
स्लेजिंग चरम पर थी
उथप्पा वर्ष 2006-08 में अपने करियर के श्रेष्ठ पर थे, वह भारत की ओर से लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे। उन्होंने बताया कि जब भी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज होती थी कंगारू खिलाड़ी बहुत ज्यादा स्लेजिंग करते थे। 2007 में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को टी-20 विश्वकप के पहले मुकाबले का सेमीफाइनल होना था और भारत ने इस मैच में ऑस्ट्रेलिया को मात दी थी, यही नहीं इसके बाद टी-20 सीरीज और वनडे सीरीज में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को पटखनी दी थी। उथप्पा ने बताया कि दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में जबरदस्त स्लेजिंग हुई थी।

जहीर भाई ने दिया था जवाब
टी-20 विश्वकप के सेमीफाइल मुकाबले को याद करते हुए उथप्पा ने कहा कि मुझे याद है कि उस मैच में बहुत ज्यादा स्लेजिंग हुई ती और यह जबरदस्त मैच था। मुझे याद है लोग मुझपर हावी हो रहे थे, जब कंगारू खिलाड़ी स्लेज कर रहे थे तो हमारी टीम से बहुत कम लोगों ने इसका जवाब दिया। सिर्फ जहीर खान भाई ऐसे थे जिन्होंने इसका जवाब दिया था, इसके अलावा कुछ तेज गेंदबाजों ने भी इसका जवाब दिया था। लेकिन किसी भी बल्लेबाज ने ऑस्ट्रेलिया की स्लेजिंग पर पलटवार नहीं किया था।

आगे बढ़कर खेलना हेडन से सीखा
उथप्पा ने बताया कि गौतम गंभीर ने उस मैच में पलटवार किया था। मैंने भी एंड्र्यू साइमंड, मिचेल जॉनसन, ब्रैड हैडिन को जवाब दिया था। लेकिन सबसे मुश्किल था मैथ्यू हेडन को। उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर मुझे बतौर बल्लेबाज काफी प्रेरित किया था। सच कहूं तो मैंने आगे बढ़कर जो शॉट खेलना शुरू किया था वो उन्ही से प्रेरित होकर किया था। मुझे याद है कि हेडन बैटिंग कर रहे थे और वह मुझे स्लेज कर रहे थे, तब मैंने फैसला लिया कि ठीक है, अब मैं जवाब दूंगा। ऐसे में जब हेडन बल्लेबाजी करने आए तो मैंने जवाब देना शुरू किया। आलम यह था कि मेरे पलटवार के बाद हेडन ने मुझसे 2-3 साल तक बात नहीं की थी। वह मुझे बिल्कुल भी तवज्जो नहीं देते थे।

मैंने उनकी ही भाषा में दिया जवाब
रॉबिन ने कहा कि मैथ्यू हेडन ने मुझसे कुछ ऐसा कहा जिसे मैं दोहरा नहीं सकता हूं और मैंने भी उन्हें जवाब दे दिया। जिसके बाद उन्होंने मुझसे 2-3 साल तक बात नहीं की। वह मुझे नजरअंदाज करते थे जो मुझे अच्छा नहीं लगता था। मैं उस वक्त जीतना चाहता था और उन्हें वैसा ही महसूस कराना चाहता था जैसा हम महसूस करते हैं, मैंने वही किया। हालांकि हम जीते लेकिन मुझे सबसे ज्यादा याद आता है उनसे बात करना, उन्होंने सच में मुझे प्रेरित किया था।


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