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर का था. सचिन ने एक मर्तबा वकार यूनुस को अपना बैट देकर सियालकोट से ऐसा ही बल्ला बनवाने की गुजारिश की थी और नैरोबी के मैच में वकार ने अफ़रीदी को यही बल्ला खेलने के लिए दिया था.

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पाकिस्तान में शाहिद अफ़रीदी की लोकप्रियता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जाता है कि 'मैं हूं शाहिद अफ़रीदी' नाम से 2013 में एक फ़िल्म भी बनी जिसमें खुद उन्होंने काम भी किया था.
वे एक ऐसे ऑलराउंडर खिलाड़ी के तौर पर याद किए जाएंगे जो आतिशी बल्लेबाजी के साथ-साथ लेग-स्पिन में भी माहिर था. उनकी बॉलिंग की विविधता के बारे में कहा जाता है कि वे लेग ब्रेक, गुगली, ऑफ स्पिन के साथ-साथ तेज गेंदें भी फेंकने का माद्दा रखते थे. 27 टेस्ट मैचों की 48 पारियों में शाहिद ने 86.97 की स्ट्राइक रेट से 36.51 रनों की औसत के साथ 1716 रन बनाए. हालांकि शाहिद का वनडे करियर लंबा रहा. 398 वनडे मैचों में 117 की स्ट्राइक रेट से 23.57 के औसत के साथ उन्होंने 8064 रन बनाए. टी-ट्वेंटी फॉरमेट में शाहिद सबसे ज्यादा गेंदें (2144) फेंकने वाले खिलाड़ी हैं. एकदिवसीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा छक्के (351) मारने का रिकॉर्ड भी उनके नाम है.क्रिकेट के इतिहास का सबसे लंबा (158 मीटर) छक्का मारने का रिकॉर्ड भी शाहिद अफ़रीदी के नाम दर्ज है.अफ़रीदी ने चार बार 21 से कम गेंदों पर हाफ़ सेंचुरी बनाई है. अफ़रीदी जिस तरह की बल्लेबाज़ी करते थे, उसे देखते हुए कहा जाता है कि टी-ट्वेंटी फॉरमेट उन्हीं के लिए बना था. आप अंदाजा लगा सकते हैं, टी-ट्वेंटी में शाहिद 150.75 के स्ट्राइक रेट से खेले.

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Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:19 [IST]
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