नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) आप जब राजधानी में पंचकुईया रोड पर पहुंचते हैं तब मेन रोड पर आपको कुछ टूटे -फूटे घर और दूसरी इमारतें दिखाई देती हैं। ये सब रेलवे की हैं। कभी यहां के 54 नंबर के बंगले में एक साथ तीन टेस्ट प्लेयर रहते हैं। चौथे बनते-बनते रह गए गए थे।
हम बात कर रहे हैं लाला अमरनाथ के घर की। उन्हें लोग लाला जी भी कहते थे। उन्हें 1950 के आसपास यहां पर बंगला मिला था। वे रेलवे में नौकरी करते थे। बंगला मेन रोड पर था। इधर ही उन्होंने क्रिकेट खेलना सिखाया अपने तीनों पुत्रों सुरेन्द्र, मोहिन्दर और राजेन्द्र अमरनाथ को। बंगले के बाहर बड़ा सा मैदान था। वहां पर लाला जी की पाठशाला चलती थी।
50 साल इधर रहे
लाला अमरनाथ करीब 50 साल इधर रहे। उनका बंगला क्रिकेट प्रेमियों के लिए किसी तीर्थ स्थल की तरह था। लाला अमरनाथ पहले भारतीय थे जिन्होंने टेस्ट मैचों में शतक ठोका था। सुरेन्द्र ने अपने टेस्ट जीवन के पहले ही टेस्ट में शतक मारा था। ये बात 1976 की है। सुरेन्द्र ने न्यूजीलैंड के खिलाफ आकलैंड में शतक मारा था।
1995 तक इसी बंगले में
मोहिन्दर लंबे समय तक भारतीय टीम से जुड़े रहे। लाला अमरनाथ का परिवार 1995 तक इसी बंगले में रहा। पर सालों उस बंगले बाहर लाला अमरनाथ लिखा रहा। पर इसी रोड़ पर मेट्रो के चलने और उसका काम होने के कारण यहां पर बीसियों दूकानें और घर तोड़े गए। उनमें लालाजी का भी घर था।
कहते हैं लाला जी के घर में उस दौर में कई कुत्ते भी रहते थे। लाला जी बेहद गर्म स्वभाव के इंसान थे। दिल्ली क्रिकेट से जुड़े रहे गुरुचरण सिंह कहते हैं कि लाला जी की मौजूदगी में उनके कुत्ते भी नहीं भौंकते थे। अब तो उस दौर की यादें ही बची हैं।