हॉलैंड के हाथों सेमीफाइनल में 3-2 से हारने के बाद खिताबी दौड़ से बाहर हुई उरुग्वे की टीम ने स्टार स्ट्राइकर डिएगो फोर्लान और लइस सुआरेज के नेतृत्व में जर्मन टीम को अंतिम क्षण तक जोरदार टक्कर दी लेकिन जीत उसकी किस्मत में नहीं थी।
वैसे भी इस मैच के लिहाज से इतिहास उरुग्वे के साथ नहीं था। यह टीम 1954 और 1970 में भी सेमीफाइनल में पहुंची थी लेकिन उसमें हारने के बाद उसे चौथे स्थान से ही संतोष करना पड़ा था। दोनों ही मौकों पर उरुग्वे की टीम को प्लेऑफ मुकाबलों में हार का सामना करना पड़ा था। दूसरी ओर, जर्मनी की टीम अब तक चार बार तीसरे स्थान पर रही है। इतनी अधिक बार किसी टीम ने तीसरे स्थान का प्लेऑफ मैच नहीं जीता है।
मैच का पहला गोल जर्मनी ने किया था लेकिन उसके बाद उरुग्वे ने अपनी इच्छाशक्ति को जागृत करते हुए जल्द ही बराबरी का गोल दाग दिया था। मध्यांतर तक दोनों टीमें 1-1 की बराबरी पर थीं।
मध्यांतर के बाद जर्मनी ने हालांकि बेहतर खेल दिखाया। इस दौरान उसे दो बार गोल करने में सफलता मिली लेकिन उरुग्वे की टीम फोर्लान द्वारा किए गए गोल के रुप में एक सफलता ही हासिल कर सकी। अंतिम मिनट में फोर्लान ने लगभग 25 गज की दूरी से लिए गए फ्री-किक पर गोल करने का अंतिम प्रयास किया लेकिन गेंद गोलपोस्ट से टकराकर बाहर चली गई।
बहरहाल, जर्मनी के लिए मैच का तीसरा गोल सामी खिदेरा ने 82वें मिनट में किया। खेल के अंतिम समय में हुए इस गोल ने जर्मनी की जीत लगभग पक्की कर दी थी। हालांकि उरुग्वे की टीम ने अगले 12 मिनट तक जर्मनी को खूब छकाया लेकिन उसे सफलता नहीं मिली।
इससे पहले मिडफील्डर मार्सेल जेनसन ने 56वें मिनट में गोल करके अपनी टीम को 2-2 की बराबरी दिलाई थी। जर्मनी ने यह गोल फोर्लान के उस गोल के बदले में किया था, जो उन्होंने 51वें मिनट में दागा था। उरुग्वे ने इस मैच में अपना पहला गोल 28वें मिनट में फारवर्ड खिलाड़ी एडिनसन कावानी के शानदार प्रयास के बूते किया था।
जर्मन टीम ने 19वें मिनट में मैच का पहला गोल करके 1-0 की बढ़त हासिल की थी। जर्मनी के लिए मैच का पहला गोल युवा खिलाड़ी थॉमस मुलर ने 19वें मिनट में किया। मुलर ने यह गोल बास्टियन श्वेनस्टेगर के शानदार पास पर किया।
इस गोल के साथ मुलर ने इस विश्व कप में अपने कुल गोलों की संख्या पांच कर ली है। उन्हें इस विश्व कप में दूसरी बार मैन ऑफ द मैच चुना गया। वह गोल्डन बूट की दौड़ में स्पेन के डेविड विला, फोर्लान और हॉलैंड के वेस्ले श्नाइडर के साथ सबसे आगे चल रहे हैं। तीनों के नाम पांच-पांच गोल हैं।
यह मैच खिताबी दौड़ से बाहर हो चुकीं दोनों टीमों के लिए प्रतिष्ठा बचाने का जरिया था। जर्मनी की टीम अपनी प्रतिष्ठा बचाने में सफल रही लेकिन अच्छा खेलने के बावजूद उरुग्वे को हार का सामना करना पड़ा।
जर्मनी की टीम ने अब तक पांच बार प्लेऑफ मुकाबला खेला है लेकिन 1958 में फ्रांस के खिलाफ ही उसने मैच गंवाया है। दोनों देशों के बीच तीसरे स्थान के लिए यह दूसरी भिड़ंत थी। इससे पहले 1970 में दोनों टीमें आमने-सामने थीं लेकिन जर्मनी ने हेल्मट श्कोएन के गोल की मदद से 1-0 से जीत हासिल की थी।
दोनों टीमों के बीच अब तक कुल 10 मुकाबले हुए हैं जिनमें से नौ में जर्मनी जीता है। उरुग्वे ने वर्ष 1928 में एमस्टर्डम ओलंपिक के दौरान जर्मनी पर एकमात्र जीत हासिल की थी। वह मैच उरुग्वे ने 4-1 से जीता था। इसके बाद 82 वर्षो से उरुग्वे ने जर्मनी पर जीत नहीं हासिल की है।
विश्व कप का खिताबी मुकाबला रविवार को जोहांसबर्ग में स्पेन और हॉलैंड के बीच खेला जाएगा। हॉलैंड की टीम उरुग्वे को 3-2 से हराकर फाइनल में पहुंची है जबकि स्पेन की टीम जर्मनी को 1-0 से पराजित करते हुए पहली बार फाइनल में पहुंची है। हॉलैंड की टीम 32 वर्ष के बाद फाइनल में पहुंची है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।