दोहरा सकते थे 2011 की कहानी, अगर ऐन वक्त पर किया होता ये 'चेंज'

india

स्पोर्ट्स डेस्क(नोएडा) विश्व कप 2019 के सेमीफाइनल मुकाबले में न्यूजीलैंड से भारत जिस तरीके से हारा है उसपर सवाल उठाना भी लाजमी है। सवाल खड़े होते हैं टीम प्लानिंग पर, सवाल खड़े होते हैं टीम मैनेजमेंट के फैसलों पर, सवाल खड़े होते हैं कोच रवि शास्त्री पर जो मध्यक्रम को मजबूत करने के लिए अंतिम फैसला तक नहीं ले सके। कभी कोई खिलाड़ी अचानक ही प्लेइंग इलेवन में एंट्री मार देता है तो कोई अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद भी टीम में जगह नहीं बना पाया। हार कतई बर्दाश्त नहीं, हालांकि यह एक खेल का हिस्सा है पर इससे सबक लेना लाजमी है। भारत दो बार आईसीसी विश्व कप जीत चुका है। साल 1983 में कपिल देव ने भारत को ट्राॅफी दिलाई तो 2011 में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में इसे हासिल करने का गाैरव हासिल हुआ। माैका अब फिर बना था इसे दोहराने को, क्योंकि टीम में वर्ल्ड क्लास बैट्समैन थे पर यहां गलती हो गई 2011 विश्व कप वाला खेल नहीं दोहराने में। अगर 2011 विश्व कप कप वाली प्लानिंग इस बार भी बनाई जाती तो फाइनल का टिकट पक्का हो सकता था।

2011 में नाजुक हालात ऐसे बदले थे मजबूत मोड़ की ओर

2011 में नाजुक हालात ऐसे बदले थे मजबूत मोड़ की ओर

याद कीजिए 2011 का वो दिन जब 2 अप्रैल के दिन भारत ने श्रीलंका को फाइनल में मात देकर खिताब पर कब्जा किया था। हालांकि यह मैच भारत आसानी से नहीं जीता था। वानखेड़े के मैदान पर श्रीलंकाई गेंदबाजों ने भारत को जीत हासिल करने के लिए नाक में दम कर रखा था। श्रीलंका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत के सामने 6 विकेट खोकर 275 रनों का लक्ष्य रखा था। बड़े मुकाबले के हिसाब से भारतीय बल्लेबाजों पर दवाब था। दबाव बना भी जब सचिन तेंदुलकर(18) वीरेंद्र सहवाग(0) और विराट कोहली(35) के रूप में महज 21.4 ओवर में 114 रनों पर 3 विकेट गिर गए। मुथैया मुरलीधरन और लसिथ मलिंगा जैसै गेंदबाज हावी होते जा रहे थे। ऐसे में तब टीम की पारी को संभालने के लिए धोनी खुद पांचवें नंबर पर उतरे थे। धोनी ने जैसे ही मैदान पर क्रीज जमाए तो फिर उनकी गाैतम गंभीर(97) के साथ मिलकर क्लास बैटिंग के कारण श्रीलंकाई गेंदबाज विकेट निकालने में असमर्थ दिखने लगे। धोनी ने पिच व गेंदबाजों को समझा फिर अंत में तेजी से रन बटोरते हुए टीम को जीत दिला थी। अगर न्यूजीलैंड के खिलाफ हुए इस बार सेमीफाइनल मैच में धोनी पर टीम मैनेजमेंट ने भरोसा जताया होता और उन्हें ऊपर भेजा होता तो हो सकता था मैच का नतीजा कुछ और निकलता।

भारत की हार पर गांगुली ने बताई चयनकर्ताओं की सबसे बड़ी गलती

तब युवराज से पहले आए थे धोनी

तब युवराज से पहले आए थे धोनी

नाजुक हालात बनते देख धोनी ने तब खुद युवराज सिंह से पहले मैदान पर उतरने का फैसला लिया था। ऐसा नहीं था कि युवराज फाॅर्म में नहीं थे। वह सबसे सफल खिलाड़ी रहे थे लेकिन परिस्थितियों को समझते हुए युवराज को पांचवें नंबर पर नहीं भेजा गया था बल्कि धोनी खुद उतरे ताकि युवी दवाब में आकर अपना विकेट ना गंवा दें। लेकिन इस बार सेमीफाइनल जैसे बड़े मैच में कोच रवि शास्त्री की बल्लेबाजी क्रम को लेकर कोई प्लानिंग नहीं दिखी। भारत जब लक्ष्य के लिए उतरा तो 3 विकेट महज 5 रनों पर ही गिर गए। यह विकेट रहे विराट कोहली, रोहित शर्मा और केएल राहुल के। ऐसे में चाैथे नंबर पर रिषभ पंत आए गए सही था लेकिन पांचवें नंबर पर फिर 2011 की तरह धोनी को भेजा जाना चाहिए था ना कि दिनेश कार्तिक को। पंत टिक चुके थे। वह 32 रन बनाकर आउट हुए। वह जल्दबाजी में अपना विकेट गंवा बैठे क्योंकि उन्हें क्रीज पर समझाने वाला सीनियर खिलाड़ी नहीं था। अगर धोनी होते तो वह पंत को समझाते जैसा कि वो 2011 में युवराज सिंह के साथ मिलकर सूझबूझ के साथ खेले थे।

मिडिल ऑर्डर में धोनी ही नजर आ रहे थे मजबूत

मिडिल ऑर्डर में धोनी ही नजर आ रहे थे मजबूत

इस विश्व कप में अगर देखा जाए तो भारत का मिडिल ऑर्डर बेकार था। क्योंकि नाजुक हालातों पंत, पांड्या जैसे बल्लेबाजों को ऊपर भेजकर आप मैच बनाने का रिस्क नहीं ले सकते। ऐसे हालात में जरूरत होती है विकेट पर टिकने की, विकेट पढ़ने की और फिर मैच आगे खींचने की, लेकिन पांड्या जैसै हाटिंग खिलाड़ी को भी धोनी से पहले भेजा गया जो समझ से परे था। धोनी मिडिल ऑर्डर में माैजूदा समय सबसे मजबूत खिलाड़ी नजर आ रहे थे लेकिन फिर भी उन्हें सातवें स्थान पर भेजा गया।धोनी ने 2011 के फाइनल में 79 गेंद पर 91 रन की बेहतरीन पारी खेली थी। कई लोगों के लिए धोनी का युवराज से पहले आना चौंकाने वाला था क्योंकि युवराज चौथे नंबर बढ़िया बैटिंग कर रहे थे। धोनी ने पिछले साल नवंबर में बताया था कि उन्होंने युवराज से पहले बल्लेबाजी का फैसला क्यों किया था। धोनी ने कहा था, ''चेन्नई सुपरकिंग्स के लिए श्रीलंका के ज्यादातर गेंदबाजों ने खेला था और मैं सभी को अच्छी तरह से समझता था। मैं खुद इसलिए पहले गया क्योंकि तब मुरलीधरन गेंदबाजी कर रहे थे। मैंने उन्हें नेट प्रैक्टिस में उन्हें बहुत खेला था और मुझे भरोसा था कि उनकी गेंद को आराम से खेलूंगा। यह सबसे बड़ा कारण था बैटिंग के लिए पहले जाने का।''

आखिर किस बात को लेकर कोहली हो गए शास्त्री पर गुस्सा, सच आया सामने

नहीं निकला हल तो 2023 में भी आएंगी मुश्किलें

नहीं निकला हल तो 2023 में भी आएंगी मुश्किलें

अब अगला विश्व कप 2023 में होगा। बड़ी बात यह है कि यह भारत में ही होगा ऐसे में भारत के पास अपने घर में खिताब जीतने का माैका रहेगा लेकिन मिडिल ऑर्डर का हल अभी भी नहीं निकला तो फिर वहां भी मुश्किलें ही नजर आने वाली हैं। धोनी अगला विश्व कप नहीं खेल पाएंगे, यानि की मिडिल ऑर्डर और टूटने वाला है। पिछले 4 सालों से भारत के टाॅप 3 बल्लेबाजों के चलने पर ही टीम ज्यादातार मैच जीत रही है। ऐसे में विराट कोहली को अब मिडिल ऑर्डर सेट करने के लिए सही खिलाड़ियों को चुनना चाहिए और लगातार माैके देने चाहिए ताकि वो उस परिस्थिति में खुद को डाल सकें। अन्यथा 2023 विश्व कप में भी फिर से यही कहानी दोहराई जाएगी जो अब देखने को मिली है।

फिर भड़के युवराज के पिता योगराज, धोनी को बताया क्रिकेट की गंदगी

For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS
For Daily Alerts

क्रिकेट से प्यार है? साबित करें! खेलें माईखेल फेंटेसी क्रिकेट

Story first published: Thursday, July 11, 2019, 11:59 [IST]
Other articles published on Jul 11, 2019

Latest Videos

    + More
    POLLS

    MyKhel से प्राप्त करें ब्रेकिंग न्यूज अलर्ट

    Notification Settings X
    Time Settings
    Done
    Clear Notification X
    Do you want to clear all the notifications from your inbox?
    Settings X
    We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Mykhel sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Mykhel website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more