सुशील ने कहा, "राष्ट्रमंडल खेलों में पहलवानों ने हमेशा भारत के पदक में वृद्धि की है। हम इस बार दोबारा अपने बेहतर प्रदर्शन को लेकर उत्तेजित हैं।"
सुशील ने कहा, "चूंकि मेलबर्न में संपन्न हुए राष्ट्रमंडल खेलों में कुश्ती शामिल नहीं था, लिहाजा भारत अपनी पदक संख्या बढ़ा नहीं पाया था।"
सुशील ने कहा कि दिल्ली में हो रहे राष्ट्रमंडल खेलों में कुश्ती के दोबारा शामिल होने से भारतीय पहलवान देश के लिए ढेर सारे पदक जीतने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
सुशील ने कहा, "2006 में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा न ले पाने से मैं बहुत निराश हुआ था। मैंने राष्ट्रमंडल कुश्ती चैंपियनशिनप में स्वर्ण पदक जीता था और मैं मेलबर्न में भी स्वर्ण पदक का प्रबल दावेदार था।"
सुशील ने कहा, "मैं गर्व महसूस करता हूं कि 2008 में बीजिंग ओलंपिक में मेरे कांस्य पदक ने उन भारतीय पहलवानों के आत्मविश्वास को बढ़ाने में योगदान किया है, जो 2010 के दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतने को उत्सुक हैं।"
सुशील ने कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों में कुश्ती के मामले में भारत, कनाडा और इंग्लैंड पारंपरिक रूप से मजबूत राष्ट्र रहे हैं। जबकि इस खेल में प्रमुख चुनौती देने वाले अन्य देशों में आस्ट्रेलिया, पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।