For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS  
For Daily Alerts

मुक्‍केबाजी को मिली नई पहचान: विजेंदर

By संजीव श्रीवास्तव
बीबीसी एक मुलाक़ात में इस हफ़्ते हमारे मेहमान हैं बीजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचने वाले मुक्केबाज़ विजेंदर सिंह. इस हफ्ते हमारे मेहमान हैं, बीजिंग ओलंपिक में इतिहास रचने वाले मुक्केबाज़ विजेंदर सिंह.

भारत के लिए ये ओलंपिक काफ़ी अच्छा रहा. पूरा माहौल और आपका अनुभव कैसा रहा?

मैं 13-14 साल से मुक्केबाज़ी कर रहा हूँ. पहले जब कभी देश से बाहर जाता था तो भारत की पहचान क्रिकेटरों से होती थी, लेकिन पिछले कुछ समय से हालात बदले हैं. निशानेबाज़ों, पहलवानों, मुक्केबाज़ों ने अच्छा प्रदर्शन किया है और भारत को इन खेलों में पहचान मिली है.

मुक्केबाज़ी में तो ये पहला पदक था. आपको उम्मीद थी?

मैं भिवानी का रहने वाला हूँ. जिस तरह देश के दूसरे हिस्सों में क्रिकेट लोकप्रिय है, भिवानी में मुक्केबाज़ी उतना ही लोकप्रिय है
हमने पहले भी कहा था कि मुक्केबाज़ इस बार बेहतर प्रदर्शन करेंगे. दरअसल, सभी मुक्केबाज़ों को यकीन था कि वे ओलंपिक में अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं. सबका मनोबल ऊँचा था.

और आखिरी मैच से पहले तैयारी कैसे की?

ओलंपिक में दूसरे दौर में थाईलैंड के मुक्केबाज़ के साथ मुक़ाबला काफ़ी मुश्किल था. हालाँकि इसमें मैं 13-3 से जीता था, लेकिन दो-तीन महीने पहले मैं उनसे एक मुक़ाबले में हार गया था. इसलिए मनोबल ऊँचा था.

पहलवानों के खानपान के बारे में तमाम बातें कही जाती हैं तो क्या मुक्केबाज़ भी खानपान का ख़ास ख़्याल रखते हैं?

बिल्कुल. हमारे भी डायटीशियन होते हैं. मैन्यू हर दिन अलग-अलग होता है. हमारे खाने में प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है.

और मुक्केबाज़ी की ट्रेनिंग?

ये शेड्यूल पर निर्भर करता है. यानी अगर कंपीटीशन है तो ट्रेनिंग ज़्यादा होती है. अगर आराम का समय है तो दमखम बढ़ाने पर ज़्यादा ध्यान देते हैं. मैं पाँच-छह घंटे अभ्यास करता हूँ. वैसे भी मुक्केबाज़ी में स्ट्रेंथ, स्पीड और स्किल का सबसे ज़्यादा महत्व होता है.

बाहर दोस्तों के साथ मस्ती में मुक्केबाज़ी करते हैं क्या?

जी नहीं, रिंग में ही इतनी मुक्केबाज़ी हो जाती है कि बाहर करने की ज़रूरत नहीं पड़ती.

मुक्केबाज़ बनने की ख़्वाहिश सबसे पहले कब पैदा हुई?

मैं भिवानी का रहने वाला हूँ. जिस तरह देश के दूसरे हिस्सों में क्रिकेट लोकप्रिय है, भिवानी में मुक्केबाज़ी उतना ही लोकप्रिय है. जब मैं सातवीं-आठवीं कक्षा में पढ़ता था, तभी से मुक्केबाज़ी शुरू कर दी थी. वहाँ से राजकुमार, राजीव, अखिल कुमार काफ़ी अच्छे मुक्केबाज़ निकले हैं. वहाँ भिवानी बॉक्सिंग क्लब यानी बीबीसी भी है.

वहाँ कितने लड़के मुक्केबाज़ी करते होंगे?

भिवानी ज़्यादा बड़ा शहर नहीं है, फिर भी वहाँ पाँच बॉक्सिंग अकादमी हैं और मेरे हिसाब से वहाँ रोजाना करीब 500 लड़के मुक्केबाज़ी का अभ्यास करते हैं.

अच्छा थोड़ा अपने बचपन के बारे में बताएँ. क्या मुक्केबाज़ी के अलावा कुछ और भी अरमान थे?

मेरा मानना है कि जो भी क्षेत्र चुनों, उसके शीर्ष पर पहुँचो. हमारे समाज में ये धारणा है कि बस पढ़ाई करो, लेकिन मेरे माता-पिता ने मुझे मुक्केबाज़ी का मौका दिया और मैंने उनके सपनों को साकार कर दिखाया. मेरे पिताजी हरियाणा रोडवेज में कर्मचारी हैं, फिर भी उन्होंने मुझे मुक्केबाज़ी को करियर बनाने का अवसर दिया.

विजेंदर सिंह की ज़िंदगी का आम दिन कैसा होता है?

चूंकि मैं मुक्केबाज़ हूँ, इसलिए जब ट्रेनिंग नहीं होती तब खूब सोता हूँ. हमारी पार्टी शाम को शुरू होती है और देर रात तक मैं दोस्तों के साथ खूब मजा करता हूँ.

आप मॉडलिंग का भी शौक रखते हैं?

दरअसल, एक अख़बार में मेरा फोटो छपा था. तब किसी ने मुझे मॉडलिंग का ऑफर दिया. मैंने सोचा कि मॉडलिंग करके देखते हैं और ये अनुभव अच्छा रहा.

आपका पहला प्यार?

दरअसल, अभी तक मुझे कोई ऐसी लड़की मिली नहीं जो मुझे अच्छी लगे. किसी के बाल अच्छे होते हैं, तो किसी के होंठ. मेरी तलाश जारी है और आने वाले वर्षों में भी जारी रहेगी.

ये तलाश क्या बॉक्सिंग ग्लब्स पहनकर करते हैं?

मुझे लगता है कि लड़कियां मुक्केबाज़ों से डरती हैं. उन्हें लगता है कि मुक्केबाज़ गुस्सैल होते हैं. वो डरती हैं कि कहीं गुस्से में मुक्का न मार दे.

हमारी जानकारी तो ये है कि लड़कियाँ आपको बहुत पसंद करती हैं?

ये जानकारी मुझे आपने ही दी है. इसके लिए आपका शुक्रिया.

हमारे समाज में ये धारणा है कि बस पढ़ाई करो, लेकिन मेरे माता-पिता ने मुझे मुक्केबाज़ी का मौका दिया और मैंने उनके सपनों को साकार कर दिखाया
जब आप छोटे थे तो क्या शैतान थे. खूब हँसी मजाक करते थे?

जी नहीं, मैं आम बच्चों जैसा था. लेकिन मेरी सोच एकदम अलग थी.

आपके भाई का कहना है कि बचपन में आप मक्खन चुराकर खा जाते थे?

नहीं. ऐसा कुछ नहीं था. लेकिन मुझे मक्खन और घी बहुत पसंद है.

मुक्केबाज़ी के अलावा और क्या शौक हैं आपके?

मुझे फ़िल्में देखने और संगीत सुनने का शौक है. दोस्तों के साथ शॉपिंग करना और खर्च करने का भी खूब शौक है. जो भी मुझे अच्छा लगता है, ख़रीद लेता हूँ. मुझे लोगों को गिफ्ट देना भी अच्छा लगता है.

हाल में कौन सी फ़िल्म देखी?

मैं अक्षय कुमार और शाहरुख़ ख़ान का प्रशंसक हूँ. मैंने अक्षय कुमार की भूल भुलैया देखी है. जब भी समय मिलेगा 'सिंग इज़ किंग' ज़रूर देखूँगा. अक्षय रफ एंड टफ हैं और अभिनय भी उनका ज़ोरदार है.जहाँ तक शाहरुख़ की बात है उनका जोश देखते ही बनता है. उनमें कुछ पाने की चाह दिखती है. शाहरुख़ ऊर्जा से भरपूर नज़र आते हैं.

विजेंदर का कहना है कि मुक्केबाज़ी दर्द से भरा हुआ खेल है अभिनेत्रियों में कौन पसंद है?

बहुत सी अभिनेत्रियां पसंद हैं. सोनाली बेंद्रे, प्रियंका चोपड़ा, रानी मुखर्जी, लारा दत्ता से तो मैं मिल भी चुका हूँ.

इन अभिनेत्रियों से मुलाक़ात कैसे हुई?

राष्ट्रमंडल खेलों में इनमें से कुछ अभिनेत्रियों के साथ मुलाक़ात हुई थी.

एक मुलाक़ात का सफ़र आगे बढ़ाएँ. आपकी पसंद के गाने?

मैं सोनू निगम, कैलाश खेर को खूब सुनता हूँ. इसके अलावा मुझे पंजाबी संगीत भी बहुत पसंद है. कैलाश खेर का 'तेरी दीवानी..' मुझे बहुत पसंद है. सोनू निगम का 'अब मुझे रात दिन..'. इसके अलावा भूल भुलैया का 'लवों को लवों से' गाना भी पसंद है.

कैसी लड़की से शादी करोगे?

ऐसी लड़की से शादी करना चाहूँगा, जो मुझे समझ सके और मुझे प्यार करे. सच कहूँ तो शादी के बारे मैं मैंने अभी सोचा नहीं है.

कोई गर्ल फ्रेंड है आपकी?

नहीं, मेरी कोई गर्ल फ्रेंड नहीं है. हालाँकि लड़कियाँ मुझ पर यकीन नहीं करती है और कहती हैं कि मेरी कोई न कोई गर्ल फ्रेंड ज़रूर होगी.

अगर आपको ये मौका मिले कि आप किसी फ़िल्म अभिनेत्री को एक शाम अपने साथ ले जा सकते हैं तो किसे ले जाना चाहेंगे?

काफी मुश्किल सवाल है. वैसे अधिकतर अभिनेत्रियां तो पहले से ही बुक हैं. बिपाशा, ऐश्वर्य, प्रियंका. अब जो भी नई अभिनेत्री आएगी, मैं उसके साथ जाना चाहूँगा.

आपका सबसे अच्छा दोस्त कौन है?

मेरा एक नहीं, तीन-चार अच्छे दोस्त हैं. रवि, बंटी, रामसिंह और जय भगवान.

आपकी या फिर दूसरे पदक विजेता सुशील की बात करें. साधारण परिवार, साधारण पृष्ठभूमि और अपने दम पर जीत. संघर्ष के दिनों की कैसी यादें हैं?

मेरा मानना है कि खेल हो या फिर राजनीति या कोई दूसरा क्षेत्र, वही इंसान सफल होता है जिसने संघर्ष किया हो. फिर मुक्केबाज़ी तो वैसे भी दर्द से भरा हुआ खेल है. मुक्केबाज़ को पहले दिन से दर्द का अहसास होता है. ये ऐसा खेल है चाहे आप जीतें या हारें पंच तो लगने ही हैं, लेकिन दर्द का अहसास तभी होता है जब हम हार जाते हैं.

पंच लगते हैं तो दर्द तो होता ही होगा?

मुक्केबाज़ी में चोट तो लगती ही रहती है. ओलंपिक को ही लें. पहले दौर में मुझे चिन यानी ठुड्डी में चोट लगी थी. दूसरे दौर में कंधे और घुटने में चोट लगी थी. तो खेल में तो ये चलता ही रहता है.

खैर आपके लिए तो ये सामान्य बात होगी, लेकिन आपके माता-पिता को बुरा तो लगता ही होगा?

हाँ, पहले ऐसा होता था. जब मुझे चोट लगती थी तो उन्हें दुख होता था, लेकिन अब धीरे-धीरे उन्हें भी आदत पड़ चुकी है.

संघर्ष के दौर में जब खूब मेहनत करते थे, तब क्या कभी खुद पर शक होता था कि सफल हो पाऊँगा कि नहीं?

खेल हो या फिर राजनीति या कोई दूसरा क्षेत्र, वही इंसान सफल होता है जिसने संघर्ष किया हो
मैं हमेशा सकारात्मक सोचता हूँ. सपने देखता हूँ. ईश्वर का आशीर्वाद रहा कि मैंने जो भी सपने देखे वो पूरे हुए हैं. मैं कोशिश करता हूँ कि नकारात्मक सोच को खुद से दूर रखूँ.

और अगला सपना क्या चल रहा है?

सपना जब पूरा होगा तब बताऊँगा.

क्या आपको लगता है कि भिवानी से कोई और भी ओलंपिक पदक जीतेगा?

बिल्कुल, हमारे जूनियर बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं. विश्व चैंपियनशिप में रजत जीतने वाले सुनील कुमार, मेरा चचेरा भाई बलविंदर सिंह से काफ़ी उम्मीदें हैं. युवा मुक्केबाज़ों पर मुझे भरोसा है और वो हमसे भी अच्छा प्रदर्शन करेंगे.

आपका पसंदीदा मुक्केबाज़ कौन है?

ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले ऑस्कर डि ला होया. बाद में वे पेशेवर मुक्केबाज़ी में उतरे और बहुत अच्छा प्रदर्शन किया.

और दूसरे पेशों में आपके आदर्श कौन हैं?

जो संघर्ष कर बुलंदियों पर पहुँचे हैं, मुझे वे शख्सियतें बहुत पसंद हैं. मसलन शाहरुख़ ख़ान, नवजोत सिंह सिद्धू, शेखर सुमन. मैं भी उन जैसा ही बनना चाहता हूँ.

आप आने वाले दिनों में राजनीति या फ़िल्म में उतर सकते हैं?

मैं अभिनय नहीं कर सकता. मेरा काम मुक्केबाज़ी करना है और मैं इससे ही जुड़े रहना चाहूँगा.

आपकी अब तक की पसंदीदा फ़िल्म?

ये पसंद तो बदलती रहती है. लेकिन मुझे 'चक दे इंडिया', 'रंग दे बसंती' बहुत पसंद है.

आप मुक्केबाज़ नहीं होते तो क्या होते?

अगर मैं मुक्केबाज़ नहीं होता तो या तो भारतीय सेना में होता या फिर पढ़ाई कर रहा होता.
Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:20 [IST]
Other articles published on Nov 14, 2017
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+