For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS  
For Daily Alerts

मुंबई को महंगा पड़ा पोलार्ड को 'नजरअंदाज' करना

By Staff

नई दिल्ली, 26 अप्रैल (आईएएनएस)। मुंबई इंडियंस टीम प्रबंधन अगर हरफनमौला खिलाड़ी केरॉन पोलार्ड को लंबे समय तक 'नजरअंदाज' नहीं करता तो नवीं मुंबई के डी.वाई. पाटील स्टेडियम में रविवार को चेन्नई सुपर किंग्स के साथ खेले गए इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के खिताबी मुकाबले का नतीजा कुछ और हो सकता था।

मुंबई प्रबंधन द्वारा पोलार्ड को 18 गेंदें शेष रहते बल्लेबाजी के लिए भेजने का फैसला समझ से परे दिखा। लंबे इंतजार के बाद खुलकर शॉट खेलने के मूड में आए अभिषेक नायर के 67 के कुल योग पर रन आउट होने के बाद आमतौर पर सातवें क्रम पर बल्लेबाजी करने वाले हरभजन सिंह को भेजा गया जबकि उस वक्त टीम को पोलार्ड जैसे 'हार्ड हिटर' की जरूरत थी।

हरभजन की नाकामी के बाद भी प्रबंधन ने पोलार्ड को बल्लेबाजी के लिए उतारना उचित नहीं समझा जबकि रन रेट लगातार ऊपर चढ़ता जा रहा था। हरभजन के बाद अच्छे लय में चल रहे सौरव तिवारी, उनके बाद विकेटकीपर बल्लेबाज अंबाती रायडू और फिर जीन पॉल ड्यूमिनी को बल्लेबाजी के लिए उतारा गया जबकि पोलार्ड ड्रेसिंग एरिया में मन मसोसे बैठे रहे।

अपने टीम प्रबंधन के इस फैसले को लेकर असंतोष साफ तौर पर उनके चेहरे पर दिख रहा था लेकिन वह कुछ नहीं कर सकते थे। 114 के कुल योग पर ड्यूमिनी के आउट होने के बाद पोलार्ड बल्लेबाजी के लिए आए। उस समय 17 ओवर पूरे हो चुके थे। पोलार्ड ने आते ही डगलस बोलिंगर द्वारा फेंके जा रहे 18वें ओवर में 22 रन लिए और मैच में रोमांच ला दिया।

मुंबई इंडियंस को 18 गेंदों पर 55 रन बनाने की जरूरत थी लेकिन पोलार्ड के तूफान के आगे यह अंतर 12 गेदों पर 33 रन का रह गया। इस योग को आसानी से हासिल किया जा सकता था। उस समय मुंबई इंडियंस टीम प्रबंधन को इस बात का अहसास हुआ होगा कि 12वें ओवर की अंतिम गेंद पर 73 रन के कुल योग पर हरभजन के आउट होने के बाद पोलार्ड को अगर बल्लेबाजी के लिए भेजा जाता तो उन्हें विकेट पर टिके रहने का ज्यादा मौका मिलता और इस कारण वह सोच-समझकर शॉट खेल पाते।

पोलार्ड ने 10 गेंदों पर 27 रन बनाए। इसमें दो छक्के और तीन चौके शामिल थे। यह पारी उस समय अंजाम दी गई, जब उनके पास सोचने या समझने का बिल्कुल समय नहीं था। पोलार्ड अच्छे लय में थे और यही कारण है कि उन्हें समय रहते विकेट पर नहीं भेजना मुंबई के लिए इतना भारी पड़ा कि खिताब उसके हाथ से निकल गया।

लगातार 15 मैचों तक शानदार कप्तानी करने वाले सचिन तेंदुलकर एक छोर पर खड़े अपनी टीम को हार के कगार पर जाते देख रहे थे। उस दौरान दो बार ब्रेक लिया गया। ब्रेक के दौरान आमतौर पर रणनीति पर चर्चा होती है लेकिन इसके बावजूद पोलार्ड को आठवें क्रम पर बल्लेबाजी के लिए भेजा गया।

कप्तान, कोच और प्रबंधन की सोच की इसी नाकामी ने मुंबई इंडियंस के साथ से जीत खींच ली क्योंकि उन्होंने एक ऐसे खिलाड़ी को 'नजरअंदाज' किया, जिसमें उसे जिताने की भरपूर क्षमता थी और आईपीएल-3 के दौरान उसने कई मौकों पर इसे साबित भी किया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

**

Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:35 [IST]
Other articles published on Nov 14, 2017
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+