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देशः ऑस्ट्रेलिया
ग्रुपः सी (डेनमार्क,ऑस्ट्रेलिया,पेरू,फ्रांस)
मुकाबलेः पहला मुकाबला 16 जून को फ्रांस के साथ
21 जून को दूसरा मुकाबला डेनमार्क के साथ
तीसरा मुकाबला 26 जून को पेरू के साथ
फीफा रैंकिंगः 36
पिछला विश्वकपः ग्रुप स्टेज
बेस्ट प्रदर्शनः 2006 और 2014 में अंतिम 16 में पहुंची
स्टार खिलाड़ीः टिम काहिल, माइल जेडिनाक, आरो मूय
कोचः बर्ट वान मारविज्क
इस एशियन चैंपियन टीम ने पांचवी बार फीफा विश्वकप के लिए क्वालीफाई किया है, जहां इस टीम ने करीब 250000 किलोमीटर की यात्रा करके और 11 अलग-अलग टीमों के साथ मुकाबला खेलकर इस मुकाम को हासिल किया है जिसमें दो बहुत करीबी प्लेऑफ के मुकाबले भी शामिल हैं। वहीं इस टीम में नए कोच की जिम्मेदारी बर्ट वान मारविज्क के हाथों में होगी जिन्होंने सऊदी अरब को क्वालीफिकेशन के लिए तैयार किया है लेकिन अभी वो रूसे कि लिए इस टीम को ट्रेंड करेंगे।
दक्षिण अफ्रीका में आयोजित 2010 विश्वकप के फाइनल में अपने घरेलू देश को निर्देशित करने वाले वान मारविज्क ने एक कठिन नोट पर शुरुआत की, जो संयोजन के बारे में अनिश्चित है। ऑस्ट्रेलिया के फुटबॉल फेडरेशन के साथ सख्त तपस्या उपायों पर जोर देते हुए, वान मारविज्क को अपने जेब से बाहर निकलने के लिए मजबूर किया गया है ताकि वह साथ आए कर्मचारियों का भुगतान कर सके। वहीं कोच के सामने इस टीम को और अधिक सशक्त बना पाना एक कठिन चुनौती होगी।
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कमजोर डिफेंस
इस टीम की अगर बात करें तो डिफेंस इस टीम की सबसे बड़ी कमजोरी है और इस मजबूत ग्रुप में जिसमें फ्रांस, पेरू और डेनमार्क जैसी टीमें शामिल हैं ऐसे में इस टीम को बहुत डिफेंस बहुत मजबूत रखना होगा और साथ ही अपने खेल को निखारना होगा। लेकिन इस टीम में देखें तो 4 डिफेंडर मुख्य रूप से हैं लेकिन कोच माइल जेडिनाक पर अधिक निर्भर होंगे। वहीं टिम काहिल ऑस्ट्रेलियाई टीम में सबसे अनुभवी और उम्रदराज खिलाड़ी होंगे। जिनपर ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ी पूरी तरह निर्भर होंगे।
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भविष्यवाणी
इस टीम की अगर बात करें तो फ्रांस, पेरू और डेनमार्क जैसी मजबूत टीमों के सामने उसका टिक पाना मुश्किल नजर आता है। ऐसे में इस टीम के लिए इस फीफा का सफऱ बहुत मुश्किल नजर आ रहा है जब तक की ये टीम कोई चमत्कार न करे नहीं तो ये भी हो सकता है कि ऑस्ट्रेलिया की टीम बिना कोई मुकाबला जीते ही वापस लौट जाए।


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