For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS  
For Daily Alerts
इंडियन सुपर लीग भविष्यवाणियों
VS

फीफा 2010 एक नजर..

By Super
फुटबॉल विश्व 2010 कप यानी फीफा का अब तक का सफर बेहद उतार चढ़ाव भरा रहा है। इस विश्व कप में कुछ ऐसे उलट फेर हुए हैं जिनकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।

अफ्रीका में पहली बार हो रहे फुटबॉल विश्व कप में पहली बार स्पेन की टीम फाइलन में पहुंची है। नीदरलैंड्स की टीम दो बार विश्व कप के फ़ाइनल में पहुँच चुकी है, लेकिन दोनों बार उसे हार का मुँह देखना पड़ा।

यानी इस बार फुटबॉल विश्व विजेता एक नया देश होगा। ये तो आज रात ही पता चलेगा कि आखिर स्पेन और नीदरलैंड में से वो कौन सी टीम बनेगी फुटबॉल विश्व चैंपियन बनेगी। मगर उससे पहले आइये डालते हैं एक नजर फीफा 2010 के अब तक के सफर पर।

एकमात्र हैट्रिक

फीफा विश्व कप-2010 की एकमात्र हैट्रिक अर्जेटीना के खिलाड़ी गोंजालो हिग्वेन के नाम रही। हिग्वेन ने मेक्सिको के खिलाफ हुए अंतिम-16 दौर के मुकाबले में लगातार तीन गोल करके इतिहास रच दिया था। इस सफलता ने हिग्वेन को गोल्डन बूट की दौड़ में शामिल कर दिया था लेकिन क्वार्टर फाइनल में टीम की हार के साथ उनकी चुनौती समाप्त हो गई।

गोल्डन बूट की दौड़

खिताबी मुकाबले के लिए जगह बना चुकी स्पेन की टीम के स्ट्राइकर विला, जर्मनी के थॉमस मुलर, उरुग्वे के डिएगो फोर्लान और हॉलैंड के दिग्गज प्लेमेकर वेस्ले श्नाइडर सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ी को दिए जाने वाले प्रतिष्ठित 'गोल्डन बूट' की दौड़ में सबसे आगे चल रहे हैं।

विला, मुलर, फोर्लान और श्नाइडर ने अब तक कुल पांच-पांच गोल किए हैं जबकि अर्जेटीना के गोंजालो हिग्वेन, स्लोवाकिया के राबर्ट विट्टेक और जर्मनी के दिग्गज खिलाड़ी मिरोस्लाव क्लोज चार-चार गोल के साथ दूसरे स्थान पर हैं।

हॉलैंड के खिलाफ सेमीफाइनल मैच में मैदान में नहीं उतर सके उरुग्वे के लुइस सुआरेज, घाना के असोमह ग्यान, ब्राजील के लुइस फेबियानो और अमेरिका के लेंडन डोनोवान तीन-तीन गोलों के साथ इस दौड़ में तीसरे स्थान पर हैं। इसके अलावा 14 खिलाड़ी ऐसे हैं, जिन्होंने विश्व कप में दो-दो गोल किए हैं। 72 खिलाड़ियों के नाम एक-एक गोल दर्ज हैं।

आत्मघाती गोल

इस विश्व कप में दो मौके ऐसे भी आए जब खिलाड़ियों ने अपनी ही टीम के 'खिलाफ' गोल गिए हैं। खेल की भाषा में इसे आत्मघाती गोल कहा जाता है। पहला गोल डेनमार्क के खिलाड़ी डेनिएल अगेर के नाम दर्ज है। दूसरा आत्मघाती गोल दक्षिण कोरिया के खिलाड़ी पार्क यू यंग के नाम है।

यंग ने यह गोल पुर्तगाल के खिलाफ किया था जबकि अगेर ने विश्व कप का पहला आत्मघाती गोल हॉलैंड के खिलाफ हुए पहले दौर के मुकाबले दौरान किया था।

फ्लॉप हुए बड़े नाम

क्रिस्टियानो रोनाल्डो, लियोनेस मेसी, काका और वायने रूनी सहित कई बड़े नाम ऐसे हैं, जिन्हें लेकर विश्व कप से पहले बड़ी उत्सुकता थी लेकिन यूरोपीयन पेशेवर लीग के माध्यम से नाम कमा चुके ये खिलाड़ी अपने देश के लिए कुछ नहीं कर सके।

पुर्तगाली टीम के कप्तान के तौर पर रोनाल्डो सिर्फ एक गोल कर सके लेकिन उन्होंने अपने खेल से प्रभावित किया। अर्जेटीना के 'नए मैराडोना' कहे जाने वाले मेसी ने भी कई मौकों पर अपनी टीम को बड़ी सफलता दिलाई लेकिन वह गोल करने के मामले में फिसड्डी साबित हुए। इसी तरह ब्राजील के काका बुरी तरह फ्लाप रहे।

सबसे बुरा हाल विश्व के सबसे अच्छे स्ट्राइकर माने जाने वाले इंग्लैंड के रूनी का हुआ, जो विश्व कप में कहीं दिखे ही नहीं। खेल के लिहाज से रूनी ने इतना निराश किया कि इसका खामियाजा उनकी टीम को भुगतना पड़ा। बड़ी मुश्किल से अंतिम-16 में पहुंची इंग्लैंड की टीम को अंतत: अपने स्टार खिलाड़ियों की नाकामी के कारण क्वार्टर फाइनल में भी पहुंचने का मौका नहीं मिला।

खिलाड़ी जिन्होंने बिखेरी अपनी चमक

इस विश्व कप में स्पेन के स्ट्राइकर विला, हॉलैंड के प्लेमेकर वेस्ले श्नाइडर, अर्जेन रोबेन, जर्मनी के युवा खिलाड़ी थॉमस मुलर, उरुग्वे के स्ट्राइकर डिएगो फोर्लान, अर्जेटीना के गोंजालो हिग्वेन, स्लोवाकिया के राबर्ट विट्टेक और जर्मनी के दिग्गज खिलाड़ी मिरोस्लाव अपनी चमक बिखेरने में सफल रहे।

इसके अलावा उरुग्वे के लुइस सुआरेज, घाना के असोमह ग्यान, ब्राजील के लुइस फेबियानो और अमेरिका के लेंडन डोनोवान ने भी अपने खेल से सबको प्रभावित किया।

गोल्डन बॉल के लिए दावेदारी

फीफा ने विश्व कप-2010 के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के लिए दिए जाने वाले 'गोल्डन बॉल' पुरस्कार के लिए 10 खिलाड़ियों का नामांकन किया है। फीफा के महासचिव जेरोम वाल्के ने बताया कि इन खिलाड़ियों का चयन जीन पॉल ब्रीगर की अध्यक्षता वाले फीफा के टेक्निकल स्टडी ग्रुप और कालूसा ब्वाल्या, क्रिस्टियन कारेम्ब्यू, जोमो सोना और गेरार्ड हाउलियर जैसे फुटबाल विशेषज्ञों ने किया।

इस सूची में सबसे पहला नाम फोर्लान का है। इसके बाद ग्यान, स्पेन के आंद्रेस इनेस्ता, मेसी, जर्मनी के मेसुत ओएजिल, रोबेन, जर्मनी के बास्तियन स्वेनस्टेगर, श्नाइडर, विला और स्पेन के जावी का नाम है।

'गोल्डन बॉल' किस खिलाड़ी को मिलेगा, इस बात का फैसला विश्व कप कवर करने वाले मान्यता प्राप्त पत्रकारों के मतों के आधार पर किया जाएगा। इस श्रेणी में तीन खिलाड़ियों के नामों की घोषणा 11 जुलाई को होगी, जिन्हें गोल्डन, सिल्वर और ब्रांज बॉल पुरस्कारों से नवाजा जाएगा।

इससे पहले, 1982 में इटली के पाब्लो रेस्सी, 1986 में अर्जेंटीना के डिएगो मैराडोना, 1990 में इटली के साल्वाटोर शिलाची, 1994 में ब्राजील के रोमारियो, 1998 में ब्राजील के रोनाल्डो, 2002 में जर्मनी के ओलिवर कान और 2006 में फ्रांस के जिनेदिन जिदान को इस सम्मान से नवाजा जा चुका है।

विवादों का साया

फीफा विश्व कप-2010 कई कारणों से विवादों के घेरे में भी रहा। इसके लिए सबसे बड़ा कारण रेफरियों को माना जा रहा है। रेफरियों ने अपने कई गलत फैसलों के कारण फीफा को असमंजस की स्थिति में डाला।

इंग्लैंड और जर्मनी के बीच खेले गए क्र्वाटर फाइनल मुकाबले में रेफरी ने इंग्लैंड के खिलाड़ी फ्रैंक लैंपार्ड के उस गोल को साफ तौर पर नकार दिया था, जिसे पूरी दुनिया ने दरअसल गोल बताया था। इसे लेकर फीफा को माफी भी मांगनी पड़ी।

पढ़ें: फीफा विश्व कप आज होगा फैसला
मैचों के दौरान तकनीक की मदद लेने के खिलाफ रहे फीफा ने अगली बार से इस संबंध में विचार करने की बात कही है। इसके अलावा विश्व कप में उपयोग में लाई जाने वाली गेंद 'जाबुलानी' भी विवादों के घेरे में रही। कई टीमों के खिलाड़ियों और टीमों ने इस गेंद को असमान बर्ताव को लेकर शिकायत की लेकिन फीफा ने शुरुआत में इसे यह कहकर नकार दिया था कि उसने टीमों को गेंद को आजमाने का काफी वक्त दिया था।

बाद में जब शिकायतों की संख्या बढ़ती गई तब फीफा ने स्वीकार किया कि गेंद में कुछ कमी है लेकिन अब इसे दुरुस्त करने का समय नहीं है। आगे के विश्व कप में इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जाएगा।

मेजबान की चांदी

मेजबान के रूप में दक्षिण अफ्रीका ने जितनी वाहवाही बटोरी है, वह शायद आज तक किसी ने नहीं बटोरी। इस देश को विश्व कप से काफी वित्तीय फायदा भी हुआ है क्योंकि विश्व कप के दौरान 30 लाख से भी अधिक लोगों ने मैचों का लुत्फ लिया। यही नहीं, यहां पहुंचने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या भी 10 लाख को पार कर गई। विश्व कप के आयोजन में पांच अरब डॉलर खर्च करने वाले दक्षिण अफ्रीकी आयोजनकर्ताओं ने इसे लेकर संतोष जताया है।

'पॉल बाबा' का जलवा

फीफा विश्व कप-2010 के मैचों के परिणाम की सटीक भविष्यवाणी करके जर्मनी के एक एक्वेरियम में रहने वाले ऑक्टोपस ने दुनिया भर में शोहरत बटोरी है। इस ऑक्टोपस का नाम पॉल है और अब इसे 'पॉल बाबा' के नाम से पुकारा जाने लगा है। पॉल बाबा की भविष्यवाणी इतनी सही निकली कि जर्मनी की टीम का पूरा सफर उसी आधार पर चला।

अब पॉल बाबा ने स्पेन को विश्व कप का नया चैम्पियन बनने की भविष्यवाणी की है। पॉल ने स्पेन को नया विजेता घोषित करने में मात्र तीन मिनट का समय लगा जबकि कुछ मैचों के परिणाम की भविष्यवाणी करने में पॉल ने 70 मिनट तक का समय लिया था।

पॉल को नियंत्रित करने वाले इस बात को लेकर हैरान हैं कि उसने स्पेन को विजेता के रूप में सामने लाने में बहुत कम समय लगाया। पॉल ने स्पेन और जर्मनी के बीच खेले गए दूसरे सेमीफाइनल मुकाबले को लेकर बिल्कुल सटीक भविष्यवाणी की थी। पॉल ने भविष्यवाणी की थी कि जर्मनी की टीम आस्ट्रेलिया, घाना, इंग्लैंड एवं अर्जेटीना के खिलाफ जीत जाएगी लेकिन स्पेन और सर्बिया के हाथों उसे हार झेलनी पड़ेगी।

Story first published: Monday, November 13, 2017, 11:23 [IST]
Other articles published on Nov 13, 2017
POLLS
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+