
मिल रही थी झाड़ू लगाने की नौकरी
उत्तर प्रदेश के लिये रणजी क्रिकेट में खेलने वाले रिंकू सिंह अलीगढ़ के रहने वाले हैं। उनके पिता एक गैस एजेंसी में सिलेडर डिलीवरी का काम करते थे। रिंकू सिंह के घर में 5 भाई-बहन हैं जिसमें वह तीसरे नंबर पर हैं। उनका बड़ा ऑटो रिक्शा चलाता है तो वहीं दूसरा भाई कोचिंग सेंटर में पढ़ाता है। इस युवा खिलाड़ी को शुरु से ही क्रिकेट खेलने का शोका था हालांकि आर्थिक तंगी के चलते वह न तो ट्रेनिंग ले पा रहे रहे थे और न ही घर में मदद कर पा रहे थे। 9वीं फेल होने के चलते रिंकू सिंह को कोई अच्छी नौकरी भी नहीं मिल रही थी तो भाई उन्हें एक ऐसी जगह ले गया जहां उन्हें झाड़ू लगाने की नौकरी मिल रही थी।

क्रिकेट के जरिये ही बदल सकती थी किस्मत
जब झाड़ू लगाने की नौकरी रिंकू सिंह को मिली तो उन्हें लगा कि अब क्रिकेट के जरिये ही उनकी किस्मत बदली जा सकती है। उन्होंने दिल्ली में खेले गये एक टूर्नामेंट में हिस्सा लिया जहां वो मैन ऑफ द टूर्नामेंट बने और एक मोटरबाइक जीती, जिसे उन्होंने अपने पिता को दी ताकि वो सिलेंडर्स की डिलीवरी इससे कर सकें। अपने लगातार प्रदर्शन के जरिये रिंकू सिंह ने 2014 में लिस्ट ए क्रिकेट में विदर्भ के खिलाफ डेब्यू किया और फिर रणजी क्रिकेट भी खेले।
इसी साल रिंकू सिंह ने रणजी ट्रॉफी में जबरदस्त प्रदर्शन किया। यूपी की अंडर 19 टीम से खेलने पर रिंकू को जो भी पैसे मिलते थे वह उसे अपने घर खर्च चलाने के लिये देते थे। घरेलू क्रिकेट से उनके जीवन की गाड़ी थोड़ी पटरी पर तो आई लेकिन रिंकू सिंह की किस्मत ने साल 2018 में उस वक्त करवट ली जब वह आईपीएल ऑक्शन में शामिल किये गये।

शाहरुख खान ने बदल दी जिंदगी
रिंकू सिंह की किस्मत ने साल 2018 में करवट ली जब आईपीएल में खिलाड़ियों की नीलामी के दौरान 20 लाख के बेस प्राइस वाले इस खिलाड़ी को केकेआर की टीम ने 80 लाख में खरीदा। इन पैसों से रिंकू सिंह ने अपना कर्ज चुकाया और अपने भाई की शादी की। इसके बाद उन्होंने अपनी बहन की शादी के लिए पैसा दिया।
रिंकू सिंह ने अभी क्रिकेट में अपना उतना बड़ा नाम नहीं बनाया है लेकिन यकीन मानिए इस खिलाड़ी में दम है। रिंकू सिंह लंबे-लंबे छक्के लगाने के लिए जाने जाते हैं और फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उनका औसत 60 से ज्यादा है। ये आंकड़े साबित करते हैं कि उनके अंदर टैलेंट हैं और जो कि जल्द ही मैदान पर दिखेगा।


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