
लेरॉय सेन (जर्मनी)
22 वर्षीय मैनचेस्टक का यह खिलाड़ी जर्मनी की टीम की शान कहा जा सकता है । अभी हाल ही में इस खिलाड़ी को मई में हुए प्रीमियर लीग में टाइटल अवार्ड भी मिला। इस खिलाड़ी ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया लेकिन वो इस बार डिफेंडिंग चैंपियन जर्मनी की हिस्सा नहीं हैं। वहीं हाल ही में कोच लोऊ ने भी उनकी तारीफ की थी। इस युवा खिलाड़ी ने टाइटल का अवार्ड जातने के क्रम में 9 गोल दागे थे। हालांकि सभी को उम्मीद थी की ये खिलाड़ी इस बार विश्वकप का हिस्सा होगा लेकिन वो इसका हिस्सा नहीं हैं।
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मारियो गोत्जे (जर्मनी)
यह खिलाड़ी जर्मनी का दिल कहा जा सकता है। ब्राजील 2014 के फाइनल मुकाबले में इस खिलाड़ी ने अंतिम समय पर अर्जेंटीना के खिलाफ गोल दाग कर अपनी टीम को जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका दिलाई थी। लेकिन 4 साल के इस गुजरे वक्त ने इस खिलाड़ी के महत्ता को भी कम कर दिया है। हालांकि 26 वर्षीय यह खिलाड़ी इस वक्त अपने खराब प्रदर्शन से भी जूझ रहा है और फिटनेस भी एक बड़ी समस्या है।

माउरो इकार्डी (अर्जेंटीना)
इस बात में कोई संदेह नहीं है की यह खिलाड़ी अर्जेंटीना के बेहतरीन खिलाड़ियों में से एक है। हालांकि उनकी टीम से बाहर रहने का एक कारण उनकी निजि जिंदगी का भी हो सकता है । दरअसल इकार्डी का अपने साथी खिलाड़ी की पत्नी मैक्सी लोपेज के साथ संबंध है। आखिरकार दोनों की शादी भी हो गई है। हालांकि उनका प्रदर्शन बेहद शानदार रहा है और उन्होंने अपने जीवन की सबसे बेहतर प्रदर्शन इस सीजन 29 गोल के साथ किया है।
अल्वारो मोराटा ( स्पेन)
मोराटा की अगर बात करें तो इ स्ट्राइकर खिलाड़ी का गोल मारने का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा है। और इस खिलाड़ी के लिए स्पेन का सफर भी बेहद खास रहा है। अगर 2016-17 की बात करें तो इस खिलाड़ी ने 17 मैच में 12 गोल दागे हैं। इसके साथ ही तीन स्ट्राइकर भी 2016 में हालांकि इस खिलाड़ी के लिए हाल फिलहाल का सीजन उतना खास नहीं रहा हैं लेकिन उनकी कमी इस टीम को खल सकताी है। उनकी पुराने साथी खिलाड़ी डिगो कोस्टा को उनकी जगह चुना गया है।

एंटोनी मरटियल ( फ्रांस)
इस शानदार खिलाड़ी के लिए एक बड़ी समस्या रही है की इन्हें निरंतर टीम में नहीं शामिल किया गया है। उन्हें अभी हाल ही में हुए प्रीमियर लीग से भी दूर रखा गया था। हालांकि इस खिलाड़ी का फीफा में न शामिल होना फ्रांस की टीम के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है। उऩके लिए अभी सफर खत्म नहीं हुआ है क्योंकि अभी वो महज 22 साल के हैं।
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जैक विलशेर( इंग्लैंड)
एक लंबे समय तक एंजरी से जूझने के बाद विलसरे को 2016-17 में वापसी कर कांफिडेंस गेन करने का मौका मिला था। हालांकि उन्हे नीदरलैंड और इटली के साथ हुए मैत्री मुकाबलों में जगह मिली थी। लेकिन इससे उनकी फीफा की राह आसान नहीं हुई। विलसरे ने अपना लास्ट कप यूरो 2016 में आइसलैंड के खिलाफ खेला था। जहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

रडजा नैनगोलान (बेल्जियम)
इस खिलाड़ी को विसेंट कोंपनी की तरह चोट से बाहर का रास्ता दिखाया गया है। इनकी अनुपस्थिति में कोच ने रोमा मैन को टीम की जिम्मेदारी सौंपी है। हालांकि नडजा अपने शानदार प्रदर्शन से गुजर रहे थे लेकिन उन्हें बाहर का रास्ता देखना पड़ा जिसकी वजह से उन्होंने एक टीवी चैनल में कहहा भी थी कि उन्होंने 300 मैच टीम के लिए खेले हैं। वहीं रिपोर्टर्स की मानें तो मिडफील्डर को लेकर उनके और मार्टीनेज के बीच कुछ अनबन चल रही थी। इससे परेशान होकर इस खिलाड़ी ने संन्यास की भी घोषणा कर दी।

एलेक्जेंडर लकाजेत(फ्रांस)
अगर इस खिलाड़ी को देखें तो यह रिकॉर्ड कायम करने के लिए ही जाना जाता है लेकिन कोटच की माने तो यह खिलाड़ी अपने को साबित करने में नाकाम रहा है। इकार्डी की तरह यह खिलाड़ी भी फ्रांस की टीम में नजर नहीं आएगा। वहीं कोच ने कहा की उनकी चयनित टीम बेहद शानदार है और ओलिवर गिरौड, ग्रिजमैन जैसे खिलाड़ी हैं। गौरतलब हो की लकाजते ने अर्सेनाल के लिए डेब्यू मैच में 14 गोल दागे थे।

मार्कस एलैंसो (स्पेन)
इस खिलाड़ी को साथी खिलाड़ियों ने सर्जियो रोमोस और तरह-तरह के नाम दिए हैं उनके डिफेंसिव खेल के लिए। उनके लिए माना जा रहा था कि फीफा की राह आसान होगी,उन्होंने इस सीजन शानदार प्रदर्शन भी किया है लेकिन वो टीम का हिस्सा नहीं बन सके हैं। उऩका टीम में न शामिल होना काफी अचरज भरा था।
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सर्जी रोबर्टो(स्पेन)
इस खिलाड़ी को हमेशा याद रखा जाएगा अपने अंतिम समय में गोल के लिए जो इन्होंने पीएसजी में दागा था। वहीं इनके साथी खिलाड़ी एलैंसो भी टीम में शामिल नहीं हुए हैं।उनकी दावेदारी बढ़ी थी जब डैनी कारवजल के ऊपर कुछ मुसीबत बढ़ी थी लेकिन टीम ने साफ कर दिया है की वो इसी टीम का हिस्सा रहेंगे। ऐसे में इस शानदार खिलाड़ी के लिए फीफा का सफऱ अब इस सीजन नहीं हो सका है।


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