नई दिल्ली, 17 मई (आईएएनएस)। पॉल कोलिंगवुड की अगुवाई में इंग्लैंड ने बारबाडोस में रविवार को वह कर दिखाया जो अब तक 'क्रिकेट का जनक' कहे जाने वाले इस मुल्क की कोई भी टीम करने में नाकाम रही थी। क्रिकेट के लगभग 35 साल पुराने विश्व कप के इतिहास में पहली बार इंग्लैंड विश्व चैम्पियन बना है। यह बात दीगर है कि उसने एकदिवसीय नहीं बल्कि फटाफट क्रिकेट में अपनी बादशाहत कायम की है।
ट्वेंटी-20 विश्व कप के तीसरे संस्करण में रविवार को ब्रिजटाउन के किंग्सटन ओवल मैदान पर खेले गए फाइनल मुकाबले में इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया को सात विकेट से हराकर खिताब पर कब्जा किया। इंग्लैंड पहली बार इस प्रतियोगिता का विजेता बना है। इससे पहले 2008 में भारत और 2009 में पाकिस्तान ने प्रतियोगिता जीता था। मैन ऑफ द मैच का पुरस्कार क्रेग कीसवेट्टर को गया, जबकि केविन पीटरसन को मैन ऑफ द सीरिज घोषित किया गया।
इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया द्वारा रखे गए 148 रनों का लक्ष्य तीन ओवर शेष रहते ही तीन विकेट खोकर हासिल कर लिया। इंग्लैंड की तरफ से कीसवेट्टर ने 63 रनों की शानदार पारी खेली। उन्होंने 49 गेंदों का सामना करते हुए सात चौके और दो छक्के लगाए। केविन पीटरसन 47 रन बनाकर आउट हुए। इस पारी में उन्होंने 31 गेंदों का सामना किया और चार चौके व एक छक्का लगाया। ऑस्ट्रेलिया की तरफ से शॉन टेट, मिशेल जानसन और स्टीवन स्मिथ ने एक-एक विकेट लिए।
टॉस हारने के बाद पहले बल्लेबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलिया ने निर्धारित 20 ओवरों में छह विकेट के नुकसान पर 147 रन बनाए। ऑस्ट्रेलिया की तरफ से डेविड हसी ने सबसे ज्यादा 59 रन बनाए। उन्होंने 54 गेंदों का सामना करते हुए दो चौके और दो छक्के लगाए। रेयान साइडबॉटम ने ग्रीम स्वान के हाथों वाटसन को कैच करवाया। इंग्लैंड की ओर से रेयॉन साइडबॉटम दो और ग्रीम स्वान व ल्यूक राइट एक-एक विकेट लिए।
इससे पहले ट्वेंटी -20 विश्व कप में इंग्लैंड का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा था। पहली बार ट्वेंटी-20 विश्व कप का आयोजन वर्ष 2007 से आरंभ हुआ था। परंतु इंग्लैंड पहली बार तीसरे संस्करण के फाइनल में पहुंचा। यहां उसके साथ विश्व कप इतिहास की कड़वी यादें थीं लेकिन कोलिंगवुड और उनके साथी इंग्लैंड के क्रिकेट इतिहास के पन्नों में सुनहरा अध्याय जोड़ने पर आमादा थे और वे इसमें कामयाब भी रहे।
वैसे सीमित ओवरों का विश्व कप पहली बार 1975 में हुआ था और इसका आयोजन भी इंग्लैंड ने किया था। इसके बाद से अब तक इंग्लैंड की टीम तीन बार विश्व कप के फाइनल में पहुंची थी लेकिन हर बार उसे हार का सामना करना पड़ा। इंग्लैंड की टीम पहली बार वर्ष 1979 के विश्व कप के फाइनल में पहुंची और यहां उसे वेस्टइंडीज के हाथों 92 रनों से शिकस्त झेलनी पड़ी।
इसके बाद वर्ष 1987 में पहली बार भारतीय उपमहाद्वीप में क्रिकेट का आयोजन हुआ और इंग्लैंड आस्ट्रेलिया के साथ फाइनल में पहुंचा। यहां भी उसे सात रनों से हार झेलनी पड़ी। वर्ष 1992 में एक बार फिर वह फाइनल में पहुंचा लेकिन इस बार इमरान खान के नेतृत्व वाली पाकिस्तानी टीम ने उसे 22 रनों से हराकर खिताब से महरूम कर दिया।
कप्तान कोलिंगवुड भी अपने मुल्क के इस कड़वी तारीख से वाकिफ थे और इसीलिए फाइनल मैच जीतने के बाद इसका इजहार भी कर दिया। उन्होंने कहा कि उनकी टीम के लिए यह शुरुआत भर है और वह इसे इसी तरह से आगे बढ़ते देखना चाहते हैं।
इंग्लैंड की इस यादगार कामयाबी से गदगद कोलिंगवुड ने कहा, "अब यहां से अच्छा होने वाला है। हमने पहली बार कोई विश्व कप टूर्नामेंट जीता है। हमें यहां से अब आगे बढ़ते रहना है। हम इस जीत का जश्न मनाएंगे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।