दुनिया के 202वें वरीयता प्राप्त पुरुष टेनिस खिलाड़ी सोमदेव ने कहा, "मैं अपनी क्षमताओं का उपयोग करते हुए अपनी अपेक्षाओं से आगे निकलना चाहता हूं। हालांकि इस दौरान मैं खुद को जमीन से जोड़े रखना चाहता हूं। मैंने देखा कि सिलिक ने सेमीफाइनल में मार्सेल ग्रानोलर्स के खिलाफ शानदार खेल दिखाया, लिहाजा मुझे सावधान रहते हुए अपने खेल को दिशा देनी होगी।"
उल्लेखनीय है कि सिलिक ने शनिवार को खेले गए सेमीफाइनल मैच में स्पेन के ग्रानोलर्स को 6-4, 6-3 से पराजित किया। हालांकि सोमदेव को फाइनल में पहुंचने के लिए कोर्ट में उतरने की जरूरत नहीं पड़ी क्योंकि उनके प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी जर्मनी के रेनर शटलर कलाई की चोट के कारण मुकाबला शुरू होने से पहले ही प्रतियोगिता के हट गए।
इस तरह सोमदेव चेन्नई ओपन के फाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने। इससे पहले लिएंडर पेस 1998 में सेमीफाइनल तक पहुंचे थे।
शटलर के मैच से हटने के बारे में सोमदेव ने कहा, "वॉक-ओवर का श्रेय किसी को नहीं दिया जा सकता। मैं सेमीफाइनल मुकाबले के लिए तैयार था लेकिन शटलर के बाहर जाने से मेरा काम आसान हो गया। मैं किसी तरह शटलर को नियंत्रित नहीं कर रहा था, लिहाजा उसे मैं अपनी खुशकिस्मती ही कहूंगा कि मैं बिना खेले फाइनल में पहुंच गया।"
मैच से हटने के बाद शटलर ने कहा, "शुक्रवार को खेले गए युगल मुकाबले के दौरान मैंने अपनी कलाई में दर्द महसूस किया था। सेमीफाइनल मुकाबले की मैंने तैयारी की थी लेकिन मैं डबल हैंडेड बैकहैंड शॉट ठीक से नहीं लगा पा रहा था। मैच से ठीक पहले मेरी कलाई का दर्द असह्य स्थिति तक पहुंच गया, लिहाजा मैंने नहीं खेलने का फैसला किया।"
सोमदेव शुक्रवार को क्रोएशिया के इवो कार्लोविक को 7-6, 6-4 से हराकर सेमीफाइनल में पहुंचे थे। 23 वर्षीय सोमदेव ने चमत्कारिक प्रदर्शन करते हुए विश्व के 25वें वरीयता प्राप्त खिलाड़ी कार्लोविक को एक घंटे 26 मिनट तक चले मुकाबले में धूल चटाई थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।