लगभग एक लाख दर्शकों की मौजूदगी में खेले जा रहे इस मुकाबले के शुरुआती 45 मिनट रोमांच से भरपूर रहे। इस दौरान दोनों टीमों को गोल करने के कुछ अच्छे मौके मिले लेकिन वे उन्हें भुना नहीं सकीं।
आक्रमण के लिहाज से मेक्सिको की टीम मेजबान टीम से आगे है। उसने लगभग एक दर्जन मौकों पर गोल करने की नाकाम कोशिश की लेकिन मेजबान टीम सिर्फ चार मौकों पर ऐसा कर सकी।
इसी रोमांचक भिड़ंत का नतीजा है कि मेक्सिको के डिफेंडर इफरेन जुआरेज को रेफरी ने 18वें मिनट में पीला कार्ड दिखाया। 27वें मिनट में दक्षिण अफ्रीकी मिडफील्डर कागीसो दिकगाकोई को को भी फाउल खेलने पर पीला कार्ड दिखाया गया।
37वें मिनट में मेक्सिको को गोल करने का शानदार मौका मिला था। गाराडरे टोराडो ने कार्नर पर किक लिया और कार्लोस वेला ने उसे गोल में डाल दिया लेकिन सहायक रेफरी ने वेला को ऑफसाइड करार दिया। इस पर मेक्सिको के कोच जेवियर एगुयेरे काफी नाराज हुए।
मध्यांतर से पूर्व आखिरी मिनट में दिकगाकोई ने मैदान में वापसी करते हुए गोल करने का प्रयास किया लेकिन वह सफल नहीं हो सके। इसके बाद मेक्सिको के खिलाड़ी जी. फ्रांको ने दक्षिण अफ्रीकी गोलपोस्ट पर धावा बोला। वह गोल कर पाते उससे पहले उन्हें ऑफसाइड करार दिया गया।
दक्षिण अफ्रीका में पहली बार विश्व कप का आयोजन हो रहा है। मध्य अमेरिकी देश मेक्सिको को अब तक सर्वाधिक पांच बार विश्व कप का उद्घाटन मैच खेलने के लिए चुना गया है। खास बात यह है कि उद्घाटन मुकाबले में अब तक किसी भी मेजबान देश को हार नहीं मिली है।
अब तक ऐसे सात वाकये हुए हैं लेकिन मेजबान अपनी साख बचाने में सफल रहे हैं। इटली 1934, स्वीडन 1958, चिली 1962 और जर्मनी ने 2006 में अपने पहले मैच में जीत हासिल की थी।
दो मैच ऐसे भी हुए हैं, जिनमें मेजबान देश को ड्रॉ से संतोष करना पड़ा है। 1966 में इंग्लैंड को उरुग्वे के खिलाफ और 1970 में मेक्सिको को सोवियत संघ के खिलाफ गोलरहित ड्रॉ खेलना पड़ा था।
मेजबान के तौर पर विश्व कप के उद्घाटन मैचों में सबसे बड़ी जीत हासिल करने का रिकार्ड इटली के नाम है। इटली ने 1934 में अपने घर में खेले गए विश्व कप के पहले मुकाबले में अमेरिका को 7-1 से पराजित किया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।