टीचर्स डे: कोच की एक फटकार ने बदल दी सचिन तेंदुलकर की जिंदगी, देखें Pics

By Naveen Rai
Teachers Day: Story of Sachin Tendulkar and his Cocah Ramakant achrekar

नई दिल्ली। कहते हैं कि जो पत्थर हथौड़े के मार से रो दे वह कभी मूर्ति नहीं बना सकता। प्रतिभा की खान भले ही किसी में भरी हो लेकिन जब तक उसे तराशने वाला सही गुरू नहीं मिलता तब अपेक्षित सफलता नहीं मिलती। भारत के महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर और उनके कोच रमाकांत आचरेकर का किस्सा भी कुछ ऐसा ही है। सचिन को कोचिंग देने वाले रामाकांत आचरेकर ने सचिन की प्रतिभा को तराशा जिसे पूरे विश्व ने देखा। शिक्षक दिवस पर हम आपको सुना रहे हैं उनके बारे में दिलचस्प वाकया...

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बड़े भाई ने कोच से मिलवाया:

बड़े भाई ने कोच से मिलवाया:

कम ही लोग जानते हैं कि सचिन बचपन में बेहद शरारती थे। सचिन बचपन में खूब शरारत करते थे।बड़े भाई अजीत तेंदुलकर उन्‍हें कोचिंग के लिए रमाकांत अचरेकर के पास लेकर गए। जिसके बाद उनकी शरारतें कम हुई और सचिन ने आगे जो किया वो इतिहास है।

कोच की वो डांट:

कोच की वो डांट:

साल 2017 में सचिन ने एक वाकया लोगों के साथ ट्विटर पर साझा किया था। यह वाकया सचिन के स्कूल के दिनों का है, बकौल सचिन-मैं अपने स्कूल (शारदाश्रम विद्यामंदिर स्कूल) की जूनियर टीम से खेल रहा था और हमारी सीनियर टीम वानखेडे स्टेडियम (मुंबई) में हैरिस शील्ड का फाइनल खेल रही थी। उसी दिन अचरेकर सर ने मेरे लिए एक प्रैक्टिस मैच का आयोजन किया था। उन्होंने मुझसे स्कूल के बाद वहां जाने के लिए कहा था। उन्होंने (अचरेकर सर ने) कहा, 'मैंने उस टीम के कप्तान से बात की है, तुम्हें चौथे नंबर पर बैटिंग करनी है।' सचिन ने बताया कि मैं उस प्रैक्टिस मैच को खेलने नहीं गया और वानखेडे स्टेडियम सीनियर टीम का मैच खेलने जा पहुंचा। मैं वहां अपने स्कूल की सीनियर टीम को चीयर कर रहा था। खेल के बाद मैंने आचरेकर सर को देखा, मैंने उन्हें नमस्ते किया। अचानक सर ने मुझसे पूछा, 'आज तुमने कितने रन बनाए? ' सचिन के अनुसार- मैंने जवाब में कहा-सर, मैं सीनियर टीम को चीयर करने के लिए यहां आया हूं। यह सुनते ही, अचरेकर सर ने सबके सामने मुझे डांट लगाई। उनके एक-एक शब्‍द अभी भी मुझे याद हैं।

कोच की वो सीख

कोच की वो सीख

उन्होंने (आचरेकर सर ने ) कहा था , 'दूसरों के लिए ताली बजाने की जरूरत नहीं है। तुम अपने क्रिकेट पर ध्यान दो। ऐसा कुछ हासिल करो कि दूसरे लोग, तुम्‍हारे खेल को देखकर ताली बजाएं।' मेरे लिए यह बहुत बड़ा सबक था, इसके बाद मैंने कभी भी मैच नहीं छोड़ा। सचिन के अनुसार, सर की उस डांट ने मेरी जिंदगी बदल दी। इसके बाद मैंने कभी भी क्रिकेट प्रैक्टिस को लेकर लापरवाही नहीं की। परिणाम सबके सामने हैं। आचरेकर सर की इस डांट में जिंदगी का सार छुपा हुआ था। दूसरे शब्‍दों में कहें तो कोच रमाकांत अचरेकर की इस डांट ने ही सचिन तेंदुलकर को मास्‍टर ब्‍लास्‍टर बनाने में अहम योगदान दिया।

अच्छा खेलने पर खिलाते थे भेल पूरी:

अच्छा खेलने पर खिलाते थे भेल पूरी:

तेंदुलकर बताते हैं कि सर कभी कभी सख्त थे, बेहद सख्त और साथ ही ख्याल भी रखते थे और प्यार करते थे। सर ने मुझे कभी नहीं कहा कि अच्छा खेले लेकिन मुझे पता है कि जब सर मुझे भेल पूरी या पानी पूरी खिलाने ले जाते थे तो वह खुश होते थे, मैंने मैदान पर कुछ अच्छा किया था।''

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    Story first published: Wednesday, September 5, 2018, 11:53 [IST]
    Other articles published on Sep 5, 2018
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