समाचार चैनल 'इंडिया न्यूज' के साथ खास बातचीत में सहवाग ने हालांकि कहा कि बतौर कप्तान गांगुली का कोई जोड़ नहीं क्योंकि उन्होंने विदेशी सरजमीं पर कई जीत दर्ज की है और सही मायनों में भारतीय क्रिकेट को एक नई पहचान दी।
नजफगढ़ के नवाब आज भी अनिल कुंबले और सौरव गांगुली की कमी को ड्रेसिंग रूम में महसूस करते हैं। वीरू का मानना है कि सौरव और कुंबले जैसे शख्सियत की भरपाई करना इतना आसान नहीं है।
वीरू ने साल 2008 को अपने करियर का सबसे बेहतरीन साल माना है। उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ इस साल गॉल में खेली गई 200 रनों की पारी को सबसे बेहतर पारी बताया।
2008 में भारतीय टीम की सफलता पर बात करते हुए सहवाग ने कहा कि टीम के सभी बल्लेबाज इस साल बेहतरीन फॉर्म में रहे। गेंदबाजों ने भी अपने रोल को बखूभी निभाया, जिसकी वजह से टीम इंडिया आईसीसी रैंकिंग में नम्बर दो पर पहुंच पाई।
अपने दोनों तिहरों शतक पर बात करते हुए वीरू ने कहा कि चेन्नई में लगाया गया तिहरा शतक उनके लिए मुलतान से ज्यादा खास है। उनका यह भी मानना है कि इस साल टीम इंडिया के नम्बर वन पर पहुंचने के अच्छे आसार हैं।
बल्लेबाजी के अलावा 2008 में वीरेंद्र सहवाग ने गेंदबाजी में भी कमाल दिखाया। कोटला टेस्ट में एक पारी में पांच विकेट लेने को वीरेंद्र सहवाग अपने करियर का एक अहम पड़ाव मानते हैं और वे अपनी गेंदबाजी पर खासी मेहनत कर रहे हैं।
गौतम गंभीर के साथ अपनी जोड़ी के बारे में वीरू ने कहा कि गौतम और मेरे बीच अच्छा सामंजस्य है और कभी कभी हम आंखों ही आंखों में इशारा करके अपनी रणनीति बना लेते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।