नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2018 की शुरुआत 14 जून को मॉस्को में होगी। फीफा वर्ल्ड कप का पहला मैच मेजबान रूस और सऊदी अरब के बीच मास्को के लुज़्निकी में खेला जाएगा। ग्रप ए की टीमों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो उरुग्वे को छोड़ बाकी सब कमजोर टीमें भरी हैं। उद्घाटन मैच 65वीं रैंकिंग की मेजबान टीम रूस और 63वीं रैंकिंग की सऊदी अरब के बीच होगा। ऐसे में देखा जाए तो इन दोनों टीमों के लिए नॉकआउट में पहुंचना काफी मुश्किल है। हालांकि इस ग्रुप की सबसे मजबूत टीम उरुग्वे है और उसके साथ ही मिस्र (इजिप्ट) भी अगले दौर में स्थान बनाने की दावेदार मानी जा सकती है। हालांकि इजिप्ट ने अभी तक फीफा वर्ल्ड कप में एक भी मैच नहीं जीता है लेकिन उसने अपने प्रदर्शन में काफी सुधार किया है। इजिप्ट के पास मोहम्मद सालाह जैसा इंटरनेशनल स्टार प्लेयर है तो वहीं उरुग्वे के पास भी लुईस सुआरेज जैसा खतरनाक खिलाड़ी है।
1- रूस
रूस पूरे टूर्नामेंट में सबसे कमजोर टीमों में से एक है। रूस की टीम 2008 से किसी भी मेजर टूर्नामेंट में ग्रुप स्टेज से आगे नहीं बढ़ पाई है। ऐसे में प्लेऑफ तक पहुंचने के बारे में रूस को आगे रखना बेईमानी होगी। इसके अलावा टीम के अंदर ऑफ-फील्ड भी विवाद की खबरें आई थीं। खबरों के मुताबिक खिलाड़ियों और कोच के बीच मतभेद हैं। हालांकि फिर भी इन खिलाड़ियों का प्रदर्शन देखने लायक होगा।
Key player:- इगोर अकिन्फीव
इगोर अकिन्फीव- रसियन फुटबॉल क्लब पीएफसी सीएसकेए मॉस्को के लिए खेलने वाले इगोर अकिन्फीव को टैलेंटेड गोलकीपर कहा जाता है। इगोर रूस की टीम का नेतृत्व कर रहे हैं। हालांकि इगोर के साथ दिक्कत ये है कि वे बड़े गेम में गलतियां कर देते हैं।
फेडोर समोलोव- इस खिलाड़ी के बारे में कहा जाता है कि वह चल गया तो रूसी अभियान अगले दौर में पहुंच सकता है। वह रूसी लीग में क्रासनोडार क्लब के लिए खेलते हैं और उन्होंने सर्वाधिक 14 गोल जमाए हैं।
Coach: स्टैनिस्लाव चर्चेव
फैबियो कैपेल्लो और गुस हिडिंक जैसे महंगे विदेशी कोच के साथ प्रयोगों के बाद, रूस ने विश्व कप के लिए अपने ही पूर्व गोलकीपर के साथ हाथ वर्ल्ड कप में उतरने की ठानी है।
2- सउदी अरब
फीफा वर्ल्ड कप 2018 के लिए क्वालीफाई करने के बाद साउदी अरब ने अच्छी तरह से तैयारियां की हैं। हालांकि इस बीच टीम ने दो कौचों को बाहर का रास्ता दिखाया। साउदी अरब ने पांचवी बार फीफा वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई किया है। वर्ल्ड कप का ड्रॉ निकलने से 9 दिन पहले केवल 5 फ्रैंडली मैचों में टीम के बॉस रहे एडगार्डो बोजा को बाहर का रास्ता दिखाया गया। जिसके बाद टीम पिछले महीने पुर्तगाल और बुल्गारिया से हार गई थी। अरब की टीम भी पांचवीं बार विश्व कप में खेल रही है। लेकिन वह 2010 और 2014 में क्वालीफाई नहीं कर पाने के बाद इस बार खेल रही है।
Key player:- मोहम्मद अल साहलावी
यह 30 वर्षीय स्ट्राइकर मैनचेस्टर यूनाइटेड में तीन हफ्ते का प्रशिक्षण ले चुका है और इससे उनके खेल कौशल में जबर्दस्त सुधार हुआ है। उन्होंने क्वालीफाइंग दौर में 16 गोल जमाकर अपनी टीम को मुख्य ड्रॉ में स्थान दिलाने में अहम भूमिका निभाई है।
Coach: जुआन एंटोनियो पिज्जी
जुआन एंटोनियो पिज्जी को इसी मंगलवार को नए कोच के रूप में नामित किया गया। अब उनके जिम्मे विश्व कप में सऊदी अरब के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन में सुधार लाना है।
3- मिस्र (इजिप्ट)
इजिप्ट ने वर्ल्ड कप में वापसी के लिए लंबा इंतजार किया है। रिकॉर्ड सात बार अफ्रीकी चैंपियन ने 1990 के बाद पहली बार विश्व कप के लिए क्वालीफाई किया है। वह इससे पहले दो बार विश्व कप में खेल चुकी है पर दोनों ही मौकों पर वह जीत के लिए तरसते रही है। हालांकि इस बार टीम के पास अच्छा मौका है। टीम के पास मोहम्मद सालाह के रूप में तुरुप का इक्का है, जो अकेले दम एक-दो मैच जिता सकता है। यह माना जा रहा है कि उन्हें यदि साथी खिलाड़ियों का सहयोग मिल गया तो उसकी नॉकआउट चरण में स्थान बनाने की मुराद पूरी हो सकती है। इस टीम के पास मोहम्मद इलनेरी और अब्दल्ला सैद के रूप में उम्दा मिडील्डर भी हैं।
Key player: मोहम्मद सालाह
इस फुटबॉलर ने प्रीमियर लीग में इस सीजन में लिवरपूल के लिए 38 मैचों में खेलकर 32 गोल जमाने का रिकॉर्ड बनाया है। इस कारण पहले सत्र में मिले गोल्डन बूट को लंदन स्थित ब्रिटिश म्यूजियम में प्राचीन मूर्तियों के बीच रखा जाएगा। हालांकि लिवरपूल के लिए खेलने वाले सालाह फाइनल में चोटिल हो गए थे। और उनकी टीम को रियल मैड्रिड के हाथों 3-1 से हार का सामना करना पड़ा था।
Coach:- हेक्टर कूपर
अर्जेंटीना के इस धाकड़ फुटबॉलर के जिम्मे इजिप्ट को वर्ल्ड कप में पहली जीत दिलाने का होगा। हेक्टर कूपर के बारे में कहा जाता है कि उनका टीम पर फोसक सबसे ज्यादा डिफेंस पर रहता है और बाद में अटैक। इससे इनकार नहीं किया जा सकता है कूपर की रणनीति कारगर साबित हो सकती है।
4- उरुग्वे
इस ग्रुप से अगर किसी टीमों के नॉकआउट चरण में स्थान बनाने के दावे के बारे में देखें तो इस मामले में उरुग्वे का दावा सबसे दमदार नजर आता है। क्वालीफाइंग दौर की शुरुआत उनकी अच्छी नहीं रह सकी थी, क्योंकि वह पहले तीन मैच चिली, ब्राजील और पेरू से हार गए थे। इसके बाद कोच ऑस्कर वाशिंगटन तबारेज ने रणनीति में बदलाव किया और मिडफील्ड में गति लाने के लिए अपनी अंडर-20 टीम के फेडरिको वालवेर्डे (रीयाल मैड्रिड) और रोड्रिगो बेंटानकर (जुवेंटस) को लाए और इससे सप्लाई लाइन बेहतर हो जाने से उरुग्वे की टीम में जान आ गई। उरुग्वे इससे पहले तक 12 बार भाग ले चुकी है और 1930 और 1950 में चैंपियन भी रह चुकी है।
टीम के पास डिफेंडर डिएगो गोडिन (31) और स्ट्राइकर एडिनसन कैवानी (30) अभी भी विरोधियों को परेशान करने में सक्षम हैं। अब मिडफील्डर्स फेडेरिको वाल्वरडे (19) और नाहिटन नांडेजज (21) जैसे युवा टीम के लिए स्टार्टर्स बन गए हैं।
Key player: लुइस सुआरेज
लुईस सुआरेज पिछले वर्ल्ड कप में अहम मैच में अपनी एक हरकत के कारण रेड कार्ड हासिल कर बैठे थे। वैसे बार्सिलोना क्लब का ये प्रमुख खिलाड़ी अब उन सभी बातों से उबर चुका है। वह उरुग्वे के लिए सर्वाधिक 50 गोल जमाने वाले खिलाड़ी हैं। उन्होंने 26 गोल जमाने में सहयोग भी दिया है। उन्हें पेरिस सेंट जर्मेन (पीएसजी) में खेलने वाले एडिंसन कवानी का सहयोग मिलने पर वह प्रभावी साबित हो सकते हैं। सुआरेज ने वर्ल्ड कप से पहले कहा है कि वे अपने सभी विवादों को भुलाकर टीम की जीत पर फोकस करना चाहते हैं।
Coach: ऑस्कर तबारेज
ऑस्कर तबारेज उरुग्वे टीम का चौथी बार वर्ल्ड कप में नेत-त्व कर रहे हैं। वहीं लगातार तीसरी बार है। 2016 में गिलिन-बैरे सिंड्रोम से उबरने के बाद 70 वर्षीय तबेरेज ने व्हीलचेयर का इस्तेमाल किया है।
ग्रुप A की टीमों का शेड्यूल