कुंबले-हरभजन और अश्विन-जडेजा में कौन सी स्पिन जोड़ी है बेस्ट? दिलचस्प है ये मुकाबला
नई दिल्ली: विशाखापट्टनम टेस्ट में यादगार प्रदर्शन करने के बाद भारतीय क्रिकेट टीम को अगला टेस्ट पुणे में खेलना है। 10 अक्बूटर से होने जा रहे इस मुकाबले को जीतकर टीम इंडिया के पास सीरीज कब्जाने का मौका है। विशाखापट्टनम टेस्ट मैच के दौरान कई वर्ल्ड रिकॉर्ड बने थे जिनमें रोहित शर्मा की शतकीय पारियां और उनके गगनचुंबी छक्कों ने महफिल में चार चांद लगाए। रोहित की आतिशी के बीच जो दो क्रिकेटर गेंदबाजी में अलग-अलग मौकों पर चमके वे थे अश्विन और जडेजा। अश्विन ने पहली पारी में जहां 7 विकेट लिए तो जडेजा ने दूसरी पारी में चार। अश्विन ने जहां सबसे तेजी से 350 टेस्ट विकेट लेने के रिकॉर्ड की बराबरी की तो जडेजा सबसे तेज 200 टेस्ट विकेट लेने वाले लेफ्टी स्पिनर बने।

अश्विन-जडेजा के बेमिसाल आंकड़े-
अश्विन-जडेजा की जोड़ी ने भारतीय घरेलू पिच पर जिस तरह का प्रदर्शन किया है उससे उनकी तुलना अब सीधे तौर पर अनिल कुंबले और हरभजन सिंह की महान स्पिन जोड़ी से होने लगी है। भारतीय क्रिकेट टीम अगर लगातार 11वीं घरेलू सीरीज जीतने के मुहाने पर खड़ी है तो उसका सबसे बड़ा कारण अश्विन-जडेजा की जोड़ी ही है। इस जोड़ी ने एक साथ 33 टेस्ट मैच खेले हैं और भारत को उसमें 25 में से जीत हासिल हुई है। इन मैचों में इस जोड़ी ने 329 विकेट हासिल किए हैं जिसमें उनका औसत 21.29 और स्ट्राइक रेट 51.91 का रहा है।
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क्या कुंबले-हरभजन सिंह कमतर हैं ?
आपको यह जानकार ताज्जुब होगा कि इन आंकड़ों के सामने भज्जी-कुंबले की दिग्गज जोड़ी कहीं भी नहीं टिक पाती है। कुंबले और हरभजन ने एक साथ जहां 54 टेस्ट मैच खेले हैं तो वहीं भारत को उनमें से केवल 21 घरेलू टेस्ट मैच जीतने में कामयाबी मिली है। इस जोड़ी ने आपस में 356 विकेट लिए हैं जिसमें उनका औसत 27.23 का रहा है जबकि स्ट्राइक रेट 62.63 का रहा है। इस मोर्चे भी यह जोड़ी पूरी तरह से अश्विन-जडेजा के सामने मात खा जाती है। तो क्या इससे ये साबित हो जाता है भज्जी-कुंबले आज की जोड़ी के सामने बेकार थे? दरअसल मामला इतना आसान नहीं है।

आंकड़े क्यों नहीं साफ करते पूरी तस्वीर-
हरभजन और कुंबले ने जहां भारत के बाहर 20 टेस्ट मैच जोड़ी के तौर पर खेले तो अश्विन-जडेजा ने केवल चार ही मैच खेले हैं। दूसरी बात यह है कि पिचों के बर्ताव समय-समय पर बदलते रहते हैं। हरभजन सिंह ने भी इस बारे में ट्वीट करते हुए बताया था कि भारतीय पिचें अब पहले की तुलना में स्पिनर्स की ज्यादा मदद करने लगी हैं। इसके अलावा एक तथ्य यह भी है कि उस समय टी20 तकनीक इतनी ज्यादा नहीं चलती थी जितनी की आज के समय में और तब बल्लेबाज टेस्ट मैचों के हिसाब से बेजोड़ तकनीक वाले होते थे। आज के बल्लेबाजों में यह कमी साफ देखी जा सकती है।
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पेस अटैक ने भी बदली स्पिन की तस्वीर-
एक बड़ा बदलाव भारतीय तेज गेंदबाजी में आया है। टीम इंडिया के पास इस समय उसके क्रिकेट इतिहास का बेस्ट पेस अटैक है जो स्पिनर्स को काफी सहयोग करता है। यहां तक सूखी और दरारों वाली पिचों पर भी अब भारतीय तेज गेंदबाज हावी रहते हैं। जबकि हरभजन-कुंबले के समय अन्य गेंदबाजों का घरेलू टेस्ट विकेट औसत 41.40 का रहता था। इसलिए जिताने की पूरी जिम्मेदारी केवल स्पिन जोड़ी की रहती थी। इसी वजह से तब भारत का जीत प्रतिशत आज की तुलना में कम रहता था। ऐसे में अगर आप अपने साथी गेंदबाजों के आंकड़ों के हिसाब से इस स्पिन जोड़ी के आंकड़े निकालते हैं तो तस्वीर का रूख पलट जाता है।

कौन सी है बेस्ट जोड़ी-
अश्विन-जडेजा के सपोर्ट गेंदबाजों (तेज गेंदबाज और ऑलराउंडर्स) का स्ट्राइक रेट 62.6 रहा है जो भारतीय गेंदबाजी में आए बड़े सुधार की ओर इशारा करता है। जबकि हरभजन और कुंबले के समय ऐसा नहीं था तब उनके साथी गेंदबाजों की तुलना में कुंबले-हरभजन का औसत जहां डेढ़ गुना तक कम था तो वहीं स्ट्राइक रेट भी काफी बेहतर था। ऐसे में कई फैक्टर हैं जो दोनों जोड़ियों की तुलना में काम आते हैं और इससे यह भी निष्कर्ष निकलता है कि दोनों में बेस्ट घोषित करना इतना आसान नहीं है। लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि जीत के 75.75 प्रतिशत मार्जिन के साथ अश्विन-जडेजा को नजरअंदाज करना बहुत ही मुश्किल है।
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