केपटाउन। यूरोपियन पावरहाउस कही जाने वाली नीदरलैंड्स की फुटबॉल टीम ने अपने शानदार प्रदर्शन के बल पर मंगलवार को 32 साल बाद फीफा विश्व कप के फाइनल में पहुंची। सेमीफाइनल में हुई रोमांचक भिड़ंत में नीदरलैंड्स ने उरुग्वे को 3-2 से पराजित किया। वर्ष 1988 में यूरोपीयन चैम्पियनशिप जीतने वाली नीदरलैंड्स का पलड़ा फाइनल में भारी दिखने लगा है।
मंगलवार को केपटाउन के ग्रीन प्वाइंट स्टेडियम में खेले गए मैच में हॉलैंड के लिए कप्तान जियोवानी हार्स्ट ब्रांकहार्स्ट ने 18वें मिनट में सबसे पहला गोल दागा। उसके बाद उरुग्वे के स्ट्राइकर डिएगो फोर्लान ने 41वें मिनट में गोल कर मैच बराबर कर लिया। नीदरलैंड की टीम ने अपना आक्रमण जारी रखते हुए 70वें और 73वें मिनट में लगातार दो गोल किए। इनमें एक वेस्ले श्नाइडर ने और दूसरा अर्जेन रोबेन ने। उरुग्वे की ओर से दूसरा गोल एक्स्ट्रा टाइम में मैक्सीमिलानो पेरेरा ने किया।
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श्नाइडर ने इस विश्व कप में अपना पांचवां गोल किया। इस तरह वह सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ी को दिए जाने वाले 'गोल्डन बूट' की दौड़ में स्पेन के डेविड विला की बराबरी पर आ गए हैं। उन्हें मैन ऑफ द मैच चुना गया। हॉलैंड की टीम तीसरी बार फाइनल में पहुंची है। यही नहीं, वह लगातार 25 मैचों से अजेय है। दूसरी ओर, इस हार के साथ उरुग्वे की टीम का 60 साल बाद एक बार फिर खिताबी मुकाबला खेलने का सपना अधूरा रह गया।
उरुग्वे की टीम 11वीं बार विश्व कप में हिस्सा ले रही थी। उसने 1930 में फीफा विश्व कप के पहले संस्करण का खिताब जीता था। फाइनल में उसने अर्जेटीना को 4-2 से पराजित किया था। इसके बाद इस टीम ने 1950 में ब्राजील को हराकर अपना दूसरा खिताब जीता था। उरुग्वे की टीम 40 साल के अंतराल के बाद सेमीफाइनल में पहुंची थी। उसने 1970 में मेक्सिको में चौथा स्थान हासिल किया था।
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यह विडंबना ही है कि फुटबाल जगत की महाशक्ति मानी जाने वाली हॉलैंड की टीम ने अब तक एक बार भी विश्व कप नहीं जीता है। वह दो बार उपविजेता रही है। इस बार उसने ब्राजील को हराकर सेमीफाइनल में खेलने का श्रेय हासिल किया और अब उसका सामना जर्मनी और स्पेन के बीच बुधवार को डरबन में होने वाले दूसरे सेमीफाइनल के विजेता से होगा।
नौवीं बार विश्व कप में हिस्सा ले रही हॉलैंड की टीम विगत 32 वर्षो से फाइनल में नहीं पहुंच सकी थी। वह पहली बार 1974 और दूसरी बार 1978 में फाइनल में पहुंची थी लेकिन बहुत कम अंतर से खिताबी जीत से चूक गई थी। इस टीम ने 1998 में फ्रांस में खेले गए विश्व कप में चौथा स्थान हासिल किया था।