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दर्शकों की उमड़ी भारी भीड़
यह फीफा विश्वकप है यहां आप कम भीड़ का तो अनुमान ही नहीं कर सकते हैं, और न ही लाइन में खड़े होने पर चिंता व्यक्त कर सकते हैं। ऐसा कहा मिकी ने जब वो लगभग एक किलोमीटर लंबी लाइन में खड़े होकर अपने टिकट खरीदने की बारी का इंतजार कर रहे थे। वहीं लैटिन अमेरिका के फैंस टिकट खरीदने में जुटे थे खासतौर पर टीम पेरू के मैच के लिए क्योंकि वो इस मुकाबले में अपने कप्तान ग्वेरेरो को देखने के लिए बहुत उत्साहित हैं जो उनका पहला और शायद आखिरी विश्वकप है।
वहीं सुरक्षा गार्ड के ठीक सामने कुछ टाउट्स खड़े हुए नजर आ रहे थे जो ओपनिंग मैच के लिए फीफा के आधिकारिक मूल्य से तीन गुणा ज्यादा की रकम पर टिकट दे रहे थे। हो सकता है की सुरक्षा गार्ड उनकी अंग्रेजी को अच्छे से न समझ पा रहा हो या फिर उन्हें नजरअंदाज कर रहा हो लेकिन ब्राजील के खेल की कीमत एक ही $ 1000 थी, फीफा मूल्य से दस गुना।

मैदान के बाहर जमे रहे लोग
इस बार मिकी को थोड़ा परेशानी हुई उन्होंने कहा कि वो इस टिकट को खुले में बेच रहे हैं और टिकट कलेक्शन सेंटर के बिल्कुल ठीक सामने। वहीं बहुत से फैंस तो वापस लौट गए और फैन पार्क में भी उसकी क्षमता 25 हजार से ज्यादा लोग बैठे थे, मुकाबले के शुरू होने से पहले ही। उसमें से कई लोगों ने तो आसपास लगी दीवारों को भी फांदने की कोशिश की हालांकि वो इसमें सफल नहीं हो सके क्योंकि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
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भारतीय मूल के लोग भी पहुंचे
वहीं दूसरी तरफ इजमेलोव बीटा होटल में, जर्मनी में बसने वाले एक भारतीय संबुद्ध घोष रूस टुडे को साक्षात्कार देने में व्यस्त थे। घोष ने कहा, "मैं अपने पहले विश्व कप के लिए स्पष्ट रूप से उत्साहित हूं, क्योंकि उनकी पत्नी कैटरीना अपनी ससुराल के साथ समय बिताने में व्यस्त थीं।
उन्होंने कहा कि मैं उन कुछ भारतीयों में शामिल हूं जो अपनी फैमिली के साथ फीफा विश्वकप देखने के लिए रूस आए हैं। उन्होंने कहा की मैं कम से कम 8 मुकाबले जरूर देखूंगा। घोष ने कहा की मैं जर्मनी में रहता हूं और शायद इसीलिए ही मैं विश्वकप देखने के लिए आया हूं। उन्होंने बताया कि यहां लोगों में इसे लेकर खासा उत्साह है और मुझे लग रहा है की यहां कोई पर्व है। उन्होंने कहा की मुझे उम्मीद है की ये उत्साह ऐसे ही बना रहेगाा।


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