ब्रिटेन के समाचार पत्र 'द टाइम्स' ने हेमिल्टन के हवाले से लिखा है, "टीमों को अपनी आय और खर्च में संतुलन बनाकर चलना होगा क्योंकि उनके लिए यह बहुत जरूरी है कि बड़ी कंपनियां उनके साथ जुड़ी रहें। हाल के दिनों में इस खेल ने काफी मुश्किलें झेली हैं और अगर यह संतुलन कायम नहीं रहा तो आने वाले दिनों में इसकी दशा खराब हो सकती है।"
हेमिल्टन की यह सलाह फार्मूला वन रेसिंग को नियंत्रित करने वाली संस्था-फेडरेशन ऑफ इंटरनेशनल ऑटोमोबाइल (एफआईए) को अच्छी नहीं लगी होंगी क्योंकि एफआईए ने हाल ही में फार्मूला वन टीमों के साथ मिलकर वैश्विक वित्तीय संकट के मद्देनजर अगले वर्ष से खर्चो में कटौती करने का फैसला किया था।
हेमिल्टन को सबसे ज्यादा इस बात का डर है कि खर्च में कटौती के लिए टीमें अपेक्षाकृत सस्ते इंजनों और सस्ते कल- पुर्जो का उपयोग करेंगी लेकिन इससे खेल के स्तर में गिरावट आएगी। स्तर गिरने से इस खेल का आकर्षण कम होगा और इसी कारण इससे जुड़ी कंपनियां भी धीरे-धीरे हटने का फैसला कर सकती हैं।
वित्तीय संकट के कारण फार्मूला वन की दुनिया बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। हाल ही में जापान की कार निर्माता कंपनी होंडा मोटर्स ने इससे अलग होने की घोषणा की थी। होंडा के अलावा दूसरी अन्य कंपनियों के भी इससे हटने की आशंका जताई जा रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।