
1. दिग्गजों ने लिया संन्यास
भारतीय क्रिकेट टीम ने पिछले एक दशक में बल्ले और गेंद के साथ शानदार प्रदर्शन किया। कई पूर्व भारतीय क्रिकेटरों ने भारतीय क्रिकेट को बेहतरीन रूप देने के लिए अहम योगदान दिया। इस दशक में कई महान खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास भी लिया। राहुल द्रविड़ ने मार्च 2012 को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की। उन्होंने 164 टेस्ट मैचों में 52.31 के औसत के साथ 13,288 रन बनाए और 344 वनडे में 10,889 रन बनाए। द्रविड़ ने टेस्ट क्रिकेट में 36 और वनडे क्रिकेट में 12 शतक बनाए थे। उन्होंने अपना आखिरी वनडे इंग्लैंड के खिलाफ सितंबर 2011 में कार्डिफ में खेला था और आखिरी टेस्ट जनवरी 2012 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एडिलेड में खेला था।
सचिन तेंदुलकर ने भी दिसंबर 2012 में वनडे से संन्यास की घोषणा की और अक्टूबर 2013 में टी 20 क्रिकेट से संन्यास ले लिया और बाद में अपना 200वां टेस्ट मैच खेलने के बाद 16 नवंबर 2013 को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में वेस्टइंडीज के खिलाफ क्रिकेट के सभी रूपों से संन्यास ले लिया। मास्टर ब्लास्टर ने 200 टेस्ट मैचों में 53.78 की औसत के साथ 15,921 रन बनाए और 463 वनडे मैचों में 44.83 के औसत के साथ 18,426 रन बनाए और खुद को महान क्रिकेटरों में से एक के रूप में स्थापित किया। भारतीय क्रिकेट के इन दो दिग्गजों के अलावा, इस दशक में खेल से सेवानिवृत्त होने वाले कुछ दिग्गज हैं - युवराज सिंह, वीवीएस लक्ष्मण, गौतम गंभीर, जहीर खान, वीरेंद्र सहवाग, अनिल कुंबले और कई अन्य। इन सब दिग्गजों ने संन्यास की घोषणा करते समय अपने फैंस की आंखों में आंसू ला दिए थे।

2. धोनी का रन-आउट
भला वो दिन काैन भूल सकता है जब 9 जून 2019 को ओल्ड ट्रैफर्ड के मैनचेस्टर स्टेडियम में भारत को सेमीफाइनल मुकाबले में न्यूजीलैंड से हार मिली थी। न्यूजीलैंड से कोई बड़ा टारगेट नहीं मिला था, लेकिन अंतिम पलों में मैच ऐसा पलटा कि करोड़ों भारतीयों का दिल टूट गया। खासकर, जब आखिरी उम्मीद महेंद्र सिंह धोनी रन आउट होकर पवेलियन लाैट गए। न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत के सामने 240 रनों का लक्ष्य रखा था। लेकिन जवाब में भारतीय टीम लड़खड़ा गई। दशक के समाप्त होते-होते इस मैच में ऐसा परिणाम मिला कि सभी भारतीय क्रिकेट प्रेमियों की आंखों में आंसू आ गए।
भारत ने महज 5 रनों के भीतर ही 3 विकेट गंवा दिए। देखते ही देखते 6 विकेट 92 रनों पर दिर गए। लेकिन क्रीज पर माैजू थे धोनी जिनसे एक बार फिर बड़ी उम्मीद थी। धोनी ने टीम को रविंद्र जडेजा संग संभाला और जीत की आस दिलाई। मैच भारत के पक्ष में जाने लगा कि 208 के रनों पर रविंद्र जडेजा आउट हो गए जो 77 रन बनाकर पवेलियन लाैट गए। यह भारत का सातवां विकेट गिरा था। जीत के लिए अभी भी 13 गेंदों में 32 रनों की जरूरत थी। धोनी से उम्मीद थी कि दुनिया के बेस्ट फिनिशर माही मैच जितवा देंगे। लेकिन वह 49वें ओवर की तीसरी गेंद पर रन आउट हो गए। इसी के साथ भारत ही हार भी पक्की हो गई। भारत 18 रन से मैच हार गया। धोनी के रन आउट से करोड़ों फैंस की आंखों में आंसू आ गए। खुद धोनी भी टूटते हुए नजर आए। आलम यह रहा कि धोनी ने इस मैच के बाद टीम में वापसी ही नहीं की। यह दशक का सबसे कमजोर पल था जिसे भारतीय फैंस याद कर मायूस हो जाते हैं।

3. जब सभी खिलाड़ियों के आंखों में आए आंसू
भारत के लिए गर्व की बात थी साल 2011 का विश्व कप जीतना। साल 1983 के बाद महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत ने यह खिताब जीता था। यह क्रिकेक के भगवान सचिन तेंदुलकर के लिए कभी ना भूला पाने वाला दिन रहेगा। 2 अप्रैल को हुए इस मैच में भारत ने श्रीलंका को हराकर कामयाबी के झंडे गाड़े थे। सचिन के अलावा वीरेंद्र सहवाग, गाैतम गंभीर, हरभजन सिंह और युवराज सिंह जैसे महान खिलाड़ियों के लिए यह पल ऐसा था जिसका वो अपने करियर की शुरूआत से ही देखने का इंतजार कर रहे थे।
श्रीलंका ने 275 रनों का लक्ष्य भारत के सामने रखा था, जवाब में धोनी के नाबाद 91 रनों की मदद से टीम ने 6 विकेट रहते मैच अपने नाम कर लिया था। खिलाड़ियों ने जैसी ही ट्राॅफी उठाई तो सभी खिलाड़ी मैदान पर फूट-फूटकर रोने लगे। उनके इस मूमेंट को देख दर्शकों को भी अपने आंसू रोकना मुश्किल हो गए थे। ये खुशी के आंसू थे जिसका जिक्र अब करते समय चेहरे पर मुस्कान आती है। इस खिताब को जीत भारत पहली टीम बन गई जिसने घरेलू धरती पर विश्व कप जीता और भारतीय प्रशंसकों ने इस जीत के लिए 28 साल का लंबा इंतजार किया। ICC क्रिकेट विश्व कप 2011 भारतीय प्रशंसकों के लिए सबसे भावुक क्षण है।


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