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पाकिस्तानी क्रिकेट में सिख क्रिकेटर महिंदर सिंह की धमाकेदार एंट्री

पाकिस्तान की नेशनल क्रिकेट टीम में ईसाई और हिंदू खिलाड़ी हिस्सा रहे हैं लेकिन ये पहली बार जब एक सिख क्रिकेटर ने अपनी चमक बिखेरी है।

By Rizwan

इस्लामाबाद। पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय के बहुत कम लोग ऊंचे ओहदों तक पहुंचे हैं। ऐसे में पाक में जब कोई अल्पसंख्यक समुदाय का शख्स उभर कर सामने आता है तो वो सभी का ध्यान खींचता है। आजकल महिंदर सिंह सबका ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं।

पाकिस्तान में इन दिनों क्रिकेटर महिंदर सिंह की चर्चा है। इस सिख क्रिकेटर ने पाकिस्तान के बड़े-बड़े क्रिकेट धुरंधरों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। स्पिनर दानिश कनेरिया के बाद पहली बार पाक में कोई अल्पसंख्यक क्रिकेटर उभरा है।

पाकिस्तान में इससे पहले ईसाई और हिंदू खिलाड़ी नेशनल टीम का हिस्सा बने हैं। दानिश कनेरिया कई सालों तक पाक के लिए खेले हैं। ये पहली बार है कि कोई पाकिस्तानी सिख क्रिकेटर नेशनल क्रिकेट अकेडमी तक पहुंचने में कामयाब रहा है।

दांये हाथ के तेज गेंदबाज महिंदर पाल सिंह मरदान से नेशनल क्रिकेट अकादमी की ओर से मुल्क के 30 उभरते क्रिकेटरों में चुने गए हैं। लाहौर के ननकाना साहिब में रहने वाले महिंदर ने मुल्तान में 28 नवंबर से 11 दिसंबर तक प्रशिक्षण पूरा किया है।

महिंदर पाल सिंह की पाकिस्तान के बड़े क्रिकेटर रहे मुदस्सर नजर और मुश्ताक अहमद जैसे खिलाडियों ने भी सराहना की है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के अध्यक्ष शहरयार खान ने भी मुल्तान क्रिकेट अकेडमी में उनसे मुलाकात की। शहरयार ने कहा कि सिख लड़के के क्रिकेट मे उभार से बेहद खुश हैं।

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20 साल के महिंदर सिंह वकार यूनूस को अपना आदर्श मानते हैं। तेज गेंदबाजी में दुनिया में चमकने की ख्वाहिश रखने वावे महिंदर का सफर आसान नहीं रहा। महिंदर क्रिकेट के साथ-साथ पंजाब यूनिवर्सिटी में फार्मेसी की पढ़ाई कर रहे हैं।

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महिंदर पाल सिंह की पैदाईश मरदान में हुई उनका चयन भी मरदान से ही हुआ है। जब महिंदर पांच साल के थे तो उनका परिवार ननकाना साहिब में रहने चला गया था। इसकी वजह थी कि वहां अल्पसंख्यक होने की वजह से उनके परिवार को सुरक्षित नहीं लगता था। महिंदर अल्पसंख्यक होते हुए भी हिम्मत दिखाते हुए क्रिकेट जगत में झंडे गाड रहे हैं।

महिंदर पाल सिंह ने अपने बारे में एक चैनल को बताया कि एक बार तो निराशा होकर वो एक साल के लिए क्रिकेट से अलग हो गए थे क्योंकि सिख समुदाय में क्रिकेट के जगत में कोई ऐसा नाम नहीं था जिससे वो कुछ सीख पाते। महिंदर का बस अब एक ही ख्वाब है कि वो पाक क्रिकेट के लिए कुछ कर गुजरें।

Story first published: Monday, November 13, 2017, 11:15 [IST]
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