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पहले खाई नींद की गोली फिर हुए 'जीरो' पर आउट, धवन ने किए मजेदार खुलासे

नई दिल्ली। बेखाैफ अंदाज में बुरे समय भी चेहरे हंसी, कुछ ऐसा ही अंदाज है भारतीय क्रिकेट टीम के ओपनर शिखर धवन का। उनका नाम यूं ही 'गब्बर' नहीं पड़ा, बल्कि वो अपने लाइफस्टाइल के कारण ही गब्बर जैसे दिखते हैं। ना किसी पर कोई टिप्पणी करना, ना ही विवादों में पड़ना इनकी खासियत है। हालांकि इस शख्स ने किस दाैरे से गुजरते हुए टीम में जगह बनाई है, इससे शायद ही कोई वाकिफ होगा। किसी क्रिकेटर के लिए पहला मैच आखिरी मैच जैसा होता है। अगर वो चला नहीं तो निराश हो जाता है, लेकिन धवन अलग ही थे। उन्होंने फेल होने पर भी हंसते हुए मैदान छोड़ा था। धवन ने इंडिया टीवी के रजत शर्मा के शो 'आप की अदालत' में अपनी जिंदगी से जुड़े कई मजेदार किस्सों को शेयर किया।

खाई नींद की गोली फिर हुए जीरो पर आउट

खाई नींद की गोली फिर हुए जीरो पर आउट

धवन ने खुलासा किया कि वो कैसे अपने पहले अंतरराष्ट्रीय मैच से पहले चिंता में थे, जिस कारण उन्होंने रात को नींद लेने के लिए गोली खाई थी। धवन ने कहा, ‘डेब्यू से पहले मुझे रात को नींद नहीं आई थी। मैं परेशान था कि क्या मेरे अंदर अगले दिन खेलने लायक ताकत बचेगी। अगले दिन बारिश हुई और मैच को रद्द कर दिया गया। लेकिन मैं तब बहुत नर्वस था। और फिर, मैंने अगले मैच से पहले नींद की गोली ले ली। जब मैं अपने वनडे डेब्यू में शून्य पर आउट हुआ, तो मैं हंसता हुआ मैदान से बाहर आया। यह निराशाजनक था क्योंकि मैंने सोचा था कि मैं शतक जड़ूंगा।'

33 वर्षीय धवन 133 वनडे मैच खेल चुके हैं जिसमें 17 शतक के साथ 5,518 रन हैं। वहीं 34 टेस्ट मैचों में उन्होंने 2,315 रन बनाए हैं और उनके नाम 7 शतक दर्ज हैं। इस बीच 55 अंतरराष्ट्रीय टी20 मैचों में धवन ने 9 अर्धशतकों के साथ कुल 1413 रन बनाए हैं। धवन ने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच साल 2010 में विशाखापत्तनम में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एकदिवसीय मैच के रूप में खेला था जिसमें वह फेल होने पर फिर टीम से बाहर हो गए थे।

फिर ऐसे की वापसी

फिर ऐसे की वापसी

धवन ने कहा, ‘2010 में एक या दो मैच खेलने के बाद मैं बाहर हो गया था, लेकिन मैंने अपने जीवन में कभी संघर्ष का अनुभव नहीं किया। उन दिनों मैंने अपनी क्रिकेट को इंजॉय किया और दोस्तों के साथ मस्ती की। मैंने अपनी क्रिकेट, फिटनेस पर ध्यान केंद्रित किया और मुझे पूरी उम्मीद थी कि मेरा समय आएगा।' पश्चिमी दिल्ली के रहने वाले धवन ने अपने बचपन के दिनों के बारे में भी खुलकर बात की और बताया कि उन्हें कैसे लगा कि वह क्रिकेटर बन सकते हैं।

मां कर देती थी कमरे में बंद

मां कर देती थी कमरे में बंद

इसके अलावा धवन ने अपने बचपन की शरारतों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कैसे मां उन्हें कमरे में बंद करके बाजार जाती थीं लेकिन वो कमरे से बाहर निकल जाते थे। धवन ने कहा, ''घरवाले चाहते थे कि मैं पढ़ाई करूं लेकिन मेरा मन खेलों में था। मैं परिवार में सबसे छोटा था, ऐसे में मां मुझे कमरे में बंद करके बाजार जाती थीं। बाहर मेरे दोस्त क्रिकेट खेलने के लिए एकत्र हो जाते थे। मैं किसी तरह खेलने के लिए बाहर निकल जाता था। लेकिन जब मां वापस आती तो मुझे घर के बाहर देख पीटना शुरू कर देती थीं।"

Story first published: Saturday, September 28, 2019, 16:57 [IST]
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