ऑस्‍ट्रेलिया बना हॉकी का विश्‍व चैंपियन

By Neha Nautiyal
नई दिल्ली। पिछले दो बार से लगातार खिताबी जीत दर्ज करती आ रही जर्मनमी की टीम को ऑस्‍ट्रेलिया ने कड़ी टक्‍कर देते हुए शनिवार को हॉकी विश्‍व कप जी‍त लिया। मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में ऑस्‍ट्रेलिया ने जर्मनी को 2-1 से हराकर हीरो होंडा एफआईएच विश्व कप का खिताब पर कब्‍जा किया। इसके साथ आस्ट्रेलिया ने खिताबी हैट्रिक पूरी करने की जर्मनी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

जर्मनी ने 2002 और 2006 विश्व कप में आस्ट्रेलिया को हराकर खिताब जीता था। आस्ट्रेलियाई टीम 1986 के बाद हॉकी जगत का सिरमौर बनी है। जैसी कि उम्मीद थी, यह मैच सही मायने में फाइनल सरीखा हुआ। दोनों टीमों के बीच पहली सीटी बजने के साथ की आगे निकलने की होड़ लग गई। कोई किसी से कम नहीं था। वैसे इस दौड़ में आस्ट्रेलियाई टीम आगे निकल गई क्योंकि एडवर्ड ओकेंडन ने उसके लिए पहला गोल करने का श्रेय हासिल किया।

ओकेंडन ने मैच के छठे मिनट में जर्मनी के गोलकीपर टिम जेसॉल्ट को छकाकर अपनी टीम के लिए एक शानदार फील्ड गोल किया। भारत में 28 वर्ष के अंतराल के बाद खेले जा रहे विश्व कप के खिताबी मुकाबले का गवाह बनने के लिए नेशनल स्टेडियम में करीब 15,000 हॉकी प्रेमी मौजूद थे। जोश और जुनून से भरपूर माहौल में खेले जा रहे इस मुकाबले में 1-0 की बढ़त लेने के बाद आस्ट्रेलिया ने जर्मनी को अपने क्षेत्र में घुसने का कम ही मौका दिया।

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आस्ट्रेलियाई टीम जानती थी कि 1-0 के अंतर से भी विश्व कप जीतना उसके लिए उतना ही मायने रखेगा, जितना कि इससे बड़े अंतर से। ऐसे में उसने अपनी रक्षापंक्ति पर ध्यान दिया। अगले 41 मिनट तक दोनों टीमों के बीच आगे निकलने और बराबरी करने की होड़ चलती रही। दर्शकों ने भी पल-पल बदलते हालात का जमकर लुत्फ लिया।

इसी बीच 47वें मिनट में मिले दूसरे पेनाल्टी कार्नर पर जर्मन खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई। यह मौका बराबरी का गोल करने का हो सकता था और मोरित्ज फुस्‍ट्रेने अपने साथियों की इसी उम्मीद को सच में बदलते हुए एक शानदार गोल किया। जर्मनी 1-1 की बराबरी कर चुका था। जर्मनी की टीम ने अगले 11 मिनटों तक स्कोर 1-1 बनाए रखा और गोल करने का प्रयास करती रही लेकिन उसका दुर्भाग्य था कि 59वें मिनट में आस्ट्रेलिया को पेनाल्टी कार्नर मिला। ल्यूक डोरनर एक बार ड्रैग फ्लिक करने को तैयार थे।

दर्शकों की सांसें रुकी हुई थीं। तभी डोरनर ने गोल दाग दिया। आस्ट्रेलिया 2-1 से आगे हो चुका था। डोरनर ने इस टूर्नामेंट में आठवां गोल किया। इस गोल के साथ सर्वाधिक गोल की दौड़ में वह हॉलैंड के ताएकी ताएकेमा के बराबरी पर आ गए। एक मिनट बाद ही जर्मनी को एक और पेनाल्टी कार्नर मिला लेकिन वह उसका लाभ नहीं उठा सका। गेंद आस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के पास आते ही जर्मनी की रक्षापंक्ति कमजोर होती दिखी और नतीजा हुआ कि आस्ट्रेलिया ने 64वें मिनट में एक और पेनाल्टी कार्नर हासिल कर लिया। हालांकि इस पर गोल करने का उसका प्रयास बेकार साबित हुआ।

यूरोपीयन हॉकी में पावरहाउस का दर्जा रखने वाली जर्मनी के हाथों लगातार दो बार फाइनल गंवाती आ रही आस्ट्रेलियाई टीम ने प्रतिष्ठा के लिए हुई इस 'लड़ाई' में बाजी पूरे अंकों के साथ मार ली। इससे पहले यह बाजी जर्मनी के नाम रही थी। कुकाबुरा टीम में हर शनिवार को हर वो बात दिखी जो एक चैम्पियन टीम में होनी चाहिए। अपना पहला पूल मैच इंग्लैंड के हाथों गंवाने वाली इस टीम ने एक मिसाल पेश करते हुए अंतिम जीत के साथ खिताब अपने नाम किया।

पुराने प्रतिद्वन्‍द्वी रहे हैं ऑस्‍ट्रेलिया-जर्मनी

पिछले चार मुकाबलों की बात करें तो जर्मनी ने 2006 विश्व कप के फाइनल में आस्ट्रेलिया पर 4-3 से, 2002 विश्व कप के फाइनल में जर्मनी ने एक बार फिर आस्‍ट्रेलिया पर 2-1 से जीत हासिल की थी। इसके अलावा 1998 में तीसरे और चौथे स्थान के लिए खेले गए प्ले-ऑफ मुकाबले में जर्मनी ने आस्ट्रेलिया को 1-0 से हराया था। 1994 विश्व कप में तीसरे और चौथे स्थान के लिए खेले गए मैच में बेशक आस्ट्रेलियाई टीम जर्मनी को 5-2 से हराने में सफल रही थी।

इस हार ने जर्मन टीम को जहां खिताब की हैट्रिक पूरी करने नहीं दिया वहीं कुकाबुरा टीम ने दूसरा खिताब जीता। उसने 1986 में इंग्लैंड को 2-1 से हराकर इस खिताब पर कब्जा किया था। इसके बाद हालांकि उसे एक भी खिताबी जीत नहीं मिल सकी थी। आस्ट्रेलिया ने इससे पहले एक खिताबी जीत के अलावा विश्व कप में दो बार रजत पदक और चार बार कांस्य पदक हासिल किए थे। यह मैच जर्मनी के लिए इसलिए खास था क्योंकि इसे जीतकर वह हॉकी विश्व कप में लगातार तीन बार खिताब हासिल करने वाली एकमात्र टीम बन सकती थी।

इस हार ने जर्मनी के लगातार 20 मैचों में जीत हासिल करने के सपने को भी पूरा नहीं होने दिया। इंग्लैंड को हराने के साथ जर्मनी की टीम ने विश्व कप में लगातार 19 मैचों में जीत हासिल की थी। यह टीम 2002 विश्व कप के बाद से 2010 विश्व कप के फाइनल तक अजेय रही। लगातार सर्वाधिक जीत हासिल करने का रिकार्ड आस्ट्रेलिया के नाम है। आस्ट्रेलिया ने 1978 से 1990 तक विश्व कप में लगातार 20 जीत हासिल की थी।

तीसरी बार फाइनल में भिड़ीं दोनों टीमें

जर्मनी और आस्ट्रेलिया लगातार तीसरी बार फाइनल में भिड़े। दोनों टीमों के बीच विश्व कप में कुल 11 मैच खेले गए हैं। दोनों टीमों ने चार-चार मैच जीते हैं जबकि तीन मैचों का नतीजा नहीं निकल सका। आस्ट्रेलिया लगातार तीन बार विश्व कप के फाइनल में जगह बनाने वाली तीसरी टीम है। इससे पहले जर्मनी ने 2002 से 2010, पाकिस्तान ने 1975 से 1982 और हॉलैंड ने 1990 से 1998 के बीच यह कारनामा किया है।

बहरहाल, अपना आखिरी विश्व कप खेल रहे हॉलैंड टीम के गोली और कप्तान वोगेल्स गल को प्रतियोगिता का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी और गोलकीपर चुना गया जबकि जर्मनी के कप्तान मैक्स मुलर को सर्वश्रेष्ठ डिफेंडर का पुरस्कार मिला। न्यूजीलैंड की टीम को फेयरप्ले पुरस्कार से नवाजा गया जबकि हॉलैंड के खिलाड़ी ताएकी ताएकेमा और आस्ट्रेलिया के ल्यूक डोरनर 8-8 गोलों के साथ प्रतियोगिता के सर्वोच्च स्कोरर बने।

नेशनल स्टेडियम के बीचों-बीच लगाए गए पोडियम पर तीसरे स्थान पर रही हालैंड की टीम, दूसरे स्थान पर रही जर्मनी की टीम और पहले स्थान पर रही आस्ट्रेलियाई टीम के खिलाड़ी खड़े थे। केंद्रीय खेल मंत्री मनोहर सिंह गिल ने विजेता टीम के खिलाड़ियों को पदक दिया और भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष सुरेश कलमाडी तथा अंतर्राष्ट्रीय हॉकी महासंघ के अध्यक्ष लियोन्रेडे नेगरे ने विजेता, उप विजेता और तीसरे स्थान पर आई हॉलैंड की टीम को पदक दिया।

भारतीय दर्शकों का ध्‍यान्‍यवाद दिया

मैच की खास बात यह रही कि जर्मनी के खिलाड़ियों ने भारतीय दर्शकों का धन्यवाद किया। मैदान में मौजूद लगभग सभी दर्शक जर्मनी को चैम्पियन के रूप में देखना चाहते थे, लेकिन कांटे के मुकाबले में मिली हार ने भारतीयों को भी निराश कर दिया। जर्मनी की टीम ने एक बड़े बैनर, जिस पर एक तरफ जर्मन राष्ट्रध्वज और दूसरी ओर भारत का राष्ट्रध्वज बना हुआ था, के माध्यम से भारतीयों का अपार सहयोग और समर्थन के लिए धन्यवाद किया।

उस बैनर पर लिखा था-'वी थैंक यू फॉर द सपोर्ट एंड द लव यू गेव टू अस' (आपने जो प्यार और सहयोग हमें दिया, हम उसके लिए आपको धन्यवाद देते हैं)। जर्मन खिलाड़ी बैनर के साथ मैदान के चारो ओर दौड़े। इस प्रक्रिया के दौरान भारतीय दर्शकों ने खड़े होकर उनका अभिवादन किया।

एक ऐसे देश में जिसकी खुद की टीम आठवें स्थान पर रही और जहां हॉकी धीरे-धीरे मरता जा रहा है, किसी विदेशी टीम द्वारा वहां के हॉकी प्रेमियों को धन्यवाद देना इस खेल की और उस देश के खिलाड़ियों के खेल भावना की जीत है। निश्चित तौर पर मैच तो आस्ट्रेलिया ने जीता लेकिन जर्मन खिलाड़ियों ने अपनी खेल भावना से करोड़ों भारतवासियों का दिल जीत लिया।

Story first published: Sunday, March 14, 2010, 11:14 [IST]
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