जर्मनी ने चार साल पहले पिछले विश्व कप में अर्जेटीना को पराजित कर बाहर का रास्ता दिखाया था। ऐसे में अच्छे फार्म में दिख रही अर्जेटीना की टीम जहां बदला चुकाने की कोशिश करेगी वहीं जर्मनी की टीम फिर उस कारनामे को दोहराने का प्रयत्न करेगी जो उसने 2006 के विश्व कप में किया था। ऐसे में इस मुकाबले के रोमांचक होने की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
अंतिम आठ में जगह बनाने से पहले अर्जेटीना ने प्री-क्वोर्टरफाइनल मुकाबले में मेक्सिको को पराजित किया था। इससे पहले उसने अपने सभी ग्रुप मैच भी जीते थे। जबकि जर्मनी ने प्री-क्वोर्टरफाइनल में इंग्लैंड को 4-1 से पराजित कर सनसनीखेज जीत दर्ज की थी। इससे पहले ग्रुप स्तर पर उसका प्रदर्शन बहुत मार्के का नहीं था। उसने आस्ट्रेलिया और घाना को आसानी से पराजित किया था पर सर्बिया के हाथों उसे हार का सामना करना पड़ा था।
दोनों टीमों के बीच अब तक हुए मुकाबलों पर नजर दौड़ाई जाए तो जर्मनी का पलड़ा भारी दिखाई देता है। विश्व कप में दोनों टीमें अभी तक पांच बार भिड़ी हैं। इनमें से तीन बार जर्मनी को जीत मिली है जबकि अर्जेटीना को महज एक से ही संतोष करना पड़ा है। दोनों के बीच खेला गया एक मुकाबला गोलरहित बराबरी पर खत्म हुआ था।
वर्ष 1986 में मेक्सिको में हुए विश्व कप के फाइनल मुकाबले में अर्जेंटीना ने जर्मनी को हराया था और खिताब अपने नाम किया था। जर्मनी में 2006 विश्वकप में अर्जेटीना को हराकर इसका बदला चुकाया था। हिसाब किताब चुकाने की बारी अब अर्जेटीना की है।
अर्जेटीना के कोच दिएगो माराडोना ने कहा, "यह ऐसा मुकाबला है जिसे हम किसी भी सूरत में गंवाना नहीं चाहेंगे। मैं इसकी तुलना 1986 के फाइनल मुकाबले से भी नहीं करना चाहूंगा।"
उन्होंने कहा, "बेशक जर्मनी की टीम बेहद मजबूत है। वह मेक्सिको से बहुत मजबूत है लेकिन हमारे पास इतने संसाधन उपलब्ध हैं कि हम उन्हें पराजित कर सकें।"
जर्मनी के फारवर्ड खिलाडी क्लोस का कहना है, "कागज पर देखा जाए तो अर्जेटीना की टीम बहुत मजबूत है। ऐसा ही इंग्लैंड के साथ था। उनके पास भी बड़े नाम थे और बड़ा अनुभव था लेकिन मैदान पर वह दिखा नहीं।"
उन्होंने कहा, "हमारी टीम बहुत अच्छी है। हमने जैसा पिछले मैच में प्रदर्शन किया था, वैसा ही प्रदर्शन करने के लिए मैदान पर उतरेंगे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।