विश्व कप के पहले दिन का दूसरा मुक़ाबला शुक्रवार को दक्षिण अफ़्रीक़ा के शहर केपटाउन में खेला गया जिसमें लगभग 64 हज़ार दर्शकों को काफ़ी निराशा हाथ लगी क्योंकि दोनों ही टीमें कोई गोल नहीं दाग़ सकीं. हालांकि फ़्रांस ने पूरे मैच के दौरान काफ़ी आक्रामकता दिखाई और उसे गोल करने के कई नज़दीकी मौक़े भी मिले लेकिन गेंद गोलपोस्ट के भीतर नहीं जा पाई. दस बार फ़्रांस ने गोलपोस्ट पर हमले किए.
उधर उरुग्वे ने भी काफ़ी अच्छे खेल का प्रदर्शन किया और कई बढ़िया निशाने लक्ष्य पर साधे, लेकिन कामयाबी उनके हाथ भी नहीं लगी. उरूग्वे ने तीन बार गोलपोस्ट पर हमले किए लेकिन हर बार उन्हें नाकामी ही हाथ लगी. कुल मिलाकर फ़्रांस ने उरूग्वे से थोड़ा बेहतर प्रदर्शन किया. दोनों टीमें एक कड़े संघर्ष के बाद विश्व कप के लिए क्वालीफ़ाई कर पाईं हैं और आज मैदान पर उनकी कामियां भी उजागर हुईं. फ़्रांस की टीम में तालमेल की कमी दिखी और थिएरी ऑनरी जैसे मंजे हुए खिलाड़ी भी अच्छे अवसरों को गोल में तबदील नहीं कर पाए.
शुरुआत में ही फ़्रैंक रिबेरी के एक शानदार क्रॉस को गवू गोल में तबदील नहीं पाए. उरूग्वे की ओर से डिगो पेरेज़ और डीगो फ़ोरलैन ने गोल करने की कोशिश की लेकिन दोनों नाकाम रहे. विश्व कप फ़ुटबॉल के पहले मुक़ाबले में मेज़बान दक्षिण अफ़्रीक़ा और मेक्सिको के बीच ज़बरदस्त टक्कर रही और मैच 1-1 की बराबरी से ड्रा रहा. एक गोल की बढ़त हासिल करने वाली दक्षिण अफ़्रीक़ी टीम की जीत की उम्मीद पर रफ़ैल मारकेस ने खेल ख़त्म होने से 12 मिनट पहले गोल करके पानी फेर दिया.
और इस तरह निर्धारित डेढ़ घंटे के समय में दोनों टीमें 1-1 गोल ही कर सकीं. लेकिन कुल मिलाकर पूरे खेल में मेक्सिको की टीम हावी रही.इससे पहले साउथ अफ़्रीका के सिफीवे त्शाबलाला विश्व कप 2010 का पहला गोल दाग़ कर दक्षिण अफ़्रीका को बढ़त दिलाई थी. यह पहला मुक़ाबला शुक्रवार को दक्षिण अफ़्रीक़ा के शहर जोहानेसबर्ग के सॉकर सिटी में खेला गया.
इससे पहले दक्षिण अफ़्रीक़ा के राष्ट्रपति जैकब ज़ूमा ने मैदान पर आकर खेल को शुरु करने का एलान किया. पहले हाफ़ में दोनों में से कोई भी टीम गोल करने में नाकाम रही लेकिन जैसे ही दूसरे हाफ़ में खेल शुरू हुआ दक्षिण अफ़्रीक़ा ने बाज़ी मारी और पहला गोल दाग़ दिया. दूसरे हाफ़ में अभी खेल नौ मिनट ही हुए थे कि 54वें मिनट पर दक्षिण अफ़्रीक़ा के सिफ़ीवे त्शाबलाला ने पहला गोल दाग़ा.
इस गोल के साथ ही दक्षिण अफ़्रीक़ी खिलाड़ियों के हौसले बुंलद हो गए और दूसरे हाफ़ में उनके खेल में सुधार हुआ और गेंद पर पकड़ भी बढ़ी. लेकिन दक्षिण अफ़्रीक़ा को उस समय मायूसी हाथ लगी जब 78वें मिनट में मेक्सिको के मारकेस ने गोल दाग़ कर बराबरी हासिल कर ली. दक्षिण अफ्रीका के पास अंतिम समय में जीत का मौक़ा था और एमफ़ेला ने एक शानदार शॉट् लगाया लेकिन वो गोलपोस्ट से टकरा गया.
पूरे मैच में गेंद मेक्सिको के पास 57 प्रतिशत रही तो दक्षिण अफ़्रीक़ा केवल 43 प्रतिशत ही अपने पास गेंद रख सका. फ़ाउल के मामले में दक्षिण अफ़्रीक़ा को 15 तो मेक्सिको को 11 का सामना करना पड़ा. जहां तक कॉर्नर की बात है तो दक्षिण अफ़्रीक़ा को चार तो मेक्सिको को पांच मिले. मेक्सिको ने गोल दाग़ने की नौ कोशिशें कीं जबकि दक्षिण अफ़्रीक़ा केवल तीन बार ही गोल दाग़ने की कोशिश कर सका.