मेलबर्न में रविवार को खेले गए मुकाबले में भारतीय जोड़ी ने 55 मिनट के खेल में इजरायल के एंडी रैम और फ्रांस की नताली डेची की जोड़ी को सीधे सेटों में 6-3, 6-1 से हरा दिया।
खेल की शुरुआत से ही भूपति और सनिया की जोड़ी अपनी प्रतिद्वंद्वी जोड़ी पर हावी रही। पहले सेट को 6-3 से अपने नाम करने के बाद भारतीय जोड़ी ने रैम और डेची की जोड़ी को दूसरे सेट में उबरने का कोई मौका नहीं दिया। दूसरे सेट को 6-1 से जीतकर भूपति और सानिया ने खिताब पर कब्जा जमा लिया। किसी भी ग्रैंड स्लैम में मिश्रित युगल का खिताब जीतने वाली यह पहली भारतीय जोड़ी है।
मिश्रित युगल वर्ग में यह भूपति का सातवां खिताब है जबकि सानिया का यह पहला ग्रैंड स्लैम खिताब है। पिछले साल यह भारतीय जोड़ी आस्ट्रेलियन ओपन के फाइनल में हार गई थी।
सानिया के लिए सीनियर वर्ग में यह पहला ग्रैंड स्लैम है। जूनियर वर्ग में विंबलडन में वर्ष 2003 में उसने रूस की अलीसा क्लेबानोवा के साथ युगल खिताब जीता था।
34 बसंत देख चुके भूपति के नाम 11 ग्रैंड स्लैम खिताब हैं। जिसमें सात मिश्रित युगल खिताब और चार युगल खिताब शामिल हैं। रोचक तथ्य यह भी है कि भूपति के नाम दर्ज सात मिश्रित युगल खिताब में हर बार उनकी जोड़ीदार अलग-अलग रही है।
भूपति ने वर्ष 1997 में जापान की रीका हिराकी के साथ मिलकर फ्रेंच ओपन के रूप में मिश्रित युगल वर्ग में पहला ग्रैंड स्लैम खिताब जीता। उसके बाद उन्होंने वर्ष 2002 में येलिना लिखोवत्सोवा और 2005 में मैरी पियर्स के साथ विंबलडन खिताब पर कब्जा जमाया।
भूपति ने 1999 में आई सुगियामा और 2005 में डेनियाला हंतुकोचोवा के साथ मिलकर यूएस ओपन का खिताब जीता। भूपति ने दूसरी बार आस्ट्रेलियन ओपन के मिश्रित युगल खिताब पर कब्जा जमाया है। उन्होंने वर्ष 2006 में स्विटजरलैंड की मार्टिना हिंगिस के साथ इस खिताब पर कब्जा किया था।
ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने के बाद महेश भूपति और सानिया मिर्जा ने कहा कि आस्ट्रेलियन ओपेन की सफलता भारत में टेनिस को नई ऊंचाई तक ले जाएगी।
भूपति और सानिया की जोड़ी रविवार को मिश्रित युगल का ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने वाली पहली भारतीय जोड़ी बन गई। इसके साथ ही भारत के 16 वर्षीय किशोर युकी भांबरी ने जूनियर वर्ग का खिताब जीतने में सफलता प्राप्त की। भूपति और मार्क नोल्स की जोड़ी पुरुष युगल मुकाबले में भी उपविजेता रही।
सानिया ने कहा कि इसके पहले किसी एक टूर्नामेंट में भारत ने इतनी अधिक सफलता कभी भी नहीं हासिल की।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।