नई दिल्ली। आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। 130 पेज के अपने फैसले में बीसीसीआई के पूर्व चीफ एन श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मयप्पन को सट्टेबाजी का आरोपी माना है। कोर्ट ने एन श्रीनिवासन पर अगले बीसीसीआई चीफ का चुनाव लड़ने पर भी रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि मयप्पन और कुंद्रा सट्टेबाजी में शामिल थे।
सुप्रीम कोर्ट ने सख्त लहजे में बीसीसीआई को फटकार लगायी है। कोर्ट ने कहा कि आरोपियों की सजा का फैसला एक निष्पक्ष कमेटी करेगी जो बीसीसीआई द्वारा नहीं बनायी जाएगी। कोर्ट ने आरोपियों की सजा का फैसला करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के तीन रिटायर्ड जज की कमेटी को नियुक्त किया है। कोर्ट ने जस्टिस लोढ़ा, जस्टिस रवींद्र को इस कमेटी का सदस्य बनाया है।
सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई के उस अनुच्छेद को भी रद्द कर दिया है जिसमें हितों के टकराव को गलत नहीं माना गया है। बीसीसीआई के अनुच्छेद 6.2.4 को कोर्ट ने रद्द करते हुए कहा है कि बीसीसीआई खुद किसी भी मामले में जज नहीं बन सकती है। बीसीसीआई ने इस अनुच्छेद में संशोधन करते हुए एक साथ दो पदों पर बने रहने की अनुमति दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि राज कुंद्रा के पक्ष को भी सुना गया है और वह यह नहीं कह सकते हैं कि उनका पक्ष सुना नहीं गया है। कोर्ट ने कहा कि बीसीसीआई के कार्यक्रम पब्लिक इंटेरेस्ट में है ऐसे में इसकी गतिविधिया अनुच्छेद 226 के तहत आनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि बीसीसीआई के गतिविधियों को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।
वहीं के पूर्व बीसीसीआई चीफ श्रीनिवासन को सुप्रीम कोर्ट ने राहत दी है। कोर्ट ने कहा कि श्रीनिवासन के खिलाफ इस मामले में लोगों को बचाने के आरोप सिद्ध नहीं होते हैं। वहीं कोर्ट ने यह माना है कि चेन्नई सुपर किंग्स टीम का हिस्सा बने रहने के साथ बीसीसीआई का प्रमुख बने रहना हितों का टकराव है। ऐसे में उन्हें इन दोनों में किसी एक को चुनना चाहिए।