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मेक्सिको का अबतक यह है प्रदर्शन
मैक्सिकोः मैक्सिको को इस सीरीज में ग्रुप एफ में जर्मनी, साउथ कोरिया और स्वीडन के साथ रखा गया है। मेक्सिको का और जर्मनी का भी पहला मुकाबला 17 जून को खेला जाएगा वहीं 23 जून को मैक्सिको का दूसरा मुकाबला साउथ कोरिया के साथ होना है, वहीं मैक्सको 27 जून को अपने तीसरे मुकाबले में स्वीडन के साथ भिड़ेगा।
फीफा रैंकिंगः 15
पिछला फीफा विश्वकपः मैक्सिको की टीम इस सीरीज में अंतिम 16 में अपनी जगह बनाने में कामयाब रही थी। वहीं इस टीम का सबसे बेहतर प्रदर्शन 1986 में रहा था जब यह टीम क्वाटर फाइनल में पहुंची थी।
स्टार खिलाड़ीः जेवियर हेरांड्ज, जेसस कैरोना, हिरविंग लोजानो और जोनाथन दॉस संतोष। वहीं इस टीम के कोच की जिम्मेदारी है जुआन कार्लोस ओसोर्यो पर है।
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जुआन कार्लोस के ऊपर बड़ी जिम्मेदारी
2015 में मैक्सिको के कोच पद पर नियुक्त किए जाने से पहले कार्लोस ने कई क्लब के लिए मुकाबले खेले और सफलताएं भी अर्जित कीं। उनका निक नाम रिक्रिएशनिस्टा भी है जो उऩकी गैरपरंपरागत दिए जाने वाली ट्रेनिंग के कारण पड़ा है। गौरतलब हो की सबसे खास बात है की मैक्सिको की टीम कार्लोस के नेतृत्व में 45 मुकाबलों में केवल 7 ही मुकाबले हारी है। मैक्सिको ने पनामा को हराकर अपनी फीफा विश्वकप की राह पक्की कर ली थी। इसके बाद ट्रीनीडेड और टोबैगो को हराकर 21 अंको के साथ मैक्सिको क्वालीफाई हुआ जो 1997 के बाद सबसे बेहतर प्रदर्शन है। दिलचस्प बात है की फीफा के इतिहास में यह टीम 15 बार फाइनल राउंड में सेलेक्ट हुई है लेकिन कभी क्वाटर फाइनल से आगे का मुकाबला वो नहीं जीत सके हैं। और दो बार 1986 और 1970 में वो क्वाटर फाइल में पहुंचे थे। इस बार अगर मैक्सिको की टीम नाकआउट राउंड में सेलेक्ट होती है तो उसका मुकाबला सीधे 5 बार की विजेता ब्राजील से होगा।
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अपने स्टार खिलाड़ियो पर होगा भरोसा
मैक्सिको के लिए सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी हेरनांडेज जिन्होंने 49 गोल किए हैं। खास बात है की इस खिलाड़ी की तीन पीढ़ियां इस खेल से जुड़ी हुई हैं, जिनमें उनके दादा और पिता भी शामिल हैं। गौरतलब हो की उनके पिता ने 1986 में और दादा ने 1954 में मैक्सिको के लिए फुटबॉल खेला था। इस टीम में 22 वर्षीय विंगर लोजानो भी शामिल हैं जो विपक्षी डिफेंडर को अपने सामने टिकने भी नहीं देते हैं। वहीं जोनाथन तास संतोष जैसे शानदार खिलाड़ी भी इस टीम में शामिल हैं।
1986 में अंतिम बार मैक्सिको की टीम क्वाटर फाइनल में पहुंची थी औऱ इस बार उनकी उम्मीद है की इस 32 साल का रिकॉर्ड तोड़ा जाए। ये टीम उन 6 देशों में शामिल है जो 1994 से क्वालीफाई तो होती है लेकिन अंतिम 8 में पहुंचने में कामयाब नहीं हो पाती है। अब ऐसे में देखना दिलचस्प होगा की आखिर कैसे मैक्सिको की टीम कार्लोस के नेतृत्व में जर्मनी, स्वीडन और कोरिया से उबर पाएगी।
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ये है प्रेडिक्शन
अगर अंतिम 16 टीमों के चयन के लिहाज से देखें तो मैक्सिको की टीम ग्रुप एफ की दूसरी सबसे फेवरेट टीम में से एक हैं। स्वीडन के स्टार खिलाड़ी के न होने से इस टीम का पलड़ा बहुत कमजोर नजर आता है। वहीं साउथ कोरिया के लिए मैक्सिको को हरा पाना आसान नहीं होगा । लेकिन मैक्सिको की टीनम को दूसरे मुकाबले में आसानी नहीं होगी जब उसका सामना ब्राजील सरीखी टीम के साथ होगा।


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