भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान धौनी के नेतृत्व में टीम इंडिया ने जहां 2007 में ट्वेंटी-20 विश्व कप का खिताब अपने नाम किया था वहीं इस वर्ष उनकी कप्तानी में चेन्नई सुपर किंग्स टीम ने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के तीसरे संस्करण का खिताब जीता।
सफलता के इस सफर को आगे बढ़ाते हुए धौनी की सुपर किंग्स टीम ने हाल ही में दक्षिण अफ्रीका में आयोजित चैम्पियंस लीग ट्वेंटी-20 चैम्पियनशिप में खिताबी जीत हासिल की। इससे साबित होता है कि धौनी के पास सफलता का अचूक गुरुमंत्र है।
यह गुरुमंत्र दरअसल कुछ और नहीं बल्कि खुद पर और अपने साथियों पर भरोसा करना है। चाहें वह टीम इंडिया हो या फिर चेन्नई सुपर किंग्स, धौनी ने हमेशा अपने साथियों को बिना दबाव के खेलने की प्रेरणा दी है। यही नहीं, एक कप्तान के तौर पर वह विकेट के पीछे और बल्ले के साथ भी प्रेरणादायक प्रदर्शन करते रहे हैं।
आईपीएल-3 में सुपर किंग्स का सफर उतार-चढ़ाव भरा था। चैम्पियंस लीग-2 में हालांकि यह टीम सिर्फ एक मैच हारी लेकिन इसकी सफलता में धौनी की सीधी और सरल कप्तानी का बड़ा योगदान रहा। धौनी ने हमेशा से मैदान में सरल रहते हुए अपने साथियों को जिम्मेदारी ढोने देने की रणनीति अपनाई है।
इस रणनीति का नतीजा रहा है कि उनके साथी जहां खुद को हर वक्त टीम से जुड़ा महसूस करते हैं वहीं दूसरी ओर उनके अंदर जिम्मेदारी को निभाते हुए अच्छा प्रदर्शन करने की भी प्रेरणा आती है। व्यवहार से सरल लेकिन रणनीति से सख्त कप्तान की देखरेख में नए खिलाड़ियों को काफी कुछ सीखने को मिलता है।
ट्वेंटी-20 विश्व कप-2008 और 2010 में भारतीय टीम की नाकामी के बाद धौनी की कप्तानी शैली की आलोचना हो रही थी लेकिन पांच महीने के भीतर दो बड़े खिताब जीतकर उन्होंने अपने आलोचकों का मुंह बेद कर दिया है। धौनी का मत है कि कोई भी टीम लगातार खिताब नहीं जीत सकती लेकिन इससे उसकी क्षमताओं पर से भरोसा नहीं उठना चाहिए।
सुपर किंग्स टीम आईपीएल-1 के फाइनल में पहुंची थी लेकिन उसे हार का सामना करना पड़ा था। वह ट्वेंटी-20 विश्व कप की सफलता का नतीजा था क्योंकि भारत के लिए विश्व कप में खेलने वाले कुछ प्रमुख खिलाड़ी सुपर किंग्स टीम में थे। इसके बाद आईपीएल-2 में धौनी की टीम फाइनल में नहीं पहुंच सकी।
यह वह दौर था जब ट्वेंटी-20 कप्तान के तौर पर धौनी को आलोचना का शिकार होना पड़ा लेकिन आईपीएल-3 की कामयाबी ने आलोचकों को सोचने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद चैम्पियंस लीग-2 की सफलता ने तो उनका मुंह बंद कर दिया। धौनी किस्मत के धनी है लेकिन उनके लिए सबकुछ किस्मत के भरोसे नहीं चलता। वह अपने साथियों पर भरोसा करते हैं और उन्हें सम्मानपूर्वक अपनी जिम्मेदारी निभाने की छूट देते हैं।
टीम में प्रवेश पाने वाला कोई जूनियर खिलाड़ी जब यह महसूस करता है कि उसका कप्तान उसके बारे में दूसरे कप्तान से अलग राय रखता है और उसे अपनी जिम्मेदारियों में सहभागी बनाना चाहता है तो उसके अंदर एक नए आत्मविश्वास का संचार होता है। ऐसा ही संचार आर. अश्विन और सुरेश रैना जैसे खिलाड़ियों के व्यक्तित्व में हुआ, जिन्होंने आईपीएल-3 और चैम्पियंस लीग-2 में शानदार प्रदर्शन किया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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