भारत के जाने-माने निशानेबाज़ मनशेर सिंह ने कहा है कि राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान खिलाड़ियों को जिन मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, वो इसलिए है क्योंकि इनकी देखरेख के लिए कोई प्रोफ़ेशनल टीम नहीं है.
बीबीसी के साथ एक विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि जैसे बीजिंग या अन्य ओलंपिक खेलों में देखने को मिलता है, वैसा यहाँ नहीं है.
मनशेर सिंह ने यह भी स्वीकार किया कि खेल गाँव को लेकर हो रहे विवादों के कारण खिलाड़ियों को भी परेशानी होती है.
उन्होंने कहा, "जिनके हाथ में सब चीज़ें हैं, उन्होंने शायद ध्यान नहीं दिया. क्योंकि उनके पास इतने बड़े खेल के आयोजन का अनुभव नहीं है. इसकी वजह से ही ये ख़ामियाँ आ रही हैं."
खेल गाँव को लेकर चल रहे विवाद पर मनशेर ने कहा कि अब लोगों को 24 घंटे काम करके समस्याओं का हल करना चाहिए. क्योंकि ज़िम्मेदारी उन पर है कि वे किस तरह खेलों को सफल बनाते हैं.
मनशेर सिंह ने माना कि इस राष्ट्रमंडल खेलों के साथ जो हुआ है, उससे खिलाड़ियों के मनोबल पर असर पड़ा है.
उन्होंने कहा, "मीडिया में जिस तरह दिखाया गया है और आयोजन समिति में भी ख़ामियाँ रही हैं. देश का नाम भी अच्छी तरह दर्शाया नहीं गया है. खिलाड़ियों को इसका ज़रूर दुख होगा कि कॉमनवेल्थ के कारण देश का नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा जाना चाहिए था, वो नहीं हो रहा है."
इस बीच निशानेबाज़ी टीम के कोच सनी थॉमस ने कहा है कि टीम के खेल गाँव में पहुँचने में देरी की बातें जिस तरह मीडिया में आ रही हैं, वो पूरी तरह सच नहीं है.
उन्होंने कहा कि ये सच है कि कुछ देरी हुई लेकिन ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि पहले उन्हें घरेलू हवाई अड्डे पर लाया गया और फिर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ले जाया गया. जहाँ दो से ढाई घंटे की देर हुई.
बीबीसी के साथ बातचीत में सनी थॉमस ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उन्हें शूटिंग रेंज जाना पड़ा क्योंकि निशानेबाज़ों को वहाँ अपने हथियार जमा कराने पड़े और उसके बाद वे खेल गाँव गए.