मुसलमानों के पवित्र महिने रमज़ान में रोज़ा ना रखने के कारण उनके क्लब नें उन्हें निकाल दिया था. रोज़ा के दौरान अभ्यास करते समय उन्हें पानी पीते हुए देखा गया था. क्लब के इस फ़ैसले पर अली करीम के समर्थकों ने भारी विरोध जताया था.ईरान के भूतपूर्व फ़ुटबॉल खिलाड़ियों ने भी अली करीम का समर्थन किया था. वो खिलाड़ी भी करीम के पक्ष में सामने आए जो ख़ुद ईरान की तपती गर्मी में मैच खेलते हुए भी रोज़ा रखते थे.
अली करीम को मिले भारी समर्थन के बाद क्लब ने उन्हें वापस रखने का फ़ैसला तो किया है लेकिन 40 हज़ार डॉलर का जुर्माना भरने के बाद ही उन्हें वापस लिया जाएगा.अली करीम ने पैसे अदा करने की बात मान ली है लेकिन उनका कहना है कि उन्होंने इस्लाम का कोई अपमान नहीं किया है.
ईरान में विश्लेषकों का मानना है कि अली करीम के क्लब से हटाए जाने का संबंध राजनीति से ज़्यादा है, धर्म से कम.अली करीम ईरान फ़ुटबॉल संघ और स्टील अज़ीन क्लब के प्रबंधन के घोर आलोचक रहे हैं.उन्होंने ईरान में पिछले साल हुए चुनाव के बाद विपक्षी पार्टी के ज़रिए चलाए जा रहे आंदोलन का भी समर्थन किया था.पिछले साल सियोल में विश्व कप फ़ुटबॉल के लिए क्वालीफ़ाई करने के लिए खेले जा रहे मैच के दौरान विपक्षी आंदोलन से समर्थन जताते हुए अली करीम ने हाथों में हरी पट्टी बांध रखी थी.