BBC Hindi

महान फ़ुटबॉलर जो कभी नहीं उठा पाए विश्व कप ट्रॉफी

मेसी और रोनाल्डो बेहतरीन फ़ुटबॉलर होने के बावजूद कभी विश्वकप नहीं जीत पाए

रूस में चल रहे फ़ुटबॉल विश्वकप 2018 को अप्रत्याशित परिणामों वाला विश्वकप कहा जाए तो शायद गलत नहीं होगा.

विश्वकप के पहले दौर में जहां मौजूदा चैंपियन जर्मनी बाहर हुआ तो नॉकआउट चरण शुरू होने के साथ ही अर्जेंटीना, पुर्तगाल और स्पेन जैसी टीमों की घरवापसी हो गई.

इसके साथ ही इन टीमों से जुड़े कई बड़े सितारों का विश्व कप जीतने का ख्वाब भी अधूरा रह गया. लियोनल मेसी और क्रिस्टियानो रोनाल्डो जैसे बड़े नामी फ़ुटबॉलर आज तक विश्वकप ट्रॉफी को अपने हाथों में नहीं थाम पाए हैं.

इन दोनों खिलाड़ियों ने कुल चार विश्वकप खेले हैं लेकिन दोनों ही खिलाड़ी अंतिम 16 राउंड में गोल करने में नाकामयाब रहे.

अब अगर चार साल बाद 2022 में क़तर में होने वाले विश्वकप तक ये दोनों खिलाड़ी खेलते रहे तो फिलहाल 31 साल के मेसी और 33 साल के रोनाल्डो दोबारा अपनी किस्मत आजमाने की कोशिश ज़रूर करेंगे.

हालांकि जिस तरह से फ़ुटबॉल का खेल तेज़ी से बदल रहा है कि उसके सामने इन दोनों खिलाड़ियों की हसरत पूरी होती महसूस नहीं होती.

ये दोनों ही खिलाड़ी फ़ुटबॉल विश्वकप में सर्वश्रेष्ठ फ़ुटबॉलर का ख़िताब जीत चुके हैं लेकिन अपने देश को विश्वकप नहीं दिला पाए.

लेकिन ऐसा नहीं है कि यह बदकिस्मती सिर्फ इन दो खिलाड़ियों के साथ ही है, उनसे पहले भी ऐसे कई बेहतरीन खिलाड़ी रहे हैं जिन्होंने पूरी दुनिया में अपने खेल का लोहा तो मनवाया लेकिन विश्वकप को अपने पाले में नहीं ला सके.

जोहान क्रूफ (हॉलैंड)

क्रूफ हॉलैंड की टीम के शानदार कप्तान थे.

नारंगी जर्सी पहने हॉलैंड के जोहान क्रूफ को यूरोप के इतिहास का सबसे बेहतरीन फ़ुटबॉलर माना जाता है. साल 1974 में पश्चिमी जर्मनी में खेले गए विश्वकप में उन्होंने अपनी टीम का नेतृत्व किया और 'टोटल फ़ुटबॉल' की अपनी रणनीति के चलते उन्होंने हॉलैंड को फ़ाइनल तक पहुंचाया.

लेकिन इस ऐतिहासिक मैच में उनकी टीम जर्मनी के हाथों 1-2 से हार गई. क्रूफ ने तीन बार गोल्डन बॉल का ख़िताब जीता लेकिन वे कभी विश्वकप नहीं जीत पाए.

फ़ेरेंस पुस्कास (हंगरी-स्पेन)

पुस्कास ने हंगरी और स्पेन के लिए फ़ुटबॉल खेला

पुस्कास को एक सर्वकालिक बेहतरीन फॉर्वर्ड खिलाड़ी के तौर पर जाना जाता है. साल 1952 के ओलंपिक खेलों में उन्होंने अपनी टीम को स्वर्ण पदक दिलाया और उसके दो साल बाद 1954 में स्विट्जरलैंड में खेले गए फ़ुटबॉल विश्वकप में उनकी टीम फ़ाइनल तक पहुंची.

इस मुक़ाबले में उनकी टीम जीत की प्रबल दावेदार थी लेकिन यहां उन्हें पश्चिम जर्मनी के हाथों मात खानी पड़ी.

साल 1962 में पुस्कास ने स्पेन की नागरिकता ली और इसी साल चिली में खेले गए विश्वकप में उन्होंने हिस्सा भी लिया, लेकिन यहां भी वे विश्वकप नहीं जीत पाए.

अल्फ्रेडो डि स्टेफ़नो (अर्जेंटीना-स्पेन)

अल्फ्रेडो डि स्टेफ़नो ने दो देशों के लिए फ़ुटबॉल खेला लेकिन कभी विश्वकप में हिस्सा नहीं ले पाए

फ़ीफ़ा ने डि स्टेफनो को 20वीं शताब्दी के पांच सबसे बेहतरीन फ़ुटबॉलरों में शामिल किया था. इस सूची में पेले, मैराडोना, क्रूफ और बैकेनबोर शामिल थे.

इतना बेहतरीन फ़ुटबॉलर होने के बावजूद डी स्टेफ़नो कभी विश्वकप नहीं खेल पाए. पहले वे अर्जेंटीना के लिए खेलते रहे लेकिन इस दौरान साल 1950 और 1954 के विश्वकप में अर्जेंटीना ने हिस्सा ही नहीं लिया.

इसके बाद डी स्टेफ़नो ने अर्जेंटीना छोड़ स्पेन की नागरिकता ली, लेकिन बदकिस्मती ने उनका साथ नहीं छोड़ा और साल 1958 के विश्वकप के लिए स्पेन क्वालिफाई ही नहीं कर सका.

उसके चार साल बाद चिली में हुए विश्वकप में डी स्टेफ़नो चोटिल होने के कारण नहीं खेल पाए.

यूसेबियो (पुर्तगाल)

यूसेबियो पुर्तगाली फ़ुटबॉल के पहले चमकते हुए सितारे थे

यूसेबियो का जन्म मोज़ाम्बिक में हुआ, उस समय यहां पुर्तगाल का शासन था. यूसेबियो को पुर्तगाली फ़ुटबॉल का पहला महान फ़ुटबॉलर माना जाता है.

1965 में उन्हें यूरोप के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के तौर पर चुना गया. इसके एक साल बाद इंग्लैंड में हुए विश्वकप में यूसेबियो के बेहतरीन खेल की मदद से पुर्तगाल की टीम सेमीफ़ाइनल तक पहुंची लेकिन यहां उन्हे इंग्लैंड ने 1-2 से हरा दिया.

जोर्ज बेस्ट (उत्तरी आय़रलैंड)

जोर्ज बेस्ट ने कभी विश्वकप नहीं खेला

उत्तरी आयरलैंड का यह महान फ़ुटबॉलर कभी विश्वकप में हिस्सा नहीं ले सका. हालांकि उन्होंने डेनिस लॉवी बॉबी चार्ल्टन के साथ मिलकर साल 1968 के यूरोपियन कप में अपनी टीम मेनचेस्टर यूनाइटेड को चैंपियन ज़रूर बनाया.

इसी साल उन्हें यूरोप का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी भी चुना गया था.

मैक्रो वैन बैस्टन (हॉलैंड)

वैन बैस्टन ने रिटायर होने के बाद अपनी राष्ट्रीय टीम के लिए फ़ीफ़ा मैनेजर की भूमिका निभाई

मैक्रो ने सिर्फ एक ही विश्वकप में हिस्सा लिया. यह विश्वकप साल 1990 में इटली में खेला गया था. इससे पहले 1988 में वैन बैस्टन अपनी टीम को यूरोपियन चैंपियनशिप का ख़िताब जिता चुके थे.

साल 1992 में उन्हें विश्व का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया और उन्होंने तीन बार गोल्डन बॉल भी जीती. लेकिन साल 1993 में जब वे महज़ 28 साल के थे तब टकने में लगी गंभीर चोट ने उनका करियर समाप्त कर दिया.

इन तमाम खिलाड़ियों के अलावा भी कई दूसरे बेहतरीन खिलाड़ी रहे जो कभी विश्वकप नहीं जीत सके, जैसे पाउलो मेल्डिनी (इटली), लुइस फ़िगो (पुर्तगाल), ज़िको (ब्राज़ील), रोबर्टो बैगियो (इटली) और माइकल प्लेटिनी (फ़्रांस).

देखते हैं, अभी इस सूची में और किस खिलाड़ी का नाम जुड़ता है.

ये भी पढ़ेंः

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

BBC Hindi
Story first published: Saturday, July 7, 2018, 13:37 [IST]
Other articles published on Jul 7, 2018

MyKhel से प्राप्त करें ब्रेकिंग न्यूज अलर्ट

We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Mykhel sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Mykhel website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more